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पीयू के कुलपति को एक्सटेंशन मिलने के आसार खत्म
Chandigarh
Updated Tue, 19 Jun 2012 12:00 PM IST
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चंडीगढ़। पंजाब यूनिवर्सिटी (पीयू) के मौजूदा कुलपति प्रो. आरसी सोबती को एक्सटेंशन मिलने के आसार अब खत्म हो गए हैं और उनके विकल्प की तलाश शुरू हो गई है। पीयू के कुलाधिपति और देश के उप-राष्ट्रपति डॉ. हामिद अंसारी ने तीन सदस्यीय सर्च कमेटी से पीयू के अगले कुलपति के लिए तीन नामों की सूची सौंपने को कहा है।
पीयू के अगले कुलपति को लेकर पिछले कुछ दिनों से तरह-तरह की चर्चाएं चल रही थीं, लेकिन सोमवार को उप-राष्ट्रपति कार्यालय से स्पष्ट कर दिया गया कि अगले कुलपति के तलाश के लिए गठित एक्सपर्ट कमेटी (सर्च) नहीं बदली जाएगी। 9 फरवरी को कुलाधिपति की ओर से पंजाब यूनिवर्सिटी एक्ट, 1947 के तहत गठित कमेटी को अपना काम जारी रखने और तीन नाम जल्द से जल्द प्रस्तावित कर सौंपने को कहा गया है। कुलाधिपति कार्यालय की ओर से जारी विज्ञप्ति में स्पष्ट किया गया है कि मौजूदा कुलपति प्रो. आरसी सोबती का कार्यकाल 22 जुलाई को खत्म हो रहा है।
कुलाधिपति की ओर से फरवरी में गठित सर्च कमेटी को लेकर यह विवाद हो गया था कि कमेटी का गठन यूजीसी के नियमों के तहत नहीं हुआ है। इस विवाद के बाद अप्रैल में केंद्रीय मानव संसाधन एवं विकास मंत्रालय से स्पष्टीकरण मांगा गया था कि यूजीसी के नियम पीयू के कुलपति की नियुक्ति पर प्रभावी होते हैं या नहीं? इसके बाद सर्च कमेटी को मंत्रालय के जवाब आने तक आगे का काम करने के लिए रोक दिया गया था।
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अब मंत्रालय ने कुलाधिपति कार्यालय को सलाह दी है कि यूजीसी के नियम 2010 को लेकर कुछ जटिलताएं हैं और यूजीसी से इन नियमों की दोबारा से समीक्षा करने को कहा गया है। जब तक यूजीसी की ओर से इन नियमों की नए सिरे से समीक्षा की जाती है, तब तक पंजाब यूनिवर्सिटी एक्ट 1947 और इस एक्ट के सेक्शन 31 के नियम प्रभावी रहेंगे। साथ ही पंजाब पुनर्गठन कानून, 1966 की धारा 72 के तह जारी होने वाली सरकारी अधिसूचनाएं भी प्रभावी रहेंगी।
ये हैं प्रबल दावेदार
पीयू के अगले कुलपति के लिए प्रबल दावेदारों में लॉ विभाग के प्रोफेसर पटियाला के राजीव गांधी लॉ यूनिवर्सिटी के मौजूदा कुलपति प्रो. परमजीत सिंह जसवाल और पीयू के बॉटनी विभाग के पूर्व अध्यक्ष एवं डीन रिसर्च प्रो. आरके कोहली शामिल हैं। सूत्रों का कहना है कि दोनों के बीच अगले कुलपति के लिए कड़ी टक्कर है। सर्च कमेटी के एक सदस्य ने भी कहा कि कमेटी ने तीन नाम लगभग तय कर लिए हैं और जल्द ही ये नाम कमेटी कुलाधिपति को सौंप देगी। कुलपति पद के अन्य दावेदारों में पीयू के दर्शन शास्त्र विभाग के पूर्व प्रोफेसर और रूहेलखंड विश्वविद्यालय के पूर्व कुलपति प्रो. सत्यपाल गौतम, लोक प्रशासन विभाग के प्रोफेसर बीएस घु्म्मन, पीयू के डीयूआई प्रो. बीएस बराड़ और अंग्रेजी विभाग के प्रोफेसर शैली वालिया शामिल हैं।
यह है सर्च कमेटी
कुलाधिपति की ओर से पीयू के कुलपति की तलाश के लिए हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट की पूर्व चीफ जस्टिस लीला सेठ की अध्यक्षता में तीन सदस्यीय कमेटी गठित की गई थी। इस कमेटी में हैदराबाद यूनिवर्सिटी के पूर्व कुलपति और केंद्र सरकार के डिपार्टमेंट ऑफ साइंस एंड टेक्नालाजी के पूर्व सचिव डॉ. पी रामा राव और रिटायर्ड आईएफएस अधिकारी व पीयू सीनेट सदस्य आईएस चड्ढा शामिल हैं। इस कमेटी को कुलपति पद के योग्य पीयू के उम्मीदवारों के साथ अन्य योग्य उम्मीदवारों में से तीन नाम सुझाने को कहा गया है।
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पीयू के अगले कुलपति को लेकर पिछले कुछ दिनों से तरह-तरह की चर्चाएं चल रही थीं, लेकिन सोमवार को उप-राष्ट्रपति कार्यालय से स्पष्ट कर दिया गया कि अगले कुलपति के तलाश के लिए गठित एक्सपर्ट कमेटी (सर्च) नहीं बदली जाएगी। 9 फरवरी को कुलाधिपति की ओर से पंजाब यूनिवर्सिटी एक्ट, 1947 के तहत गठित कमेटी को अपना काम जारी रखने और तीन नाम जल्द से जल्द प्रस्तावित कर सौंपने को कहा गया है। कुलाधिपति कार्यालय की ओर से जारी विज्ञप्ति में स्पष्ट किया गया है कि मौजूदा कुलपति प्रो. आरसी सोबती का कार्यकाल 22 जुलाई को खत्म हो रहा है।
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कुलाधिपति की ओर से फरवरी में गठित सर्च कमेटी को लेकर यह विवाद हो गया था कि कमेटी का गठन यूजीसी के नियमों के तहत नहीं हुआ है। इस विवाद के बाद अप्रैल में केंद्रीय मानव संसाधन एवं विकास मंत्रालय से स्पष्टीकरण मांगा गया था कि यूजीसी के नियम पीयू के कुलपति की नियुक्ति पर प्रभावी होते हैं या नहीं? इसके बाद सर्च कमेटी को मंत्रालय के जवाब आने तक आगे का काम करने के लिए रोक दिया गया था।
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अब मंत्रालय ने कुलाधिपति कार्यालय को सलाह दी है कि यूजीसी के नियम 2010 को लेकर कुछ जटिलताएं हैं और यूजीसी से इन नियमों की दोबारा से समीक्षा करने को कहा गया है। जब तक यूजीसी की ओर से इन नियमों की नए सिरे से समीक्षा की जाती है, तब तक पंजाब यूनिवर्सिटी एक्ट 1947 और इस एक्ट के सेक्शन 31 के नियम प्रभावी रहेंगे। साथ ही पंजाब पुनर्गठन कानून, 1966 की धारा 72 के तह जारी होने वाली सरकारी अधिसूचनाएं भी प्रभावी रहेंगी।
ये हैं प्रबल दावेदार
पीयू के अगले कुलपति के लिए प्रबल दावेदारों में लॉ विभाग के प्रोफेसर पटियाला के राजीव गांधी लॉ यूनिवर्सिटी के मौजूदा कुलपति प्रो. परमजीत सिंह जसवाल और पीयू के बॉटनी विभाग के पूर्व अध्यक्ष एवं डीन रिसर्च प्रो. आरके कोहली शामिल हैं। सूत्रों का कहना है कि दोनों के बीच अगले कुलपति के लिए कड़ी टक्कर है। सर्च कमेटी के एक सदस्य ने भी कहा कि कमेटी ने तीन नाम लगभग तय कर लिए हैं और जल्द ही ये नाम कमेटी कुलाधिपति को सौंप देगी। कुलपति पद के अन्य दावेदारों में पीयू के दर्शन शास्त्र विभाग के पूर्व प्रोफेसर और रूहेलखंड विश्वविद्यालय के पूर्व कुलपति प्रो. सत्यपाल गौतम, लोक प्रशासन विभाग के प्रोफेसर बीएस घु्म्मन, पीयू के डीयूआई प्रो. बीएस बराड़ और अंग्रेजी विभाग के प्रोफेसर शैली वालिया शामिल हैं।
यह है सर्च कमेटी
कुलाधिपति की ओर से पीयू के कुलपति की तलाश के लिए हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट की पूर्व चीफ जस्टिस लीला सेठ की अध्यक्षता में तीन सदस्यीय कमेटी गठित की गई थी। इस कमेटी में हैदराबाद यूनिवर्सिटी के पूर्व कुलपति और केंद्र सरकार के डिपार्टमेंट ऑफ साइंस एंड टेक्नालाजी के पूर्व सचिव डॉ. पी रामा राव और रिटायर्ड आईएफएस अधिकारी व पीयू सीनेट सदस्य आईएस चड्ढा शामिल हैं। इस कमेटी को कुलपति पद के योग्य पीयू के उम्मीदवारों के साथ अन्य योग्य उम्मीदवारों में से तीन नाम सुझाने को कहा गया है।