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जंगल बन रहे खेत... गुस्से में ग्रामीण: अतिक्रमण के खिलाफ विरोध प्रदर्शन, जंगली हाथियों का बढ़ रहा आतंक

Mon, 12 Aug 2024 12:02 PM IST
अनुज कुमार न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जशपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जशपुर Published by: अनुज कुमार Updated Mon, 12 Aug 2024 12:02 PM IST
सार

छत्तीसगढ़ के जशपुर में हाथियों का आतंक बढ़ता जा रहा है। इसके लिए ग्रामीणों में गुस्सा वन अधिकारियों के खिलाफ भी है। ग्रामीणों का अतिक्रमण के खिलाफ जंगल में विरोध प्रदर्शन चल रहा है। क्योंकि हाथियों के नजदीक आने से जांच अधूरी है।  

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Villagers protest in the forest against encroachment in Jashpur
हाथियों का आतंक - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

जिले के महेशपुर के जंगल में एक अनोखा वाकया सामने आया है। जहां एक तरफ वन अधिकार पट्टों की लालच में नियमों का उल्लंघन करते हुए जंगलों को काटकर जमीन पर कब्जा जमा रहे हैं। तो वहीं दूसरी ओर घटते वन क्षेत्र के कारण जंगली हाथियों का इंसानी बस्तियों में हिंसक व्यवहार सामने आ रहा है। 
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महेशपुर के रिजर्व फॉरेस्ट क्रमांक 984 पर झिमकी पंचायत के उपसरपंच ने सैकड़ों एकड़ जमीन पर कब्जा कर खेती शुरू कर दी, जिससे स्थानीय ग्रामीणों में आक्रोश पनपने लगा। ग्राम पंचायत महेशपुर के सैकड़ों लोग रविवार को जंगल में एकजुट होकर अतिक्रमण हटाने का निर्णय लिया। इस विरोध प्रदर्शन में वन विभाग के अधिकारी, वन समिति के सदस्य और पदाधिकारी भी शामिल थे।
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यह हसदेव अरण्य के बाद दूसरा बड़ा मामला है। जब ग्रामीणों ने जंगल बचाने के लिए कदम उठाया है। ग्रामीणों का कहना है कि वे जंगल को बचाने के लिए किसी भी स्तर पर लड़ने के लिए तैयार हैं। वन समिति के अध्यक्ष अगस्तुस बेक ने बताया कि जंगल में बड़े पैमाने पर पेड़ों की कटाई कर जमीन को खेत में तब्दील कर दिया गया है, जहां धान सहित अन्य फसलों की खेती की जा रही है।
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ग्रामीण तुलसी, यदुमणि, भुनेश्वर, मुनेश्वर, चूड़ामणि सहित अन्य ने बताया कि वे जंगल पर कब्जा हटाने के लिए लंबे समय से प्रयासरत हैं। उन्होंने वन विभाग और प्रशासन को कई बार शिकायत दर्ज कराई है, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई। ग्रामीणों के अनुसार, जब वे जंगल में गए, तो वन विभाग के कर्मचारी भी उनके साथ थे। अधिकारियों ने अवैध कटाई और जमीन पर कब्जा देखकर आश्चर्य व्यक्त किया। 

मौके पर ही सभी ने बैठक कर पंचनामा बनाया और अवैध कब्जे को राजसात करने का निर्णय लिया। पत्थलगांव रेंजर कृपासिंधु पैंकरा ने बताया कि शिकायत मिलते ही जांच टीम गठित कर नाप शुरू कर दी गई है। हालांकि, हाथियों के वन क्षेत्र में आने के कारण जांच पूरी नहीं हो सकी है। जांच पूरी होने के बाद वन क्षेत्र घोषित करने की कार्रवाई की जाएगी।


ग्रामीणों के इस साहसिक कदम से यह स्पष्ट हो गया है कि जंगलों की रक्षा के लिए लोग एकजुट होकर किसी भी तरह की चुनौती का सामना करने के लिए तैयार हैं। हालांकि, इस मुद्दे पर वन विभाग और प्रशासन की निष्क्रियता चिंता का विषय बनी हुई है।
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