{"_id":"6a81c7bc13e38c0a2907d6b7","slug":"cadet-nishant-cremated-with-military-honors-in-kasni-jhajjar-news-c-195-1-nnl1001-138751-2026-08-16","type":"story","status":"publish","title_hn":"कैडेट निशांत का कासनी में सैन्य सम्मान के साथ हुआ अंतिम संस्कार","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
कैडेट निशांत का कासनी में सैन्य सम्मान के साथ हुआ अंतिम संस्कार
विज्ञापन
16jjrp34- कासनी गांव निवासी कैडेट निशांत धनखड़।
संवाद न्यूज एजेंसी
झज्जर। कासनी गांव के कैडेट निशांत धनखड़ का पार्थिव शरीर रविवार को पैतृक गांव पहुंचा। नम आंखों से उन्हें अंतिम विदाई दी गई। निशांत का निधन देहरादून में प्रशिक्षण के दौरान हुआ था।
बादली से विधायक कुलदीप वत्स ने श्रद्धांजलि अर्पित की। झज्जर के नायब तहसीलदार अंशुल ने भी पुष्प चक्र चढ़ाए। जिला सैनिक बोर्ड की ओर से सूबेदार राजेश ने नमन किया। पूर्ण सैन्य सम्मान के साथ कैडेट निशांत का अंतिम संस्कार किया गया। सैन्य टुकड़ी ने उन्हें 'गार्ड ऑफ ऑनर' दिया।
निशांत सेना में लेफ्टिनेंट पद पर चयनित हुए थे। उनके आवास पर पार्थिव शरीर पहुंचते ही परिजनों की आंखें नम हो गईं। पूरे गांव में शोक की लहर दौड़ गई। सैकड़ों ग्रामीणों और अधिकारियों ने उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि दी। गांव के बुजुर्गों और युवाओं ने निशांत को देश सेवा के प्रति समर्पित बताया।
विज्ञापन
निशांत धनखड़ 10 जुलाई को देहरादून आईएमए में प्रशिक्षण के लिए पहुंचे थे। 9 अगस्त को दौड़ के दौरान उनकी हालत बिगड़ गई थी। तीन गंभीर कैडेट्स में निशांत भी शामिल थे। उन्हें आर्मी के आरआर अस्पताल दिल्ली लाया गया। शनिवार शाम को निशांत की मृत्यु हो गई।
इंसेट
परिवार का सैन्य योगदान
निशांत की बहन अंशिता धनखड़ भी फ्लाइंग ऑफिसर हैं, जिनका चयन दो साल पहले हुआ था। उनके पिता की तीन साल पहले मृत्यु हुई थी, वे पोस्टमैन थे। दादा राम सिंह भी आर्मी में थे। बड़े ताऊ दिवंगत नरेंद्र एयरफोर्स में फ्लाइंग ऑफिसर थे। उनके परिवार के कई सदस्य सेना में कार्यरत हैं, जिनमें ताऊ के बेटे कर्नल, बहू मेजर और बेटी फ्लाइंग ऑफिसर तथा चाचा सतेंद्र वारंट ऑफिसर शामिल हैं।
विज्ञापन
झज्जर। कासनी गांव के कैडेट निशांत धनखड़ का पार्थिव शरीर रविवार को पैतृक गांव पहुंचा। नम आंखों से उन्हें अंतिम विदाई दी गई। निशांत का निधन देहरादून में प्रशिक्षण के दौरान हुआ था।
बादली से विधायक कुलदीप वत्स ने श्रद्धांजलि अर्पित की। झज्जर के नायब तहसीलदार अंशुल ने भी पुष्प चक्र चढ़ाए। जिला सैनिक बोर्ड की ओर से सूबेदार राजेश ने नमन किया। पूर्ण सैन्य सम्मान के साथ कैडेट निशांत का अंतिम संस्कार किया गया। सैन्य टुकड़ी ने उन्हें 'गार्ड ऑफ ऑनर' दिया।
विज्ञापन
निशांत सेना में लेफ्टिनेंट पद पर चयनित हुए थे। उनके आवास पर पार्थिव शरीर पहुंचते ही परिजनों की आंखें नम हो गईं। पूरे गांव में शोक की लहर दौड़ गई। सैकड़ों ग्रामीणों और अधिकारियों ने उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि दी। गांव के बुजुर्गों और युवाओं ने निशांत को देश सेवा के प्रति समर्पित बताया।
विज्ञापन
निशांत धनखड़ 10 जुलाई को देहरादून आईएमए में प्रशिक्षण के लिए पहुंचे थे। 9 अगस्त को दौड़ के दौरान उनकी हालत बिगड़ गई थी। तीन गंभीर कैडेट्स में निशांत भी शामिल थे। उन्हें आर्मी के आरआर अस्पताल दिल्ली लाया गया। शनिवार शाम को निशांत की मृत्यु हो गई।
इंसेट
परिवार का सैन्य योगदान
निशांत की बहन अंशिता धनखड़ भी फ्लाइंग ऑफिसर हैं, जिनका चयन दो साल पहले हुआ था। उनके पिता की तीन साल पहले मृत्यु हुई थी, वे पोस्टमैन थे। दादा राम सिंह भी आर्मी में थे। बड़े ताऊ दिवंगत नरेंद्र एयरफोर्स में फ्लाइंग ऑफिसर थे। उनके परिवार के कई सदस्य सेना में कार्यरत हैं, जिनमें ताऊ के बेटे कर्नल, बहू मेजर और बेटी फ्लाइंग ऑफिसर तथा चाचा सतेंद्र वारंट ऑफिसर शामिल हैं।

16jjrp34- कासनी गांव निवासी कैडेट निशांत धनखड़।