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राज्योत्सव समापन: उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ बोले- छत्तीसगढ़ देश के लिए एक मिसाल,यहां विकास के नए कीर्तिमान बन रहे
Thu, 07 Nov 2024 10:34 AM IST
अमन कोशले
अमर उजाला नेटवर्क, रायपुर
अमर उजाला नेटवर्क, रायपुर
Published by: अमन कोशले
Updated Thu, 07 Nov 2024 10:34 AM IST
सार
छत्तीसगढ़ राज्य स्थापना दिवस के अवसर पर आयोजित तीन दिवसीय राज्योत्सव के समापन और राज्य अलंकरण समारोह के अवसर पर मुख्य अतिथि के रूप में उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ शामिल हुए।
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उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
छत्तीसगढ़ राज्य स्थापना दिवस के अवसर पर आयोजित तीन दिवसीय राज्योत्सव के समापन और राज्य अलंकरण समारोह के अवसर पर मुख्य अतिथि के रूप में उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ शामिल हुए। इस दौरान उन्होंने कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा कि विकसित भारत के निर्माण के लिए सबकी भागीदारी की जरूरत है। इसमें छत्तीसगढ़ का योगदान बढ़-चढ़कर होगा। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ देश के लिए एक मिसाल, यहां मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में विकास के नए कीर्तिमान बन रहे हैं। इस मौके पर उन्होंने राज्य अलंकरण से सम्मानित सभी विभूतियों को बधाई देते हुए कहा कि छत्तीसगढ़ के 36 सम्मान, जिन्हें देखकर मुझे ऊर्जा मिली है।
उपराष्ट्रपति ने आगे कहा कि जब शताब्दी ने पलटी खाई तो छत्तीसगढ़ का उदय हुआ, ये यात्रा यहां तक आ गई है। इसके लिए बहुत शुभकामनाएं देता हूं, छत्तीसगढ़िया सबले बढ़िया, पुरानी कहावत है आज भी कानों में गूंजती है। आप सभी इस कहावत को चरितार्थ कर रहे हैं। इस समारोह में आकर मेरा मन गौरव से भर गया है। छत्तीसगढ़ की पावन धरती समृद्ध सांस्कृतिक जीवन का दस्तावेज है। राष्ट्र के प्रति समर्पण और भारतीयता हमारी पहचान है। वर्ष 2000 में इस राज्य को विशिष्ट पहचान मिली। पूर्व प्रधानमंत्री भारत रत्न स्व अटल बिहारी वाजपेयी जी को इस अवसर पर याद न करें तो बड़ी चूक होगी। उनकी याद सदैव आती है। राष्ट्रहित पर वे हमेशा अटल और मानवीय भावनाएं के विषय में बहुत कोमल थे। राजनीति में उन्होंने ऐसी सर्जरी की कि किसी को पीड़ा नहीं हुई और तीन राज्य बनाए, मैं उन्हें नमन करता हूं। आपने पड़ोसी राज्य के मुख्यमंत्री को बुलाकर एक बड़ा मापदंड हासिल किया, इसके लिए मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय बधाई के पात्र हैं।
उन्होंने कहा कि नि स्वार्थ सेवा के नाम पर या आड़ पर हमारी श्रद्धा को परिवर्तन करने का प्रयास किया जा रहा है। हमारी संस्कृति हजारों साल पुरानी है उस पर प्रहार किया जा रहा है। इस पर हमें सजग होना चाहिए। यह धनबल के आधार पर हो रहा है। भोलेपन के आधार पर हो रहा है। भारत की आत्मा को जीवंत रखने के लिए ऐसी ताकतों को कुचलने की आवश्यकता है। आपसे आग्रह है कि इनसे सचेत रहिये। इन प्रयत्नों में खासतौर पर हमारे आदिवासियों भाइयों को निशाना बनाया जाता है। हमारे भारत की संस्कृति सबको समेटने वाली संस्कृति है। इस विशेषता को बरकरार रखना है।
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उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री विष्णु देव साय और पूर्व मुख्यमंत्री डा. रमन सिंह ने नक्सलवाद से लड़ने का काम किया है। सरकार की सकारात्मक नीतियों की वजह से युवाओं को अनेक अवसर मिल रहे हैं। राज्य की गति और देश की प्रगति में बड़ा जुड़ाव है। राज्य की प्रगति और देश की प्रगति एक दूसरे की पूरक है। भारत की विकास यात्रा ने दुनिया को चमत्कृत कर दिया है। दुनिया हमारी तकनीकी प्रगति को देखकर दांतों तले उंगली दबा रही है। मेरे मन में शंका नहीं है कि छत्तीसगढ़ का देश की प्रगति में बड़ा योगदान रहेगा। छत्तीसगढ़ की प्राकृतिक संपदा बेहद समृद्ध है। इस राज्य में अनेक संभावनाएं हैं। इस ओर ध्यान दिया जा रहा है। नतीजे भी अच्छे आ रहे हैं। यहां की खनिज संपदा जैसे बस्तर का लौह अयस्क, कोरबा का कोयला भारत के औद्योगिक विकास की प्राणवायु है।
उपराष्ट्रपति ने आगे कहा कि इस भूमि को धान का कटोरा कहा जाता है। यह राष्ट्र के विकास में अग्रणी भूमिका निभा रहा है। एक बात मैं जरूर ध्यान दूंगा और आपसे भी आग्रह करूंगा कि राज्य का हित राष्ट्रीय दृष्टिकोण से देखना होगा, राज्य का हित राष्ट्र के हित से अलग नहीं है। प्रदेश के निरंतर विकास के लिए मैं मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय को बधाई देना चाहता हूं।
संविधान दिवस ज्यादा समय दूर नहीं है। आज के नवयुवकों को याद दिलाना चाहूंगा। संविधान हमारी महत्वपूर्ण आधारशिला है इस पर हमारा भविष्य टिका है। संविधान दिवस हर वर्ष 26 नवंबर को मनाया जाता है। हर नागरिक को संविधान की अहमियत का एहसास होना चाहिए। इसके आदर्शों का पालन हमारी जिम्मेदारी है। संविधान से खिलवाड़ के हर प्रयास को कुंठित करना चाहिए। आपातकाल देश का काला क्षण था। 21 महीनों तक अधिकारों पर विराम लग गया। हालात इतने भयावह थे कि प्रजातांत्रिक मूल्य नजर तक नहीं आ रहे थे। लाखों लोगों को जेल की सलाखों के पीछे डाल दिया गया था। इस भयावह कालखंड की जानकारी आज की पीढ़ी को होनी चाहिए।
इस राज्य में आईआईटी है। आईआईएम है। जिस पेशे से मैं जुड़ा हूँ उससे भी जुड़ा हुआ विश्वविद्यालय है जो बहुत प्रतिष्ठित है। राज्य का युवा, महिला एवं हर वर्ग अपना योगदान दे सके, अपना उज्ज्वल भविष्य बना सके, ऐसी नीतियां छत्तीसगढ़ में तैयार हो रही है। यहां प्रशासनिक पारदर्शिता आई है। समाज के हर वर्ग को सशक्त करने का प्रयास हुआ है। राज्य ने हाल ही में एक उद्योग नीति बनाई है इससे नवयुवकों की आशाएं फलीभूत होंगी। केंद्र और राज्य ने युवाओं के लिए इतनी योजनाएं शुरू की हैं कि युवा अपने उद्यम से अन्य लोगों को भी लाभ दे सकते हैं।
विष्णुदेव साय ने कहा कि छत्तीसगढ़ के लोक कलाकरों को प्रोत्साहित करने तथा लोक संस्कृति का देश विदेश में प्रचार-प्रसार करने के उद्देश्य से बनाए गए ‘‘छत्तीसगढ़ कलाकार पंजीयन भुगतान नियम 2021’’ के संबंध में कला, संगीत, नृत्य, नाट्य एवं गायन के क्षेत्र में राज्य अलंकरण प्राप्त कलाकारों के लिए एक विशिष्ट ग्रेड ‘ए1’ निर्धारित करने की घोषणा की। समस्त ‘‘ए’’ श्रेणी के कलाकारों की अधिकतम कार्यक्रम स्वीकृति सीमा को 10 से बढ़ाकर 20 किया जाता है तथा ‘‘बी’’ श्रेणी कलाकारों की अधिकतम सीमा 12 को बढ़ाकर 24 करने की घोषणा की। साथ ही ग्रेड निर्धारण समिति की प्रत्येक बैठक में अधिकतम 3 प्रतिष्ठित कला विशेषज्ञों को अशासकीय सदस्य के रूप में सम्मिलित करने की घोषणा की।
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उपराष्ट्रपति ने आगे कहा कि जब शताब्दी ने पलटी खाई तो छत्तीसगढ़ का उदय हुआ, ये यात्रा यहां तक आ गई है। इसके लिए बहुत शुभकामनाएं देता हूं, छत्तीसगढ़िया सबले बढ़िया, पुरानी कहावत है आज भी कानों में गूंजती है। आप सभी इस कहावत को चरितार्थ कर रहे हैं। इस समारोह में आकर मेरा मन गौरव से भर गया है। छत्तीसगढ़ की पावन धरती समृद्ध सांस्कृतिक जीवन का दस्तावेज है। राष्ट्र के प्रति समर्पण और भारतीयता हमारी पहचान है। वर्ष 2000 में इस राज्य को विशिष्ट पहचान मिली। पूर्व प्रधानमंत्री भारत रत्न स्व अटल बिहारी वाजपेयी जी को इस अवसर पर याद न करें तो बड़ी चूक होगी। उनकी याद सदैव आती है। राष्ट्रहित पर वे हमेशा अटल और मानवीय भावनाएं के विषय में बहुत कोमल थे। राजनीति में उन्होंने ऐसी सर्जरी की कि किसी को पीड़ा नहीं हुई और तीन राज्य बनाए, मैं उन्हें नमन करता हूं। आपने पड़ोसी राज्य के मुख्यमंत्री को बुलाकर एक बड़ा मापदंड हासिल किया, इसके लिए मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय बधाई के पात्र हैं।
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उन्होंने कहा कि नि स्वार्थ सेवा के नाम पर या आड़ पर हमारी श्रद्धा को परिवर्तन करने का प्रयास किया जा रहा है। हमारी संस्कृति हजारों साल पुरानी है उस पर प्रहार किया जा रहा है। इस पर हमें सजग होना चाहिए। यह धनबल के आधार पर हो रहा है। भोलेपन के आधार पर हो रहा है। भारत की आत्मा को जीवंत रखने के लिए ऐसी ताकतों को कुचलने की आवश्यकता है। आपसे आग्रह है कि इनसे सचेत रहिये। इन प्रयत्नों में खासतौर पर हमारे आदिवासियों भाइयों को निशाना बनाया जाता है। हमारे भारत की संस्कृति सबको समेटने वाली संस्कृति है। इस विशेषता को बरकरार रखना है।
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उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री विष्णु देव साय और पूर्व मुख्यमंत्री डा. रमन सिंह ने नक्सलवाद से लड़ने का काम किया है। सरकार की सकारात्मक नीतियों की वजह से युवाओं को अनेक अवसर मिल रहे हैं। राज्य की गति और देश की प्रगति में बड़ा जुड़ाव है। राज्य की प्रगति और देश की प्रगति एक दूसरे की पूरक है। भारत की विकास यात्रा ने दुनिया को चमत्कृत कर दिया है। दुनिया हमारी तकनीकी प्रगति को देखकर दांतों तले उंगली दबा रही है। मेरे मन में शंका नहीं है कि छत्तीसगढ़ का देश की प्रगति में बड़ा योगदान रहेगा। छत्तीसगढ़ की प्राकृतिक संपदा बेहद समृद्ध है। इस राज्य में अनेक संभावनाएं हैं। इस ओर ध्यान दिया जा रहा है। नतीजे भी अच्छे आ रहे हैं। यहां की खनिज संपदा जैसे बस्तर का लौह अयस्क, कोरबा का कोयला भारत के औद्योगिक विकास की प्राणवायु है।
उपराष्ट्रपति ने आगे कहा कि इस भूमि को धान का कटोरा कहा जाता है। यह राष्ट्र के विकास में अग्रणी भूमिका निभा रहा है। एक बात मैं जरूर ध्यान दूंगा और आपसे भी आग्रह करूंगा कि राज्य का हित राष्ट्रीय दृष्टिकोण से देखना होगा, राज्य का हित राष्ट्र के हित से अलग नहीं है। प्रदेश के निरंतर विकास के लिए मैं मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय को बधाई देना चाहता हूं।
संविधान दिवस ज्यादा समय दूर नहीं है। आज के नवयुवकों को याद दिलाना चाहूंगा। संविधान हमारी महत्वपूर्ण आधारशिला है इस पर हमारा भविष्य टिका है। संविधान दिवस हर वर्ष 26 नवंबर को मनाया जाता है। हर नागरिक को संविधान की अहमियत का एहसास होना चाहिए। इसके आदर्शों का पालन हमारी जिम्मेदारी है। संविधान से खिलवाड़ के हर प्रयास को कुंठित करना चाहिए। आपातकाल देश का काला क्षण था। 21 महीनों तक अधिकारों पर विराम लग गया। हालात इतने भयावह थे कि प्रजातांत्रिक मूल्य नजर तक नहीं आ रहे थे। लाखों लोगों को जेल की सलाखों के पीछे डाल दिया गया था। इस भयावह कालखंड की जानकारी आज की पीढ़ी को होनी चाहिए।
इस राज्य में आईआईटी है। आईआईएम है। जिस पेशे से मैं जुड़ा हूँ उससे भी जुड़ा हुआ विश्वविद्यालय है जो बहुत प्रतिष्ठित है। राज्य का युवा, महिला एवं हर वर्ग अपना योगदान दे सके, अपना उज्ज्वल भविष्य बना सके, ऐसी नीतियां छत्तीसगढ़ में तैयार हो रही है। यहां प्रशासनिक पारदर्शिता आई है। समाज के हर वर्ग को सशक्त करने का प्रयास हुआ है। राज्य ने हाल ही में एक उद्योग नीति बनाई है इससे नवयुवकों की आशाएं फलीभूत होंगी। केंद्र और राज्य ने युवाओं के लिए इतनी योजनाएं शुरू की हैं कि युवा अपने उद्यम से अन्य लोगों को भी लाभ दे सकते हैं।
विष्णुदेव साय ने कहा कि छत्तीसगढ़ के लोक कलाकरों को प्रोत्साहित करने तथा लोक संस्कृति का देश विदेश में प्रचार-प्रसार करने के उद्देश्य से बनाए गए ‘‘छत्तीसगढ़ कलाकार पंजीयन भुगतान नियम 2021’’ के संबंध में कला, संगीत, नृत्य, नाट्य एवं गायन के क्षेत्र में राज्य अलंकरण प्राप्त कलाकारों के लिए एक विशिष्ट ग्रेड ‘ए1’ निर्धारित करने की घोषणा की। समस्त ‘‘ए’’ श्रेणी के कलाकारों की अधिकतम कार्यक्रम स्वीकृति सीमा को 10 से बढ़ाकर 20 किया जाता है तथा ‘‘बी’’ श्रेणी कलाकारों की अधिकतम सीमा 12 को बढ़ाकर 24 करने की घोषणा की। साथ ही ग्रेड निर्धारण समिति की प्रत्येक बैठक में अधिकतम 3 प्रतिष्ठित कला विशेषज्ञों को अशासकीय सदस्य के रूप में सम्मिलित करने की घोषणा की।