डिजिटल धोखाधड़ी: सुप्रीम कोर्ट सख्त, कहा- बैंक बने जवाबदेह; व्हाट्सएप ने बताया 9400 खाते प्रतिबंधित
सुप्रीम कोर्ट ने डिजिटल धोखाधड़ी के पीड़ितों को मुआवजा देने के लिए बैंकों को जवाबदेह ठहराया। वॉट्सऐप ने 9,400 संदिग्ध खाते प्रतिबंधित किए। आरबीआई के केवाईसी निर्देशों की भी होगी जांच।
विस्तार
डिजिटल गिरफ्तारी के बढ़ते मामलों पर सुप्रीम कोर्ट ने कड़ा रुख अपनाया है। कोर्ट ने कहा कि डिजिटल धोखाधड़ी के पीड़ितों को हुए नुकसान की भरपाई के लिए बैंकों को जवाबदेह बनाया जाना चाहिए। इस बीच, व्हाट्सएप ने सुप्रीम कोर्ट को बताया कि उसने अब तक 9,400 संदिग्ध खातों को प्रतिबंधित किया है।
सुप्रीम कोर्ट ने भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के केवाईसी संशोधन निर्देशों की जांच करने की बात कही है। ये निर्देश 31 दिसंबर तक लागू किए जाने हैं। न्यायालय ने यह भी साफ किया कि ग्राहकों के साथ धोखाधड़ी होने पर बैंकों का ग्राहकों के प्रति कर्तव्य है। उन्हें असामान्य लेनदेन के बारे में पड़ोसी पुलिस थानों को तुरंत सूचित करना चाहिए। यह कदम डिजिटल धोखाधड़ी से निपटने और पीड़ितों को सुरक्षा प्रदान करने के लिए महत्वपूर्ण है।
सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि बैंकों को अपनी जिम्मेदारी समझनी होगी। धोखाधड़ी के मामलों में उनकी निष्क्रियता स्वीकार्य नहीं होगी। यह सुनिश्चित करना बैंकों की प्राथमिकता होनी चाहिए कि उनके ग्राहक सुरक्षित रहें।
क्या है डिजिटल गिरफ्तारी से जुड़ी धोखाधड़ी?
डिजिटल गिरफ्तारी धोखाधड़ी में अपराधी खुद को पुलिस या सरकारी अधिकारी बताकर लोगों को धमकाते हैं। वे पीड़ितों को ऑनलाइन लेनदेन करने या पैसे भेजने के लिए मजबूर करते हैं। अक्सर, वे पीड़ितों को यह विश्वास दिलाते हैं कि उनके खिलाफ कोई मामला दर्ज है। इस तरह की धोखाधड़ी में लोग अपनी मेहनत की कमाई गंवा देते हैं। यह एक गंभीर अपराध है जो तेजी से बढ़ रहा है।
बैंकों की क्या होगी भूमिका?
सुप्रीम कोर्ट के अनुसार, बैंकों को डिजिटल धोखाधड़ी के पीड़ितों के नुकसान की भरपाई करनी होगी। उन्हें संदिग्ध लेनदेन पर कड़ी नजर रखनी होगी। किसी भी असामान्य गतिविधि की सूचना तुरंत पुलिस को देनी होगी। आरबीआई के केवाईसी नियमों की जांच से भी बैंकों पर दबाव बढ़ेगा। यह सुनिश्चित करेगा कि बैंक अपनी सुरक्षा प्रणालियों को मजबूत करें।