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शहीद के गांव में पानी का संकट: नल से निकलती है सिर्फ हवा, प्यास बुझाने को तरस रहे लोग, कागजों में चल रही योजना

Fri, 16 May 2025 03:48 PM IST
Digvijay Singh अमर उजाला नेटवर्क, जशपुर
अमर उजाला नेटवर्क, जशपुर Published by: Digvijay Singh Updated Fri, 16 May 2025 03:48 PM IST
सार

इसी साल 2025 के फरवरी महीने में ग्रामीणों ने पचास-पचास रुपये चंदा कर ऑटो बुकिंग करके विधायक विष्णुदेव साय के घर बगिया तक जाकर अपनी समस्या बताई।

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There is a water crisis in the martyr village in Jashpur only air comes out of the tap
पानी के लिए बेहाल शहीद के गांव के लोग - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

सरकार ने नल जल योजना शुरू की, लेकिन हमारे नल से पानी नहीं, हवा निकलती है…और साहब, हवा पीकर प्यास नहीं बुझती, ये शब्द हैं शहीद लेओस के गांव बरांगजोर की रतमनी बाई के, जिनके घर के सामने बना नल सालों से पानी के इंतज़ार में सूखा पड़ा है।

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शहीद का गांव, पानी के लिए बेहाल
दरअसल जशपुर जिले के कुनकुरी विधानसभा का यह बरांगजोर गांव, जो शहीद लेओस का गांव है, यहां शहीद स्मारक के ठीक सामने जल जीवन मिशन के तहत एक बड़ा वाटर टैंक बना है। लेकिन ये टंकी केवल देखने भर के लिए है  क्योंकि इससे पानी नहीं, सिर्फ सरकारी वादे निकलते हैं। गांव के सुकबासुपारा टोला में 45 घर हैं, जिनमें से केवल सात घरों तक ही कभी-कभी पानी पहुंचता है, बाकी के 320 लोग अब भी पानी की एक-एक बूंद के लिए संघर्ष कर रहे हैं। आगे मांझीटोली में 60 घरों की भी रोज की यही परेशानी है।

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पानी के लिए की जेब ढीली, फिर भी सूखा नल
ग्रामीणों ने बताया कि उन्हें नल जल योजना का पानी घर तक लाने के लिए अपनी जेब से खर्च करना पड़ा। रतमनी बाई ने 1600 रुपये, सिद्धेश्वर नायक ने 1200 रुपये और राजकुमार ने भी 1200 रुपये खर्च करके मिस्त्री से पाइप डलवाया। बावजूद इसके, कभी पानी आता है, कभी नहीं। जिनके पास पैसे नहीं हैं, वे आज भी दूर-दराज के जलस्रोतों से पानी ढोने को मजबूर हैं। बुजुर्ग महिलाएं अकेले इस संघर्ष में सबसे ज्यादा पीड़ित हैं।
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अमृत मिशन के स्टैंड पोस्ट —सिर्फ नाम के लिए
बरांगजोर की मुख्य बस्ती, मांझीटोला में बने अमृत मिशन के स्टैंड पोस्ट भी वीरान हैं। आंगनबाड़ी केंद्र के पास बना बड़ा वाटर टैंक कभी पानी नहीं दे पाया। शहीद की वीरवधू कहती हैं, “अगर सरकार सच में चाहती है कि पानी घर तक पहुंचे, तो फिर पहुंच क्यों नहीं रहा? पैसा तो खर्च हो गया, लेकिन फायदा शून्य है।”

चंदा कर विधायक के घर तक पहुंचे ग्रामीण
इसी साल 2025 के फरवरी महीने में ग्रामीणों ने पचास-पचास रुपये चंदा कर ऑटो बुकिंग करके विधायक विष्णुदेव साय के घर बगिया तक जाकर अपनी समस्या बताई। वहां मौजूद एक कर्मचारी ने अधिकारियों को जानकारी देने की बात कही और दो दिन बाद पीएचई के अधिकारी गांव भी पहुंचे। आश्वासन मिला कि "दो-चार दिन में पानी चालू हो जाएगा" लेकिन आज तक नलों में पानी नहीं आया। बता दें कि ग्रामीण जिन्हें विधायक कह रहे हैं,वे छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय हैं।

मरम्मत हुई, लेकिन नतीजा वही ‘सूखा नल’
सरपंच रोशन आरा खेस बताती हैं कि उन्होंने पीएचई विभाग के एसडीओ विनोद मिश्रा को बोरिंग खराब होने की बात बताई थी, मरम्मत भी हुई, लेकिन जल जीवन मिशन योजना का पानी  आज तक गरीबों के घरों तक नहीं पहुंचा।बिना जल के नल से लोग त्रस्त हैं।


अधिकारियों ने दिया आश्वासन 
एसडीओ पीएचई कुनकुरी, विनोद मिश्रा का कहना है कि वे जल्द गांव का दौरा करेंगे और जहां पानी उपलब्ध है, वहां से कनेक्शन जोड़कर एक सप्ताह में पानी चालू कर दिया जाएगा। सरपंच ने भी सहयोग का आश्वासन दिया है। सरकारी योजनाएं गांव तक कागजों में पहुंच जाती हैं, पर जमीन पर उनकी बूंद तक नहीं गिरती। जिन हाथों में शहीद के खून की विरासत है, वो हाथ आज पानी के लिए तरस रहे हैं।

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