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बलरामपुर रामानुजगंज: समय पर कार्यमुक्ति न मिलने से गई जान, श्रवण कुमार गोंड का निधन, कर्मचारियों में शोक
Sat, 25 Oct 2025 01:16 PM IST
Digvijay Singh
अमर उजाला नेटवर्क, बलरामपुर रामानुजगंज
अमर उजाला नेटवर्क, बलरामपुर रामानुजगंज
Published by: Digvijay Singh
Updated Sat, 25 Oct 2025 01:16 PM IST
सार
रामानुजगंज अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व) कार्यालय में लगभग 25 वर्षों से रीडर के पद पर पदस्थ श्रवण कुमार गोंड का शुक्रवार की शाम अंबिकापुर मिशन अस्पताल में निधन हो गया।
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- फोटो : istock
विस्तार
रामानुजगंज अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व) कार्यालय में लगभग 25 वर्षों से रीडर के पद पर पदस्थ श्रवण कुमार गोंड का शुक्रवार की शाम अंबिकापुर मिशन अस्पताल में निधन हो गया। वे पिछले से 6 माह से किडनी की गंभीर बीमारी से पीड़ित थे और 4 माह से नियमित रूप से 4 डायलिसिस पर थे। बेहतर इलाज की सुविधा के लिए उन्होंने अपने गृह क्षेत्र लखनपुर के समीप अंबिकापुर में स्थानांतरण की मांग की थी। शासन द्वारा उनका ट्रांसफर 30 जून 2025 को अंबिकापुर कर दिया गया था, लेकिन इसके बावजूद उन्हें रामानुजगंज से कार्यमुक्त नहीं किया गया।
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श्रवण गोंड लगातार उच्च अधिकारियों से कार्यमुक्ति के लिए गुहार लगाते रहे, किंतु विभागीय उदासीनता के कारण वे बीमारी के बावजूद रामानुजगंज में ही कार्यरत रहे। दीपावली अवकाश से ठीक पहले तक उन्होंने अपनी जिम्मेदारी निभाई और कुछ ही दिनों बाद उनकी तबीयत बिगड़ने पर उन्हें अंबिकापुर लाया गया, जहां उन्होंने अंतिम सांस ली। श्रवण गोंड अपने क्षेत्र में मिलनसार, हंसमुख और कर्मठ कर्मचारी के रूप में जाने जाते थे। बीमारी के बावजूद वे अकेले ही बलरामपुर जिला अस्पताल जाकर डायलिसिस करवाते थे। उनके निधन से पूरे राजस्व विभाग सहित कर्मचारी जगत में गहरा शोक और आक्रोश व्याप्त है।
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कर्मचारियों का कहना है कि यदि उन्हें समय पर रामानुजगंज से कार्यमुक्त कर दिया गया होता, तो वे अपने परिवार के बीच रहकर बेहतर इलाज करा पाते और शायद उनकी जान बचाई जा सकती थी। श्रवण गोड़ लोकप्रिय कर्मचारियों थे। जिन्हें श्रवण बाबू के नाम से सभी जानते थे। उनके सहकर्मियों ने बताया कि वह डायलिसिस में हमेशा जाते थे परंतु चेहरे में हमेशा मुस्कान रहती थी एवं कभी इस बात का एहसास नहीं होने दिए कि वह इतनी गंभीर बीमारी से जूझ रहे हैं हमेशा वे अपने कर्तव्यों का पालन करते रहे बिना अवकाश लिए हुए कार्य दीपावली के छुट्टी के पहले तक करते रहे।
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