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अमन सहरावत ने एशियाई खेल 2026 के लिए क्वालीफाई किया
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01jjrp14- अमन सहरावत
साल्हावास।
लखनऊ के क्षेत्रीय केंद्र में आयोजित पुरुषों की फ्रीस्टाइल कुश्ती प्रतियोगिता में 22 वर्षीय अमन सहरावत ने 57 किलोग्राम वर्ग के फाइनल में राहुल देसवाल को 11-1 के बड़े अंतर से हराकर एशियाई खेलों के लिए क्वालीफाई कर लिया है।
अमन सहरावत के एशियाई खेल 2026 के लिए चयन पर उनके पैतृक गांव बिरोहड़ और कुश्ती जगत में खुशी का माहौल है। वह इससे पहले हांगझोऊ एशियाई खेलों में कांस्य पदक जीत चुके हैं। अब वे 19 सितंबर से 4 अक्तूबर तक जापान के आइची-नागोया में होने वाली प्रतियोगिता में भारत का प्रतिनिधित्व करेंगे।
अमन ने कुश्ती की शुरुआत गांव बिरोहड़ स्थित गाधणी आश्रम के छोटे अखाड़े से की थी। उनके परिवार में चाचा कर्मवीर पहलवान, ताऊ सुधीर और अन्य सदस्य भी कुश्ती से जुड़े रहे हैं। परिवार के अनुसार अमन बचपन से ही कुश्ती के प्रति समर्पित रहे हैं।
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उन्होंने मात्र 10 वर्ष की उम्र में दिल्ली के छत्रसाल स्टेडियम में प्रशिक्षण शुरू किया। 11 वर्ष की उम्र में माता-पिता के निधन के बावजूद उन्होंने कठिन परिस्थितियों में भी कुश्ती जारी रखी और अपने लक्ष्य से नहीं डिगे। परिजनों के अनुसार कठिन समय में भी उनका हौसला और समर्पण कायम रहा।
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लखनऊ के क्षेत्रीय केंद्र में आयोजित पुरुषों की फ्रीस्टाइल कुश्ती प्रतियोगिता में 22 वर्षीय अमन सहरावत ने 57 किलोग्राम वर्ग के फाइनल में राहुल देसवाल को 11-1 के बड़े अंतर से हराकर एशियाई खेलों के लिए क्वालीफाई कर लिया है।
अमन सहरावत के एशियाई खेल 2026 के लिए चयन पर उनके पैतृक गांव बिरोहड़ और कुश्ती जगत में खुशी का माहौल है। वह इससे पहले हांगझोऊ एशियाई खेलों में कांस्य पदक जीत चुके हैं। अब वे 19 सितंबर से 4 अक्तूबर तक जापान के आइची-नागोया में होने वाली प्रतियोगिता में भारत का प्रतिनिधित्व करेंगे।
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अमन ने कुश्ती की शुरुआत गांव बिरोहड़ स्थित गाधणी आश्रम के छोटे अखाड़े से की थी। उनके परिवार में चाचा कर्मवीर पहलवान, ताऊ सुधीर और अन्य सदस्य भी कुश्ती से जुड़े रहे हैं। परिवार के अनुसार अमन बचपन से ही कुश्ती के प्रति समर्पित रहे हैं।
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उन्होंने मात्र 10 वर्ष की उम्र में दिल्ली के छत्रसाल स्टेडियम में प्रशिक्षण शुरू किया। 11 वर्ष की उम्र में माता-पिता के निधन के बावजूद उन्होंने कठिन परिस्थितियों में भी कुश्ती जारी रखी और अपने लक्ष्य से नहीं डिगे। परिजनों के अनुसार कठिन समय में भी उनका हौसला और समर्पण कायम रहा।