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मध्यप्रदेश: अन्नदाता की कस्टम केयर योजना में हो रही धांधली, 10 फीसदी किसानों को भी नहीं मिल रहा लाभ

Sat, 07 Aug 2021 07:56 PM IST
Harendra Chaudhary डिजिटल ब्यूरो, अमर उजाला, नई दिल्ली
डिजिटल ब्यूरो, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: Harendra Chaudhary Updated Sat, 07 Aug 2021 07:56 PM IST
सार

राष्ट्रीय किसान मजदूर महासंघ के मध्यप्रदेश के प्रदेश उपाध्यक्ष राहुल राज ने कहा, मध्यप्रदेश का यह दुर्भाग्य है कि जो योजना आर्थिक रूप से कमजोर किसानों की मदद के लिए लाई गई है, जिसके तहत लाखों की सब्सिडी सरकार कस्टम हायरिंग बनाने वाले सक्षम किसानों को देती है, उसका लाभ दस फीसदी भी गरीब किसानों को नहीं मिल पा रहा है...

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10 percent of the farmers are not getting the benefit in custom care scheme
खेती करते किसान - फोटो : अमर उजाला (फाइल)

विस्तार

मध्यप्रदेश में गरीब किसानों की मदद के लिए राज्य सरकार ने कस्टम केयर स्कीम को शुरू कर दिया है। योजना के लागू होने के बाद ही इसमें धांधली होने के खबरें सामने आने लगी हैं। छोटे किसानों का आरोप है कि पूरे प्रदेश में दस फीसदी छोटे किसानों को भी इसका फायदा नहीं मिल रहा है। नेता, अफसर और रसूखदार लोग इस योजना में मिलने वाली सब्सिडी का फायदा उठा रहे हैं।  

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राष्ट्रीय किसान मजदूर महासंघ के मध्यप्रदेश के प्रदेश उपाध्यक्ष राहुल राज ने अमर उजाला से कहा, मध्यप्रदेश का यह दुर्भाग्य है कि जो योजना आर्थिक रूप से कमजोर किसानों की मदद के लिए लाई गई है, जिसके तहत लाखों की सब्सिडी सरकार कस्टम हायरिंग बनाने वाले सक्षम किसानों को देती है, उसका लाभ दस फीसदी भी गरीब किसानों को नहीं मिल पा रहा है।
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राहुल राज ने आरोप लगाते हुए कहा कि योजना के नाम पर छोटे और गरीब किसानों के साथ खिलावड़ किया जा रहा है। इस योजना का सीधा फायदा क्षेत्र के रसूखदार लोगों के अलावा अफसर, नेता और उनसे जुड़े हुए प्रभावशाली लोगों को ही लाभ मिल रहा है। योजना के तहत उन्हीं लोगों की लॉटरी का चयन होता है, जो इन रसूखदार लोगों से जुड़े हुए हैं। अगर किसी सामान्य किसान का नाम लॉटरी में आ भी जाता है तो उसे भी अपना काम करवाने के लिए रिश्वत तक देना पड़ती है।
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उन्होंने आगे आरोप लगाया कि मध्यप्रदेश में कस्टम हायरिंग योजना में बड़े पैमाने पर भ्रष्टाचार हो रहा है। यहां तक देखने में आ रहा है कि जिन प्रभावी लोगों का चयन होता है वे आवेदन तो ट्रैक्टर ट्राली से लेकर कई तमाम कृषि यंत्रों का करते है परंतु केवल ट्रेक्टर खरीद कर बाकि यंत्रों को बिना खरीदे उन्हें निर्माण करने वाली बड़ी कंपनियों के साथ सांठगांठ कर कागज खानापूर्ति कर उनका पैसा योजना के नाम पर निकाल लेते है।

किसान नेता का आरोप है कि आज प्रदेश में केवल 10 फीसदी गरीब किसानों को इस योजना का लाभ मिल पा रहा है। बाकि जिस प्रकार वेयरहाउस योजना में सब्सिडी डकार कर बड़े-बड़े लोग लाभ उठाते हैं उसी प्रकार कस्टम हायरिंग योजना में भी अपनी जुगाड़ बैठाकर राजनेता, बड़े अफसर, बड़े व्यापारी और उनके करीबी लोग इस योजना में मिलने वाली सब्सिडी का लाभ उठाते है और अंतिम पंक्ति में खड़ा किसान, जिसके लिए ये योजना लाई गई वो इधर-उधर से उधार लेकर अपनी खेती करता रहता है और कर्ज में दबाता रहता है।

उन्होंने आगे कहा, आज इस योजना की मध्यप्रदेश में निष्पक्ष तरीके से जांच करवाई जाएं तो कई बड़े नेताओं से लेकर अधिकारी और प्रभावशाली लोगों के पास इसी योजना के तहत ट्रैक्टर और अन्य कृषि यंत्र मिलेंगे। जिनका उन्होंने कभी भी गरीब किसानों का लाभ नहीं होने दिया।

राहुल राज ने कृषि मंत्री कमल पटेल से निष्पक्ष जांच की मांग करते हुए ये प्रश्न खड़े किए कि क्या प्रदेश के कृषि मंत्री ये आंकड़े सार्वजनिक कर सकते हैं कि कितने किसानों को इस योजना के तहत कम दरों पर कृषि मिले और कहां-कहां मिले। क्योंकि अभी हमने यही देखा है कि राज्य में सरकार किसी भी दल की रहे बस एक की नारे है कि किसानों के नाम पर खूब जमकर लूटो।

ये है कस्टम हायरिंग योजना

कस्टम हायरिंग योजना एक ऐसी स्कीम है जिनमें आर्थिक रूप से कमजोर किसानों को कम दरों पर किराए पर कृषि यंत्र खेती के लिए उपलब्ध करवाए जाते हैं। इस योजना में एक एजेंसी के जरिए सक्षम किसान द्वारा आवेदन किया जाता है। लॉटरी सिस्टम के तहत  किसान के नाम का चयन किया जाता है। चयनित किसानों को 40 फीसदी तक की सब्सिडी कृषि यंत्रों की खरीद के लिए दी जाती है। चुने हुए किसानों को पांच दिनों की ट्रेनिंग सरकार देती है। इसके बाद सक्षम किसान अपने अपने क्षेत्रों में गरीब किसानों की सहायता के लिए कस्टम हायरिंग सेंटर स्थापित करते हैं। जहां से गरीब किसान मामूली दरों कृषि यंत्र किराए पर लेते है।

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