{"_id":"6a12fa6308c4fbb6b00695fb","slug":"tribal-artisan-handicraft-fair-organised-in-sarangarh-jhara-craft-and-bell-metal-products-were-the-centre-of-2026-05-24","type":"story","status":"publish","title_hn":"CG: सारंगढ़ में जनजातीय कारीगर हैंडीक्राफ्ट मेला आयोजित, झारा शिल्प और बेलमेटल उत्पाद रहे आकर्षण का केंद्र","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
CG: सारंगढ़ में जनजातीय कारीगर हैंडीक्राफ्ट मेला आयोजित, झारा शिल्प और बेलमेटल उत्पाद रहे आकर्षण का केंद्र
Sun, 24 May 2026 06:47 PM IST
अमन कोशले
अमर उजाला नेटवर्क, रायपुर
अमर उजाला नेटवर्क, रायपुर
Published by: अमन कोशले
Updated Sun, 24 May 2026 06:47 PM IST
सार
जनजातीय संस्कृति और शिल्प को बढ़ावा देने के उद्देश्य से 'जनजातीय गरिमा उत्सव' के अंतर्गत सारंगढ़ के साहू धर्मशाला में एक भव्य हस्तनिर्मित (हैंडीक्राफ्ट) वस्तु प्रदर्शनी सह विक्रय मेले का आयोजन किया गया।
विज्ञापन
सारंगढ़ में जनजातीय कारीगर हैंडीक्राफ्ट मेला आयोजित
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
जनजातीय संस्कृति और शिल्प को बढ़ावा देने के उद्देश्य से 'जनजातीय गरिमा उत्सव' के अंतर्गत सारंगढ़ के साहू धर्मशाला में एक भव्य हस्तनिर्मित (हैंडीक्राफ्ट) वस्तु प्रदर्शनी सह विक्रय मेले का आयोजन किया गया। ट्राइबल कोऑपरेटिव मार्केटिंग डेवलपमेंट फेडरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड (ट्राइफेड) द्वारा आयोजित इस मेले में जिला सारंगढ़-बिलाईगढ़ के, विशेषकर ग्राम बैगीनडीह के जनजातीय कारीगरों ने बड़ी संख्या में हिस्सा लिया और अपने हुनर का प्रदर्शन किया।
इस मेले में ग्राम बैगीनडीह के शिल्पकारों द्वारा तैयार किए गए झारा शिल्प और बेलमेटल (घंटी धातु) उत्पाद ग्राहकों और आगंतुकों के लिए मुख्य आकर्षण रहे। प्रदर्शनी में शामिल अधिकांश महिला शिल्पकार पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग के राष्ट्रीय आजीविका मिशन (बिहान) के अंतर्गत गठित 'कात्यायनी' और 'भारत माता' जैसे स्व-सहायता समूहों (SHGs) से जुड़ी हुई हैं। इन समूहों के माध्यम से वे अपने पारंपरिक हुनर को आजीविका का मजबूत जरिया बना रही हैं।
सारंगढ़-बिलाईगढ़ के बैगीनडीह जैसे कई शिल्प ग्रामों के कारीगर ट्राइफेड से जुड़कर अपने जीवन स्तर को बेहतर बना सकते हैं। ज्ञात हो कि ट्राइफेड अर्थात 'ट्राइबल को-ऑपरेटिव मार्केटिंग डेवलपमेंट फेडरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड' भारत सरकार के जनजातीय कार्य मंत्रालय के प्रशासनिक नियंत्रण में काम करने वाली एक राष्ट्रीय स्तर की शीर्ष संस्था है। यह संस्था जंगलों से लघु वनोपज (MFP) इकट्ठा करने वाले और हस्तशिल्प बनाने वाले आदिवासी समुदायों को उनकी मेहनत का उचित मूल्य दिलाता है। इसके साथ ही यह संस्था आदिवासी उत्पादों (जैसे प्राकृतिक शहद, हस्तशिल्प, कपड़े, जैविक उत्पाद) की ब्रांडिंग करती है और इनके लिए राष्ट्रीय व अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर बाजार तलाशती है।
विज्ञापन
वनधन माइक्रो उद्यमों को बढ़ावा
ट्राइफेड ने 50-100 राज्य स्तरीय निर्माता कंपनियों के माध्यम से वनधन माइक्रो उद्यमों को बढ़ावा देने के लिए बड़े कदम उठाए हैं। इन वनधन निर्माता कंपनियों का मुख्य उद्देश्य है। उत्पादकता में वृद्धि और लागत में कमी लाना,कुशल एकत्रीकरण और मूल्य संवर्धन (Value Addition) के लिए बड़े पैमाने पर प्रसंस्करण (Processing) करना और उत्पादों का बेहतर उपयोग और कुशल विपणन (Marketing) सुनिश्चित करना है।
ट्राइफेड का हिस्सा बनने का खुला अवसर
ट्राइफेड केवल कारीगरों के लिए ही नहीं, बल्कि एक बड़ा नेटवर्क बनाने के लिए वैश्विक स्तर पर अवसर प्रदान करता है। इससे कॉर्पोरेट जगत, आदिवासी समाज, वैज्ञानिक, विभिन्न संस्थान, प्रशिक्षक, संसाधन व्यक्ति, विषय विशेषज्ञ, सलाहकार, कार्यान्वयन एजेंसियां, उपकरण निर्माता, खरीदार (Buyers) और डिजाइनर्स सभी जुड़कर एक साथ काम कर सकते हैं।
विज्ञापन
इस मेले में ग्राम बैगीनडीह के शिल्पकारों द्वारा तैयार किए गए झारा शिल्प और बेलमेटल (घंटी धातु) उत्पाद ग्राहकों और आगंतुकों के लिए मुख्य आकर्षण रहे। प्रदर्शनी में शामिल अधिकांश महिला शिल्पकार पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग के राष्ट्रीय आजीविका मिशन (बिहान) के अंतर्गत गठित 'कात्यायनी' और 'भारत माता' जैसे स्व-सहायता समूहों (SHGs) से जुड़ी हुई हैं। इन समूहों के माध्यम से वे अपने पारंपरिक हुनर को आजीविका का मजबूत जरिया बना रही हैं।
विज्ञापन
सारंगढ़-बिलाईगढ़ के बैगीनडीह जैसे कई शिल्प ग्रामों के कारीगर ट्राइफेड से जुड़कर अपने जीवन स्तर को बेहतर बना सकते हैं। ज्ञात हो कि ट्राइफेड अर्थात 'ट्राइबल को-ऑपरेटिव मार्केटिंग डेवलपमेंट फेडरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड' भारत सरकार के जनजातीय कार्य मंत्रालय के प्रशासनिक नियंत्रण में काम करने वाली एक राष्ट्रीय स्तर की शीर्ष संस्था है। यह संस्था जंगलों से लघु वनोपज (MFP) इकट्ठा करने वाले और हस्तशिल्प बनाने वाले आदिवासी समुदायों को उनकी मेहनत का उचित मूल्य दिलाता है। इसके साथ ही यह संस्था आदिवासी उत्पादों (जैसे प्राकृतिक शहद, हस्तशिल्प, कपड़े, जैविक उत्पाद) की ब्रांडिंग करती है और इनके लिए राष्ट्रीय व अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर बाजार तलाशती है।
विज्ञापन
वनधन माइक्रो उद्यमों को बढ़ावा
ट्राइफेड ने 50-100 राज्य स्तरीय निर्माता कंपनियों के माध्यम से वनधन माइक्रो उद्यमों को बढ़ावा देने के लिए बड़े कदम उठाए हैं। इन वनधन निर्माता कंपनियों का मुख्य उद्देश्य है। उत्पादकता में वृद्धि और लागत में कमी लाना,कुशल एकत्रीकरण और मूल्य संवर्धन (Value Addition) के लिए बड़े पैमाने पर प्रसंस्करण (Processing) करना और उत्पादों का बेहतर उपयोग और कुशल विपणन (Marketing) सुनिश्चित करना है।
ट्राइफेड का हिस्सा बनने का खुला अवसर
ट्राइफेड केवल कारीगरों के लिए ही नहीं, बल्कि एक बड़ा नेटवर्क बनाने के लिए वैश्विक स्तर पर अवसर प्रदान करता है। इससे कॉर्पोरेट जगत, आदिवासी समाज, वैज्ञानिक, विभिन्न संस्थान, प्रशिक्षक, संसाधन व्यक्ति, विषय विशेषज्ञ, सलाहकार, कार्यान्वयन एजेंसियां, उपकरण निर्माता, खरीदार (Buyers) और डिजाइनर्स सभी जुड़कर एक साथ काम कर सकते हैं।