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Chhattisgarh News: चार दिन की जशपुर जम्बूरी में दिखी जनजातीय धरोहर और एडवेंचर की झलक
Sat, 08 Nov 2025 06:33 PM IST
अमन कोशले
अमर उजाला नेटवर्क, रायपुर
अमर उजाला नेटवर्क, रायपुर
Published by: अमन कोशले
Updated Sat, 08 Nov 2025 06:33 PM IST
सार
‘जशपुर जम्बूरी 2025’ के नाम से आयोजित यह चार दिवसीय आयोजन 6 से 9 नवंबर तक चल रहा है, जिसमें देशभर से आए 120 से अधिक प्रतिभागी प्रकृति और साहसिक खेलों का आनंद ले रहे हैं।
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जशपुर जम्बूरी 2025: प्रकृति, संस्कृति और साहसिक रोमांच का अनोखा संगम
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
हरे-भरे जंगलों और प्राकृतिक सुंदरता से घिरे जशपुर जिले में इस समय पर्यटन, संस्कृति और रोमांच का रंगारंग संगम देखने को मिल रहा है। ‘जशपुर जम्बूरी 2025’ के नाम से आयोजित यह चार दिवसीय आयोजन 6 से 9 नवंबर तक चल रहा है, जिसमें देशभर से आए 120 से अधिक प्रतिभागी प्रकृति और साहसिक खेलों का आनंद ले रहे हैं।
कार्यक्रम की शुरुआत नीमगांव में पक्षी दर्शन (बर्ड वॉचिंग) से हुई, जहां प्रतिभागियों ने शांत वातावरण में जशपुर की जैव विविधता का नज़दीक से अनुभव किया। इसके बाद दो समूहों में बंटे पर्यटकों ने मयाली में कयाकिंग, एटीवी राइड, एक्वा साइकिलिंग और पेंटबॉल जैसे एडवेंचर स्पोर्ट्स का लुत्फ उठाया, जबकि दूसरे समूह ने देशदेखा क्षेत्र में रॉक क्लाइम्बिंग, जुमारिंग और ज़िपलाइनिंग जैसी गतिविधियों में हिस्सा लिया।
प्राकृतिक सुंदरता के बीच बसे मधेश्वर पहाड़ की पृष्ठभूमि में स्थानीय व्यंजन और लोक संस्कृति ने भी सबका मन मोह लिया। शाम को सरना एथनिक रिजॉर्ट में आयोजित पारंपरिक नृत्य और लोकगीतों ने जशपुर की जनजातीय संस्कृति को मंच पर जीवंत कर दिया। अंतिम सत्र में पर्यटक तारों भरे आसमान के नीचे कैम्पफायर के इर्द-गिर्द जुटे, जहां हंसी-मज़ाक और अनुभवों की साझेदारी ने इस यात्रा को अविस्मरणीय बना दिया।
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जशपुर जम्बूरी 2025 न केवल पर्यटन को नई दिशा दे रहा है, बल्कि स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार और आत्मनिर्भरता के अवसर भी बढ़ा रहा है। यह आयोजन साबित कर रहा है कि छत्तीसगढ़ के ग्रामीण इलाकों में प्रकृति, संस्कृति और रोमांच का संगम राज्य के पर्यटन को नई उड़ान दे रहा है।
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कार्यक्रम की शुरुआत नीमगांव में पक्षी दर्शन (बर्ड वॉचिंग) से हुई, जहां प्रतिभागियों ने शांत वातावरण में जशपुर की जैव विविधता का नज़दीक से अनुभव किया। इसके बाद दो समूहों में बंटे पर्यटकों ने मयाली में कयाकिंग, एटीवी राइड, एक्वा साइकिलिंग और पेंटबॉल जैसे एडवेंचर स्पोर्ट्स का लुत्फ उठाया, जबकि दूसरे समूह ने देशदेखा क्षेत्र में रॉक क्लाइम्बिंग, जुमारिंग और ज़िपलाइनिंग जैसी गतिविधियों में हिस्सा लिया।
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प्राकृतिक सुंदरता के बीच बसे मधेश्वर पहाड़ की पृष्ठभूमि में स्थानीय व्यंजन और लोक संस्कृति ने भी सबका मन मोह लिया। शाम को सरना एथनिक रिजॉर्ट में आयोजित पारंपरिक नृत्य और लोकगीतों ने जशपुर की जनजातीय संस्कृति को मंच पर जीवंत कर दिया। अंतिम सत्र में पर्यटक तारों भरे आसमान के नीचे कैम्पफायर के इर्द-गिर्द जुटे, जहां हंसी-मज़ाक और अनुभवों की साझेदारी ने इस यात्रा को अविस्मरणीय बना दिया।
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जशपुर जम्बूरी 2025 न केवल पर्यटन को नई दिशा दे रहा है, बल्कि स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार और आत्मनिर्भरता के अवसर भी बढ़ा रहा है। यह आयोजन साबित कर रहा है कि छत्तीसगढ़ के ग्रामीण इलाकों में प्रकृति, संस्कृति और रोमांच का संगम राज्य के पर्यटन को नई उड़ान दे रहा है।