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स्मृति शेष: डीएम से सीएम और कभी हार न मानने वाले अजीत जोगी की इंदिरा से मुलाकात और वो किस्सा...

Sat, 30 May 2020 05:17 AM IST
श्रीधर मिश्रा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, छत्तीसगढ़
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, छत्तीसगढ़ Published by: श्रीधर मिश्रा Updated Sat, 30 May 2020 05:17 AM IST
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Story of former Chhattisgarh Chief Minister Ajit Jogi meeting Indira Gandhi and being close to Rajiv Gandhi
अजीत जोगी (फाइल फोटो) - फोटो : PTI

छत्तीसगढ़ के पहले सीएम रहे अजीत जोगी की पहचान ऐसे नेता के रूप में रही, जिन्होंने कभी हार नहीं मानी। आईएएस की नौकरी छोड़ राजनीति में आए जोगी जिलाधिकारी (डीएम) पद से सीएम की कुर्सी तक पहुंचने वाले संभवत: पहले शख्स थे। छत्तीसगढ़ में बिलासपुर के गांव में शिक्षक माता-पिता के घर जन्मे जोगी मित्रों के बीच इस उपलब्धि का अक्सर जिक्र भी करते थे।

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जोगी ने 1964 में उज्जैन विश्वविद्यालय से गोल्ड मैडल के साथ इंजीनियरिंग की। इसके बाद आईपीएस और फिर आईएएस बने। रायपुर और इंदौर सहित विभिन्न जिलों में रिकॉर्ड 12 साल कलेक्टर रहे जोगी 1986 में आईएएस की नौकरी से इस्तीफा देकर कांग्रेस में शामिल हुए। पार्टी ने उन्हें 1986-92 और 1992-98 तक राज्यसभा भेजा। नवंबर 2000 में छत्तीसगढ़ बना तो जोगी पहले मुख्यमंत्री बने।
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इंदिरा से मुलाकात और वो किस्सा

जोगी अपने करीबी लोगों को अक्सर एक किस्सा सुनाते थे। प्रशिक्षु आईएएस के तौर पर जब उनका बैच तत्कालीन पीएम इंदिरा गांधी से मिला तो एक सवाल के जवाब में इंदिरा ने कहा, भारत में वास्तविक सत्ता तीन ही लोगों के हाथ में है- डीएम, सीएम और पीएम। सीएम बनने के बाद एक बार जोगी ने कहा था, यहां सीएम और पीएम तो कुछ लोग (एचडी देवेगौड़ा, पीवी नरसिंहराव, वीपी सिंह, मोरारजी देसाई) बन चुके हैं, पर डीएम और सीएम बनने का सौभाग्य केवल मुझे मिला है।
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राजीव के कहने पर राजनीति में आए

जोगी जब रायपुर कलेक्टर थे उस दौरान उनका संपर्क इंडियन एयरलाइंस के पायलट राजीव गांधी से हुआ। इंदिरा की हत्या के बाद राजीव पीएम बने तो जोगी इंदौर कलेक्टर थे। जून 1986 में उनका पदोन्नति आदेश जारी हुआ। इसी दौरान प्रधानमंत्री कार्यालय से फोन कर उन्हें नौकरी से इस्तीफा देने और राज्यसभा के लिए नामांकन करने को कहा गया। तब पत्नी रेणु जोगी और कांग्रेस नेता दिग्विजय सिंह की सलाह पर वह राजनीति में जाने को तैयार हुए।

दिग्गज कांग्रेसी नेताओं को पीछे छोड़ा

जोगी तीन बार मध्य प्रदेश के सीएम रहे श्यामाचरण शुक्ल, उनके भाई विद्याचरण शुक्ल और पूर्व सीएम मोतीलाल वोरा जैसे दिग्गज नेताओं को पीछे छोड़कर छत्तीसगढ़ के सीएम बने थे। जोगी कहते थे कि जो स्थानीय बोली में बात नहीं कर सकता वह सीएम कैसे बन सकता है? कांग्रेस में आगे बढ़ने में जोगी को आदिवासी पृष्ठभूमि और गांधी परिवार से नजदीकी का फायदा मिला। लंबे समय तक वह गांधी परिवार के विश्वस्त नेताओं में रहे।

हार और विवादों से गर्दिश में गए सितारे

2003 में छत्तीसगढ़ का पहला विधानसभा चुनाव हुआ तो जोगी के नेतृत्व में कांग्रेस की हार हुई। इस दौरान एक स्टिंग आपरेशन से पता चला कि वह और उनके बेटे अमित ने भाजपा सरकार गिराने के लिए कथित तौर पर विधायकों को पैसे की पेशकश की। इसके बाद जोगी और कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी के बीच दूरी बनने लगी। 2004 के लोकसभा चुनाव महासमुंद से भाजपा के टिकट पर लड़े विद्याचरण शुक्ल को जोगी ने मात दी। इसी चुनाव प्रचार के दौरान हुए सड़क हादसे के बाद जोगी व्हील चेयर पर आ गए।

बसपा के साथ लड़ा आखिरी विधानसभा चुनाव

लगातार दो विधानसभा चुनाव में जोगी के नेतृत्व में हार के बाद पार्टी ने 2013 में भूपेश बघेल को प्रदेश अध्यक्ष बनाया। 2016 में अंतगढ़ विधानसभा सीट के उपचुनाव के दौरान जोगी के बेटे अमित पर फिक्सिंग का आरोप लगाने के बाद उन्हें पार्टी से निकाल दिया गया। इसके बाद जून 2016 में जोगी ने जनता कांग्रेस छत्तीसगढ़ (जोगी) का गठन किया। 2018 का विधानसभा चुनाव जोगी मायावती की पार्टी बसपा के साथ मिलकर लड़े लेकिन केवल सात सीट जीत सके। वहीं, कांग्रेस ने 90 में से 68 सीटें जीतकर किंग मेकर बनने का उनका सपना तोड़ दिया। हालांकि, जोगी अपनी परंपरागत महवाही सीट से चुनाव जीत गए।

श्रद्धांजलि

अजीत जोगी का एकमात्र ध्येय जनसेवा था। वह गरीबों और खासकर आदिवासियों का जीवन बेहतर बनाने के लिए सदैव प्रयत्नशील रहे। मैं उनके निधन से बेहद दुखी हूं। - नरेंद्र मोदी, पीएम


छत्तीसगढ़ के प्रथम मुख्यमंत्री अजीत जोगी का निधन प्रदेश के लिए बड़ी राजनीतिक क्षति है। वह हमारी यादों में सदैव जीवित रहेंगे। - भूपेश बघेल, सीएम छत्तीसगढ़

अजीत जोगी जी का निधन प्रदेश के लिए अपूरणीय क्षति है। उनके साथ प्रदेश का एक राजनीतिक इतिहास समाप्त हो गया है। - रमन सिंह, पूर्व सीएम छत्तीसगढ़

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