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सड़क निर्माण में गोलमाल पर कार्रवाई, एक्सईएन और एसडीओ निलंबित
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बहादुरगढ़। करीब तीन करोड़ रुपये की लागत से तीन ग्रामीण सड़कों के निर्माण में कथित अनियमितताओं के मामले में हरियाणा सरकार ने लोक निर्माण विभाग (भवन एवं सड़कें) के दो अधिकारियों को निलंबित कर दिया है।
बहादुरगढ़ के अधिशासी अभियंता (एक्सईएन) अनिल रोहिल्ला और प्रांतीय उपप्रभाग-एक के उपमंडल अभियंता (एसडीओ) मुकेश कुमार के निलंबन के आदेश 21 अक्तूबर को जारी किए गए। इससे पहले इसी मामले में विभाग के जेई मोहित को भी निलंबित किया जा चुका है।
अमर उजाला ने 14 जुलाई को निर्माण में कथित गड़बड़ियों का मामला प्रमुखता से उठाया था, जिसके बाद विभागीय जांच शुरू हुई। निलंबन अवधि के दौरान दोनों अधिकारियों का मुख्यालय चंडीगढ़ स्थित लोक निर्माण विभाग के इंजीनियर-इन-चीफ कार्यालय में निर्धारित किया गया है।
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हरियाणा सरकार के अतिरिक्त मुख्य सचिव एके सिंह की ओर से 21 अक्तूबर को जारी आदेश में इंजीनियर-इन-चीफ को संबंधित अधिकारियों के खिलाफ हरियाणा सिविल सेवा (दंड एवं अपील) नियम, 2016 के नियम सात के तहत आरोपपत्र तैयार करने के निर्देश दिए गए हैं।
विभाग मुख्यालय के एचओडी अनिल दहिया ने भी दोनों अधिकारियों के निलंबन की पुष्टि करते हुए बताया कि बहादुरगढ़ में सड़क निर्माण में कथित अनियमितताओं के मामले में यह कार्रवाई की गई है। सक्षम प्राधिकारी की पूर्व अनुमति के बिना वे मुख्यालय नहीं छोड़ सकेंगे।
जीएसबी और डब्ल्यूबीएम के काम पर उठे थे सवाल
मामला मुंढेला-सिदीपुर, जरदकपुर-गंगड़वा और ईस्सरहेड़ी-झाड़ौदा मार्गों के चौड़ीकरण से जुड़ा है। इन कार्यों पर करीब तीन करोड़ रुपये खर्च किए जा रहे थे। शिकायतों में आरोप लगाया गया था कि निर्धारित मोटाई की ग्रेन्युलर सब-बेस (जीएसबी) परत डालने के बजाय कुछ स्थानों पर पुरानी सड़क की सामग्री का इस्तेमाल किया गया। वहीं, वॉटर बाउंड मैकाडम (डब्ल्यूबीएम) कार्य में निर्धारित क्रेशर सामग्री के स्थान पर रेत इस्तेमाल करने के आरोप भी लगाए गए थे। जीएसबी और डब्ल्यूबीएम कार्यों के लिए करीब 50 लाख रुपये के भुगतान पर भी सवाल उठाए गए थे।
चंडीगढ़ से आई टीम ने लिए थे सैंपल
अमर उजाला में खबर प्रकाशित होने के बाद 14 जुलाई को चंडीगढ़ से लोक निर्माण विभाग की टीम ने तीनों सड़कों का निरीक्षण किया था। टीम ने प्रत्येक सड़क के करीब एक किलोमीटर के दायरे में जीएसबी और डब्ल्यूबीएम के दो-दो नमूने लेकर विभागीय प्रयोगशाला में जांच के लिए भेजे थे। मामले में पूर्व पार्षद जसबीर सैनी सहित अन्य स्तरों पर भी शिकायतें की गई थीं। शिकायतों में निर्माण कार्य निर्धारित समय में पूरा नहीं होने, ठेकेदार पर जुर्माना नहीं लगाने और समयावधि बढ़ाने के लिए औपचारिक अनुमति से जुड़े सवाल उठाए गए थे।
फोटो-56: बहादुरगढ़ में निर्माणाधीन सड़क। संवाद
फोटो-57: अमर उजाला की ओर से 15 जुलाई को प्रकाशित खबर।
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बहादुरगढ़ के अधिशासी अभियंता (एक्सईएन) अनिल रोहिल्ला और प्रांतीय उपप्रभाग-एक के उपमंडल अभियंता (एसडीओ) मुकेश कुमार के निलंबन के आदेश 21 अक्तूबर को जारी किए गए। इससे पहले इसी मामले में विभाग के जेई मोहित को भी निलंबित किया जा चुका है।
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अमर उजाला ने 14 जुलाई को निर्माण में कथित गड़बड़ियों का मामला प्रमुखता से उठाया था, जिसके बाद विभागीय जांच शुरू हुई। निलंबन अवधि के दौरान दोनों अधिकारियों का मुख्यालय चंडीगढ़ स्थित लोक निर्माण विभाग के इंजीनियर-इन-चीफ कार्यालय में निर्धारित किया गया है।
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हरियाणा सरकार के अतिरिक्त मुख्य सचिव एके सिंह की ओर से 21 अक्तूबर को जारी आदेश में इंजीनियर-इन-चीफ को संबंधित अधिकारियों के खिलाफ हरियाणा सिविल सेवा (दंड एवं अपील) नियम, 2016 के नियम सात के तहत आरोपपत्र तैयार करने के निर्देश दिए गए हैं।
विभाग मुख्यालय के एचओडी अनिल दहिया ने भी दोनों अधिकारियों के निलंबन की पुष्टि करते हुए बताया कि बहादुरगढ़ में सड़क निर्माण में कथित अनियमितताओं के मामले में यह कार्रवाई की गई है। सक्षम प्राधिकारी की पूर्व अनुमति के बिना वे मुख्यालय नहीं छोड़ सकेंगे।
जीएसबी और डब्ल्यूबीएम के काम पर उठे थे सवाल
मामला मुंढेला-सिदीपुर, जरदकपुर-गंगड़वा और ईस्सरहेड़ी-झाड़ौदा मार्गों के चौड़ीकरण से जुड़ा है। इन कार्यों पर करीब तीन करोड़ रुपये खर्च किए जा रहे थे। शिकायतों में आरोप लगाया गया था कि निर्धारित मोटाई की ग्रेन्युलर सब-बेस (जीएसबी) परत डालने के बजाय कुछ स्थानों पर पुरानी सड़क की सामग्री का इस्तेमाल किया गया। वहीं, वॉटर बाउंड मैकाडम (डब्ल्यूबीएम) कार्य में निर्धारित क्रेशर सामग्री के स्थान पर रेत इस्तेमाल करने के आरोप भी लगाए गए थे। जीएसबी और डब्ल्यूबीएम कार्यों के लिए करीब 50 लाख रुपये के भुगतान पर भी सवाल उठाए गए थे।
चंडीगढ़ से आई टीम ने लिए थे सैंपल
अमर उजाला में खबर प्रकाशित होने के बाद 14 जुलाई को चंडीगढ़ से लोक निर्माण विभाग की टीम ने तीनों सड़कों का निरीक्षण किया था। टीम ने प्रत्येक सड़क के करीब एक किलोमीटर के दायरे में जीएसबी और डब्ल्यूबीएम के दो-दो नमूने लेकर विभागीय प्रयोगशाला में जांच के लिए भेजे थे। मामले में पूर्व पार्षद जसबीर सैनी सहित अन्य स्तरों पर भी शिकायतें की गई थीं। शिकायतों में निर्माण कार्य निर्धारित समय में पूरा नहीं होने, ठेकेदार पर जुर्माना नहीं लगाने और समयावधि बढ़ाने के लिए औपचारिक अनुमति से जुड़े सवाल उठाए गए थे।
फोटो-56: बहादुरगढ़ में निर्माणाधीन सड़क। संवाद
फोटो-57: अमर उजाला की ओर से 15 जुलाई को प्रकाशित खबर।