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'मुख्यधारा की राह पर माओवादी': कोंडागांव में एक लाख की इनामी महिला समेत तीन नक्सलियों ने किया आत्मसमर्पण

Thu, 30 Oct 2025 05:37 PM IST
अमन कोशले अमर उजाला नेटवर्क, कोंडागांव
अमर उजाला नेटवर्क, कोंडागांव Published by: अमन कोशले Updated Thu, 30 Oct 2025 05:37 PM IST
सार

कभी बंदूक थामे जंगलों में हिंसा का रास्ता चुनने वाले तीन माओवादी अब शांति और विकास की राह पर लौट आए हैं। छत्तीसगढ़ के कोंडागांव जिले के कापावाड़ा इलाके में एक महिला सहित तीन नक्सलियों ने पुलिस अधीक्षक पंकज चंद्रा के सामने आत्मसमर्पण कर दिया।

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Three Naxalites, including a woman carrying a reward of Rs 1 lakh, surrender in Kondagaon
कोंडागांव में एक लाख की इनामी महिला समेत तीन नक्सलियों ने किया आत्मसमर्पण - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

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कभी बंदूक थामे जंगलों में हिंसा का रास्ता चुनने वाले तीन माओवादी अब शांति और विकास की राह पर लौट आए हैं। छत्तीसगढ़ के कोंडागांव जिले के कापावाड़ा इलाके में एक महिला सहित तीन नक्सलियों ने पुलिस अधीक्षक पंकज चंद्रा के सामने आत्मसमर्पण कर दिया। इनमें से एक महिला नक्सली पर एक लाख रुपये का इनाम घोषित था।

यह वही सिरबत्ती उर्फ बत्ती कोर्राम है, जो पूर्वी बस्तर डिवीजन की सप्लाई टीम की सक्रिय सदस्य थी। सिरबत्ती पर पुलिस पार्टी पर फायरिंग, हत्या और लूटपाट जैसे गंभीर अपराध दर्ज हैं। उसके साथ दो और माओवादी जगतराम और लच्छन भी थे, जो मातला और किसकोड़ो क्षेत्र में डीएकेएमएस संगठन से जुड़े थे। दोनों पर भी पुलिस मुखबिरी के शक में हत्या और मतदान सामग्री लूटने के आरोप हैं।

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पुलिस के मुताबिक, संगठन के भीतर लगातार बढ़ते अंदरूनी मतभेद, शीर्ष माओवादियों के आत्मसमर्पण और शासन की “आत्मसमर्पण एवं पुनर्वास नीति 2025” के प्रभावी प्रचार ने इन तीनों को सोचने पर मजबूर किया। जंगलों में दिनों-दिन सिमटते संगठन, घटती जनसहभागिता और सरकारी योजनाओं के असर ने उन्हें यह एहसास दिलाया कि अब हथियारों से नहीं, बल्कि समाज से जुड़कर ही जीवन सुरक्षित और सम्मानजनक बन सकता है।

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सिरबत्ती और उसके साथियों ने बताया कि गांव-गांव तक पहुंची बिजली, सड़क, मोबाइल नेटवर्क और जनकल्याण योजनाओं ने लोगों का नजरिया बदल दिया है। अब गांवों में पहले जैसी दहशत नहीं, बल्कि विकास की बातें होती हैं। इसी विश्वास के चलते तीनों ने जंगल छोड़ने और सरकार की मुख्यधारा में लौटने का फैसला किया। आत्मसमर्पण के दौरान सीआरपीएफ 188वीं और 12वीं बटालियन के अधिकारी, अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक (ऑप्स) रूपेश डांडे और डीएसपी सतीश भार्गव मौजूद रहे। तीनों आत्मसमर्पित माओवादियों को शासन की नीति के तहत ₹50-50 हजार रुपये की प्रोत्साहन राशि तत्काल प्रदान की गई, साथ ही पुनर्वास के लिए आवश्यक प्रक्रियाएं शुरू कर दी गई हैं।

बस्तर रेंज आईजी सुंदरराज पी., डीआईजी अमित तुकाराम कांबले और एसपी पंकज चंद्रा के नेतृत्व में चलाए जा रहे निरंतर नक्सल विरोधी अभियानों और ग्रामीणों से बढ़ते संवाद के चलते अब लगातार माओवादी आत्मसमर्पण कर रहे हैं, जिससे क्षेत्र में शांति और विकास की दिशा मजबूत हो रही है।

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