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CG: शालू डहरिया के सपनों को मिली नई उड़ान, एशिया वूमेन्स सॉफ्टबॉल प्रतियोगिता के लिए भारतीय टीम में हुआ चयन
Sun, 22 Jun 2025 02:57 PM IST
श्याम जी.
अमर उजाला नेटवर्क, जांजगीर चांपा
अमर उजाला नेटवर्क, जांजगीर चांपा
Published by: श्याम जी.
Updated Sun, 22 Jun 2025 02:57 PM IST
सार
पामगढ़ की शालू डहरिया को चीन में होने वाली एशिया वूमेन्स सॉफ्टबॉल प्रतियोगिता के लिए मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने 1.70 लाख रुपये की आर्थिक सहायता दी। शालू ने भारत के लिए गोल्ड मेडल जीतने का भरोसा जताया।
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शालू डहरिया
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
पामगढ़ नगर पंचायत की शालू डहरिया का चयन एशिया वूमेन्स सॉफ्टबॉल प्रतियोगिता के लिए भारतीय टीम में हुआ है, जो 14 से 21 जुलाई तक चीन के जियान शहर में आयोजित होगी। आर्थिक तंगी के कारण निराश शालू को छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने मदद का हाथ बढ़ाया। रविवार सुबह जांजगीर कलेक्टर कार्यालय में शालू को 1.70 लाख रुपये का चेक सौंपा गया और वीडियो कॉलिंग के जरिए मुख्यमंत्री ने उन्हें शुभकामनाएं दीं।
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मध्यमवर्गीय परिवार की शालू बचपन से ही सॉफ्टबॉल की प्रतिभावान खिलाड़ी रही हैं। कक्षा आठ से पामगढ़ के मैदान में खेलते हुए उन्होंने कॉलेज के द्वितीय वर्ष तक 12 नेशनल गेम्स में हिस्सा लिया और एक गोल्ड मेडल जीता। छत्तीसगढ़ से भारतीय टीम में चुनी गईं दो महिला खिलाड़ियों में शालू एक हैं। आर्थिक तंगी के कारण उन्होंने शासन-प्रशासन और जनप्रतिनिधियों से मदद की गुहार लगाई थी।
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शनिवार रात जशपुर कलेक्टर के माध्यम से मुख्यमंत्री साय ने जांजगीर कलेक्टर से चर्चा कर शालू को रविवार सुबह कलेक्टर कार्यालय बुलाने के निर्देश दिए। सुबह नौ बजे शालू अपने परिजनों के साथ पहुंचीं, जहां पामगढ़ विधायक शेषराज हरवंश की उपस्थिति में कलेक्टर ने उन्हें 1.70 लाख रुपये का चेक सौंपा। मुख्यमंत्री से वीडियो कॉल पर बात कर शालू और उनके परिजन गदगद हो गए। शालू ने कहा, 'मुख्यमंत्री जी का धन्यवाद। अब मेरा सपना साकार होगा। मैं भारत के लिए गोल्ड मेडल जीतने की पूरी कोशिश करूंगी।'
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शालू की मां एक छोटा ब्यूटी पार्लर चलाती हैं। उन्होंने बताया कि उनके पति प्राइवेट सुरक्षा कर्मी हैं। बेटी के जुनून को देखते हुए उसे खेल में पूरी छूट दी गई, लेकिन आर्थिक तंगी ने अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिता के लिए निराश किया था। उन्होंने कहा, 'राज्य सरकार ने हमारी गुहार सुनी। अब शालू का सपना पूरा होगा।' यह मदद न केवल शालू के लिए, बल्कि छत्तीसगढ़ के उन युवाओं के लिए प्रेरणा है, जो आर्थिक चुनौतियों के बावजूद बड़े सपने देखते हैं।