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हाईकोर्ट ने एक परिवार पर दर्ज 8 फर्जी मामले किए निरस्त: कहा- इन्हें चलाना न्यायिक प्रक्रिया का दुरुपयोग होगा

Thu, 27 Aug 2026 05:24 PM IST
अमन कोशले अमर उजाला नेटवर्क, रायपुर
अमर उजाला नेटवर्क, रायपुर Published by: अमन कोशले Updated Thu, 27 Aug 2026 05:24 PM IST
सार

बिलासपुर हाईकोर्ट की खंडपीठ ने एक ही परिवार के सदस्यों के खिलाफ छत्तीसगढ़ के भिलाई और कुम्हारी समेत आठ अलग-अलग पुलिस थानों में दर्ज सभी आपराधिक मामलों की कार्रवाई निरस्त कर दी है।

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The High Court dismissed 8 false cases filed against a family, saying pursuing them would be an abuse of the j
सांकेतिक तस्वीर - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

बिलासपुर हाईकोर्ट की खंडपीठ ने एक ही परिवार के सदस्यों के खिलाफ छत्तीसगढ़ के भिलाई और कुम्हारी समेत आठ अलग-अलग पुलिस थानों में दर्ज सभी आपराधिक मामलों की कार्रवाई निरस्त कर दी है। अदालत ने पुलिस कार्रवाई के दुरुपयोग से जुड़े इस मामले में बड़ा फैसला सुनाते हुए कहा कि इन परिस्थितियों में आपराधिक कार्रवाई जारी रखना न्यायिक प्रक्रिया का दुरुपयोग होगा। अदालत ने याचिकाकर्ताओं को अन्य राहत पाने के लिए उचित मंच के समक्ष जाने की स्वतंत्रता प्रदान की है।
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मामला वर्ष 2019 से 2021 के बीच एक ही परिवार के सदस्यों के खिलाफ दर्ज किए आठ आपराधिक मामलों से जुड़ा है। इन मामलों में एक ही परिवार के लोगों को आरोपी बनाया गया था। इसके अलावा, बाद के मामलों के शिकायतकर्ता भी पहले के शिकायतकर्ताओं से जुड़े हुए पाए गए थे। पुलिस ने याचिकाकर्ताओं को जेल से गिरफ्तार दिखाया था। मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस ने विशेष जांच दल (एसआईटी) का गठन किया था। एसआईटी ने गहन जांच के बाद इन आठों अपराधों को पूरी तरह फर्जी करार दिया था।
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एसआईटी ने जांच रिपोर्ट में सभी मामलों को फर्जी बताने के सासाथ जांच अधिकारी की गंभीर लापरवाही को भी दर्ज किया था। इस आधार पर जांच अधिकारी के खिलाफ विभागीय कार्रवाई के आदेश जारी हुए। याचिकाकर्ता पक्ष ने अदालत में बताया कि परिवार की एक महिला का संपर्क पीयूष तिवारी नाम के व्यक्ति से हुआ था। उस व्यक्ति ने खुद को अविवाहित पुलिस अधिकारी बताकर विवाह का भरोसा दिया था। बाद में, जब महिला को उसके पहले से शादीशुदा होने की जानकारी मिली, तो उसने संबंध समाप्त कर लिए। इसके बाद, महिला ने 5 अप्रैल, 2018 को बिलासपुर स्थित आर्य संस्कार केंद्र में विवाह कर लिया।
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पीड़ित परिवार का आरोप था कि विवाह के बाद भी पीयूष तिवारी संबंध बनाए रखने का लगातार दबाव बना रहा था और उसने निजी तस्वीरें सार्वजनिक करने की धमकी दी। जब परिवार ने उसकी बात नहीं मानी तो महिला, उसके पति और परिवार के अन्य सदस्यों के खिलाफ अलग-अलग थानों तथा जिलों में एक-एक करके आपराधिक मामले दर्ज कराए जाने लगे। पुलिस की एसआईटी जांच में यह बात सामने आई कि सभी शिकायतें एक-दूसरे से जुड़ी हुई थीं और दुर्भावना से दर्ज कराई गई थीं। बिलासपुर हाई कोर्ट ने एसआईटी की रिपोर्ट और मामलों के समस्त तथ्यों पर विचार करने के बाद याचिकाकर्ताओं को राहत देते हुए सभी आठ मामलों की कानूनी कार्रवाई को पूरी तरह निरस्त कर दिया है।
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