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चीनी तकनीक से चलेंगी पॉटरी नगरी की भट्ठियां
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पॉटरी नगरी का दृश्य।
- फोटो : KHURJA
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चीनी तकनीक से चलेंगी पॉटरी नगरी की भट्ठियां
खुर्जा। विश्व में पॉटरी उत्पादों के लिए प्रसिद्ध खुर्जा की फैक्ट्रियों में चलने वाली भट्ठियां चीनी तकनीक से चलेंगी। इससे जहां ऊर्जा की खपत कम होगी, वहीं पर्यावरण पर भी कोई असर नहीं पड़ेगा। नगर की छह इकाइयों में चीनी तकनीक से भट्टियों में माल तैयार करने का काम शुरू भी कर दिया गया है। ऐसे में तैयार हुए माल की क्वालिटी में भी काफी सुधार आया है।
खुर्जा का पॉटरी उद्योग पहले से ही विश्व पटल पर अपनी धाक जमाता आ रहा है। यहां से तैयार माल देश ही नहीं विदेशों में भी निर्यात किया जाता है। जिसका रोजाना करोड़ों रुपये का कारोबार है। ऐसे में यहां के कारोबारियों ने चीनी तकनीक को अपनाकर उद्योग को नया आयाम देने की कोशिश शुरू कर दी है। पॉटरी कारोबारी दर्शन छतवाल ने बताया कि बीते वर्ष वह गुलजीत सिंह मिन्हास के साथ चीन गए थे। जहां पर उन्होंने चीन के पॉटरी फैक्ट्रियों का भ्रमण किया। उन्होंने बताया कि खुर्जा स्थित पॉटरी फैक्ट्रियों में जिन रिफेक्ट्री प्लेटों पर रखकर क्रॉकरी उत्पादों को फरनेस में पकाया जाता है, उसमें एक किलो माल को पकाने में चार गुनी ऊर्जा लगती है। दरअसल यहां की रिफेक्ट्री प्लेटें 15 एमएम की होती है और उनमें वजन भी अधिक होता है। ऐसे में एक किलो माल को पकाने के चक्कर में तीन किलो प्लेटों को भी पकाया जाता है। जबकि चीन में यह प्लेटें सात से दस एमएम की होती हैं। वजन भी उनका काफी कम है। वहां रैक सिस्टम बनाकर हल्की प्लेटों में माल को पकाने से कम ऊर्जा की खपत से अधिक माल तैयार होता है। यानि क्रॉकरी उत्पाद को पकाने में प्रयुक्त किए जाने वाले गैस और डीजल का भी खर्च कम पड़ता है।
इनसेट =
क्वालिटी बढ़ने के साथ सस्ता होगा माल
चीनी तकनीक से क्रॉकरी उत्पादों को पकाने से जहां उसकी क्वालिटी बढ़ी है, वहीं कम समय में उत्पादन में भी बढ़ोत्तरी हुई है। चीन के सस्ते उत्पादों के कारण ही उसने भारत समेत अन्य देशों में घुसपैठ की है। इस तकनीक को अपनाकर यहां के कारोबारी भी सस्ते और मजबूत उत्पाद तैयार कर टक्कर दे सकेंगे।
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खुर्जा। विश्व में पॉटरी उत्पादों के लिए प्रसिद्ध खुर्जा की फैक्ट्रियों में चलने वाली भट्ठियां चीनी तकनीक से चलेंगी। इससे जहां ऊर्जा की खपत कम होगी, वहीं पर्यावरण पर भी कोई असर नहीं पड़ेगा। नगर की छह इकाइयों में चीनी तकनीक से भट्टियों में माल तैयार करने का काम शुरू भी कर दिया गया है। ऐसे में तैयार हुए माल की क्वालिटी में भी काफी सुधार आया है।
खुर्जा का पॉटरी उद्योग पहले से ही विश्व पटल पर अपनी धाक जमाता आ रहा है। यहां से तैयार माल देश ही नहीं विदेशों में भी निर्यात किया जाता है। जिसका रोजाना करोड़ों रुपये का कारोबार है। ऐसे में यहां के कारोबारियों ने चीनी तकनीक को अपनाकर उद्योग को नया आयाम देने की कोशिश शुरू कर दी है। पॉटरी कारोबारी दर्शन छतवाल ने बताया कि बीते वर्ष वह गुलजीत सिंह मिन्हास के साथ चीन गए थे। जहां पर उन्होंने चीन के पॉटरी फैक्ट्रियों का भ्रमण किया। उन्होंने बताया कि खुर्जा स्थित पॉटरी फैक्ट्रियों में जिन रिफेक्ट्री प्लेटों पर रखकर क्रॉकरी उत्पादों को फरनेस में पकाया जाता है, उसमें एक किलो माल को पकाने में चार गुनी ऊर्जा लगती है। दरअसल यहां की रिफेक्ट्री प्लेटें 15 एमएम की होती है और उनमें वजन भी अधिक होता है। ऐसे में एक किलो माल को पकाने के चक्कर में तीन किलो प्लेटों को भी पकाया जाता है। जबकि चीन में यह प्लेटें सात से दस एमएम की होती हैं। वजन भी उनका काफी कम है। वहां रैक सिस्टम बनाकर हल्की प्लेटों में माल को पकाने से कम ऊर्जा की खपत से अधिक माल तैयार होता है। यानि क्रॉकरी उत्पाद को पकाने में प्रयुक्त किए जाने वाले गैस और डीजल का भी खर्च कम पड़ता है।
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क्वालिटी बढ़ने के साथ सस्ता होगा माल
चीनी तकनीक से क्रॉकरी उत्पादों को पकाने से जहां उसकी क्वालिटी बढ़ी है, वहीं कम समय में उत्पादन में भी बढ़ोत्तरी हुई है। चीन के सस्ते उत्पादों के कारण ही उसने भारत समेत अन्य देशों में घुसपैठ की है। इस तकनीक को अपनाकर यहां के कारोबारी भी सस्ते और मजबूत उत्पाद तैयार कर टक्कर दे सकेंगे।
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