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बहादुरगढ़ निवासी नर्स ने जीती कोरोना से जंग

Amarujala Local Bureau अमर उजाला लोकल ब्यूरो
Updated Thu, 23 Apr 2020 01:19 PM IST
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Bahadurgarh resident nurse won battle with Corona
बुधवार की रात एम्स से लौटकर धर्मपुरा में अपने घर के दरवाजे में खड़ी निशा। पास खड़े हैं सुरेंद्र चुघ और आशा वर्कर रेणु। - फोटो : AMAR UJALA
बहादुरगढ़। दिल्ली के महाराजा अग्रसेन अस्पताल में स्टाफ नर्स के रूप में कार्यरत बहादुरगढ़ के धर्मपुरा की निवासी निशा ने कोरोना से जंग जीत ली।
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आल इंडिया इंस्टीट्यूट आफ मेडिकल साइंसिस के बाढ़सा (एम्स-2) परिसर में इलाज के बाद संक्रमण मुक्त होकर बुधवार आधी रात को वह अपने घर लौट आई। दिल्ली के राम मनोहर लोहिया अस्पताल और एम्स स्टाफ के व्यवहार की उन्होंने सराहना की। निशा को एम्स की एंबुलेंस घर छोड़कर गई। उनके आने से पहले आशा वर्कर रेणु और धर्मपुरा निवासी नगर पार्षद प्रतिनिधि सुरेंद्र चुघ ने उनके घर व गली को सैनिटाइज करवाया और स्नेह-सम्मान से निशा की आगवानी की। चुघ ने उनके लिए दूध आदि की व्यवस्था की और उनके स्वस्थ व सुखी जीवन के लिए शुभकामनाएं दीं। निशा ने मंगलवार को ही अपने परिजनों को फोन करके बताया था कि बुधवार को उन्हें छुट्टी मिल सकती है। इसलिए परिजन बुधवार को दिनभर निशा की इंतजार करते रहे। अधिक व्यस्तता के कारण एम्स स्टाफ बुधवार को दिन में निशा को डिस्चार्ज नहीं कर पाया। सुरेंद्र चुघ ने बताया कि अस्पताल से लौटने के बाद नर्स निशा के चेहरे पर किसी तरह की घटराहट या चिंता की लकीरें नहीं थी। वह पहले की तरह ही पूरे हौंसले में थी। निशा ने बताया कि दोनों अस्पतालों के स्टाफ का व्यवहार बहुत अच्छा रहा। उन्हें बहुत थोड़ी दवाएं दी जाती थीं। भोजन व नाश्ता आदि भी समय पर मिलता था। निशा का कोरोना टेस्ट 6 अप्रैल को हुआ था और 8 तारीख की रात को रिपोर्ट आते ही बहादुरगढ़ के नागरिक अस्पताल से खुद एंबुलेंस बुलाकर वह पंजाबी बाग स्थित अग्रसेन अस्पताल चली गईं। वहां से उन्हें राम मनोहर लोहिया अस्पताल ले जाकर भर्ती कराया गया। कुछ रोज बाद वहां से एम्स बाढ़सा में शिफ्ट कर दिया गया। वह कुल मिलाकर 14 दिन आइसोलेट रही। निशा धर्मपुरा के सामने जटवाड़ा मोहल्ला की बेटी हैं। इसलिए 9 अप्रैल को उनकी बेटी, मां, पिता, भाई, बहन व भानजे को भी आइसोलेट करके स्वास्थ्य विभाग ने उनका टेस्ट करवाया। सौभाग्य से 10 अप्रैल को सभी की रिपोर्ट नेगेटिव आई थी। माना गया कि नर्स निशा को कोरोना संक्रमण महाराजा अग्रसेन अस्पताल में ही हुआ। जहां वह काम करती हैं। इस अस्पताल में भर्ती सोनीपत निवासी दिल्ली पुलिस के सब इंस्पेक्टर की कोरोना से मौत हो गई थी और उसके बाद अस्पताल के कई स्वास्थ्यकर्मी भी संक्रमित हो गए थे। दूसरों के संक्रमित होने के बाद नर्स निशा अलर्ट हो गई और उसने सभी परिजनों को बचा लिया। उसने 30 मार्च को ही अपनी बेटी को जटवाड़ा में नाना-नानी के पास छोड़ दिया और खुद अपने घर में क्वारन्टीन रहने लगी। उसकी यही समझदारी काम आई और बेटी समेत सभी परिजन कोरोना से बच गए।
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