{"_id":"58b08c8e4f1c1bb00db22ebd","slug":"congress-sp-alliance-base-on-up-election-results","type":"story","status":"publish","title_hn":"...तो नतीजों पर टिका है कांग्रेस-सपा गठबंधन","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
...तो नतीजों पर टिका है कांग्रेस-सपा गठबंधन
टीम डिजिटल, अमर उजाला, कानपुर
Updated Sat, 25 Feb 2017 01:20 AM IST
सार
- अखिलेश यादव के बयान पर बदला कांग्रेसियों का नजरिया
- मतगणना के कयासों के बीच महाराजपुर की हालात पर खूब चल रही चर्चा
विज्ञापन
राहुल गांधी के साथ अखिलेश यादव रोड शो के दौरान (फाइल फोटो)
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
आजकल सिर्फ दो ही मुद्दों पर चर्चा हो रही है। एक मुद्दा प्रदेश के मुख्यमंत्री अखिलेश यादव के बयान और दूसरा महाराजपुर विधानसभा में चल रही खींचतान।
इन चर्चाओं के दौरान शहर के कांग्रेसियों के बदले नजरिए की झलक मिलती है। बैठकों में शामिल अधिकतर कांग्रेसियों का मानना है कि प्रदेश में कांग्रेस-सपा की सरकार बनने पर ही गठबंधन आगे बढ़ेगा।
बीते दिनों सीएम अखिलेश यादव ने कांग्रेस के साथ गठबंधन को मजबूरी के कारण हुआ गठबंधन बताया था। इसके बाद महाराजपुर में कांग्रेस प्रत्याशी राजाराम पाल और सपा प्रत्याशी अरुणा तोमर ने एक-दूसरे के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज करा दी। इन दोनों मामलों के चलते पहले से ही गठबंधन के विरोध में रहे कांग्रेसियों का मानना है कि सत्ता के लिए यह मिलन हुआ है।
विज्ञापन
यदि सत्ता नहीं मिली तो इसका आगे बढ़ना मुश्किल है। गठबंधन के कारण चुनाव लड़ने से वंचित रहे पार्टी पदाधिकारी भी इसी मौके की ताक में बैठे हैं। सपा में भी यही स्थिति है।
कांग्रेस महानगर अध्यक्ष हरप्रकाश अग्निहोत्री के मुताबिक आलाकमान के निर्देशों के मुताबिक कांग्रेस कार्यकर्ताओं और पदाधिकारियों ने गठबंधन धर्म निभाते हुए दोनों दलों के संयुक्त प्रत्याशियों को विधानसभा सीट के मुताबिक चुनाव लड़वाया है। मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने अपनी सोच के लिहाज से बयान दिया है। कांग्रेसी भविष्य में भी आलाकमान के दिशा-निर्देशों के मुताबिक काम करेंगे। कांग्रेस पार्टी महाराजपुर में दोबारा मतदान की मांग कर रही है।
विज्ञापन
इन चर्चाओं के दौरान शहर के कांग्रेसियों के बदले नजरिए की झलक मिलती है। बैठकों में शामिल अधिकतर कांग्रेसियों का मानना है कि प्रदेश में कांग्रेस-सपा की सरकार बनने पर ही गठबंधन आगे बढ़ेगा।
विज्ञापन
बीते दिनों सीएम अखिलेश यादव ने कांग्रेस के साथ गठबंधन को मजबूरी के कारण हुआ गठबंधन बताया था। इसके बाद महाराजपुर में कांग्रेस प्रत्याशी राजाराम पाल और सपा प्रत्याशी अरुणा तोमर ने एक-दूसरे के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज करा दी। इन दोनों मामलों के चलते पहले से ही गठबंधन के विरोध में रहे कांग्रेसियों का मानना है कि सत्ता के लिए यह मिलन हुआ है।
विज्ञापन
यदि सत्ता नहीं मिली तो इसका आगे बढ़ना मुश्किल है। गठबंधन के कारण चुनाव लड़ने से वंचित रहे पार्टी पदाधिकारी भी इसी मौके की ताक में बैठे हैं। सपा में भी यही स्थिति है।
कांग्रेस महानगर अध्यक्ष हरप्रकाश अग्निहोत्री के मुताबिक आलाकमान के निर्देशों के मुताबिक कांग्रेस कार्यकर्ताओं और पदाधिकारियों ने गठबंधन धर्म निभाते हुए दोनों दलों के संयुक्त प्रत्याशियों को विधानसभा सीट के मुताबिक चुनाव लड़वाया है। मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने अपनी सोच के लिहाज से बयान दिया है। कांग्रेसी भविष्य में भी आलाकमान के दिशा-निर्देशों के मुताबिक काम करेंगे। कांग्रेस पार्टी महाराजपुर में दोबारा मतदान की मांग कर रही है।