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Hindi News ›   City & states ›   Demand has risen not just for wheat, but also for sorghum

अब सिर्फ गेहूं नहीं, ज्वार-रागी और मल्टीग्रेन आटे की बढ़ी मांग

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Tue, 28 Jul 2026 11:03 PM IST
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बहादुरगढ़। बदलते समय के साथ लोगों की खानपान की आदतों में भी बदलाव आ रहा है। सेहत के प्रति बढ़ती जागरूकता के चलते बहादुरगढ़ की अनाज मंडी और बाजार में ज्वार, रागी, बाजरा, चना, सोयाबीन और मल्टीग्रेन आटे की मांग लगातार बढ़ रही है। व्यापारी बताते हैं कि पहले इन आटों की मांग सीमित थी, लेकिन अब बड़ी संख्या में ग्राहक इन्हें खरीद रहे हैं।
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अनाज मंडी और शहर के आटा विक्रेताओं के यहां गेहूं के अलावा ज्वार, रागी, बाजरा, मक्का, चना, सोयाबीन, जौ और ओट्स के आटे उपलब्ध हैं। इसके साथ ही विभिन्न अनाजों और दालों से तैयार मल्टीग्रेन आटा भी लोगों की पसंद बन रहा है। व्यापारी कृष्ण गोयल, सुधीर गुप्ता, धर्मेंद्र कुमार और संदीप शर्मा ने बताया कि पहले लोग मोटे अनाज का आटा केवल डॉक्टर की सलाह पर खरीदते थे, लेकिन अब युवा और स्वास्थ्य के प्रति जागरूक परिवार भी इसे नियमित रूप से अपना रहे हैं।
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उन्होंने बताया कि कोविड के बाद मल्टीग्रेन आटे की मांग में तेजी आई है। मधुमेह, मोटापा और पाचन संबंधी समस्याओं से बचाव के लिए लोग अपने भोजन में बदलाव कर रहे हैं। कई ग्राहक अपनी पसंद के अनुसार गेहूं, ज्वार, रागी, चना और सोयाबीन का मिश्रण तैयार करवाते हैं। मोटे अनाज के बढ़ते चलन से किसानों और व्यापारियों दोनों को लाभ मिल रहा है।
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नागरिक अस्पताल के फिजीशियन डॉ सुखपाल ने संतुलित आहार में मोटे अनाज और दालों से तैयार आटे को शामिल करने की सलाह दी है। इनमें फाइबर, प्रोटीन, कैल्शियम और अन्य पोषक तत्व भरपूर मात्रा में पाए जाते हैं, जिससे पाचन बेहतर रहता है और शरीर को आवश्यक पोषण मिलता है।

पांच साल में तीन गुना बढ़ी डिमांड
अनाज मंडी के आटा व्यापारी शिव कुमार बंसल ने बताया कि यूं तो मल्टीग्रेन आटे की मांग कोरोना काल में ही होने लगी थी, लेकिन अब मांग में तेजी आई है। जहां वर्ष 2021 में मल्टीग्रेन आटा दिनभर में एक हजार किलो से अधिक बिकता था, वहीं अब इसकी मांग तीन गुना हो गई है। अब करीब तीन हजार किलो से अधिक बिकने लगा है। आने वाले समय के अनुसार मांग और बढ़ने की संभावना है। काफी संख्या में लोग चना और मक्के का आटा भी अलग से खरीद रहे है।





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