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छत्तीसगढ़: आदिवासी जमीनों के बेनामी हस्तांतरण पर सख्ती, पहले कलेक्टर जांच करेंगे, फिर होगी रजिस्ट्री

Fri, 11 Sep 2026 07:35 PM IST
अमन कोशले अमर उजाला नेटवर्क, रायपुर
अमर उजाला नेटवर्क, रायपुर Published by: अमन कोशले Updated Fri, 11 Sep 2026 07:35 PM IST
सार

सरकार ने गैर-आदिवासियों के अप्रत्यक्ष नियंत्रण में जा रही आदिवासी भूमि को बचाने के लिए कड़ा रुख अपनाया है। शासन ने जिला कलेक्टरों को निर्देश दिए हैं कि वे आदिवासी जमीनों के बेनामी और अप्रत्यक्ष हस्तांतरण से जुड़े दस्तावेज की सूक्ष्मता से जांच करें।

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Strict action against benami transfer of tribal lands; first collector will investigate, then registry will be
सांकेतिक तस्वीर - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

छत्तीसगढ़ सरकार ने गैर-आदिवासियों के अप्रत्यक्ष नियंत्रण में जा रही आदिवासी भूमि को बचाने के लिए कड़ा रुख अपनाया है। शासन ने जिला कलेक्टरों को निर्देश दिए हैं कि वे आदिवासी जमीनों के बेनामी और अप्रत्यक्ष हस्तांतरण से जुड़े दस्तावेज की सूक्ष्मता से जांच करें। अब किसी गैर-आदिवासी द्वारा आदिवासी जमीन को अपने नौकर, रिश्तेदार, परिचित या किसी अन्य व्यक्ति के नाम पर दर्ज कराने के मामलों की गहन पड़ताल होगी। जांच के दौरान यदि किसी जमीन पर वास्तविक कब्जा, उपयोग या आर्थिक लाभ गैर-आदिवासी का मिलता है, तो शासन कठोर कार्रवाई करेगा।
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छत्तीसगढ़ राज्य अनुसूचित जनजाति आयोग ने आदिवासी जमीनों के संरक्षण को लेकर राज्य शासन को सुझाव पत्र भेजा था। आयोग ने स्पष्ट किया था कि कानूनी प्रावधानों के अस्तित्व के बाद भी विभिन्न क्षेत्रों से आदिवासियों की भूमि के प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष हस्तांतरण की शिकायतें निरंतर मिल रही हैं। कई मामलों में गैर-आदिवासी लोग स्वयं कानून से बचने के लिए अपने अधीनस्थ कर्मचारियों, परिचितों या संबंधियों के नाम पर जमीन का पंजीयन करा लेते हैं, जबकि जमीन का वास्तविक संचालन, उपभोग और उससे होने वाला वित्तीय लाभ स्वयं उठाते हैं। इसे रोकने के लिए महानिरीक्षक पंजीयन ने सभी कलेक्टरों को पत्र जारी करके जिला प्रशासन को ऐसे मामलों की निष्पक्ष जांच कराने के निर्देश दिए हैं।
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संदिग्ध मामलों में हस्तांतरण पर स्थगन
निर्देशों के अनुसार, यदि किसी नामांतरण अथवा पंजीयन में कानूनी नियमों के उल्लंघन का संदेह उत्पन्न होता है, तो जांच प्रक्रिया पूरी होने तक संबंधित भूखंड के भावी हस्तांतरण पर तत्काल प्रभाव से रोक लगाई जाएगी। इस व्यवस्था से जांच लंबित रहने के दौरान जमीन का स्वरूप बदलने या उसे किसी अन्य व्यक्ति को बेचने के प्रयासों पर विराम लगेगा। साथ ही, पुराने मामलों की समीक्षा के दौरान यदि कोई हस्तांतरण नियम विरुद्ध पाया जाता है, तो उस जमीन को पुनः मूल आदिवासी खातेदार के नाम पर बहाल करने की विधिक प्रक्रिया पूरी की जाएगी। इससे आदिवासी भू-स्वामियों के अधिकारों की पुनर्स्थापना संभव हो सकेगी।
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पंजीयन अधिकारियों की जिम्मेदारी तय
शासन ने रजिस्ट्री की प्रक्रिया से जुड़े अधिकारियों की जवाबदेही भी निर्धारित की है। पंजीयन अधिकारियों को निर्देश मिले हैं कि वे रजिस्ट्रीकरण अधिनियम की धारा 34 व 35 और रजिस्ट्रीकरण नियमों के नियम 19 व 35 के तहत प्रस्तुत दस्तावेज का अनिवार्य रूप से परीक्षण करें। अधिकारियों को दस्तावेज के साथ संलग्न कागजातों की बारीकी से जांच करने, अचल संपत्ति की सही पहचान सुनिश्चित करने तथा क्रेता, विक्रेता और गवाहों का विधिवत सत्यापन करने को कहा है।
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