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CG Election: तीन अक्टूबर को एक दिवसीय दौरे पर बस्तर पहुंचेगे पीएम मोदी, सर्व आदिवासी समाज ने शुरू किया विरोध

Sun, 01 Oct 2023 09:50 PM IST
श्याम जी. अमर उजाला नेटवर्क, जगदलपुर
अमर उजाला नेटवर्क, जगदलपुर Published by: श्याम जी. Updated Sun, 01 Oct 2023 09:50 PM IST
सार

पीएम नरेंद्र मोदी के दौरे से पहले बस्तर में  सर्व आदिवासी समाज ने विरोध शुरू कर दिया है। सर्व आदिवासी समाज ने अपनी चार सूत्रीय मांगों को लेकर दो अक्टूबर को एक विशाल रैली निकालेगा। इसके बाद आम सभा करेगा।

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sarv adivasi samaj started protest before visit of pm narendra modi in Bastar
पीएम मोदी - फोटो : SOCIAL MEDIA

विस्तार

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी तीन अक्टूबर को बस्तर आने वाले हैं। उनके आने से पहले सर्व आदिवासी समाज ने उनके दौरे का विरोध करना शुरु कर दिया है। सर्व आदिवासी समाज ने अपनी चार सूत्रीय मांगों को लेकर दो अक्टूबर को एक विशाल रैली निकालेगा। इसके बाद आम सभा करेगा। सर्व आदिवासी समाज के अध्यक्ष प्रकाश ठाकुर ने बताया की नगरनार स्टील प्लांट के नीजिकरण, एनएमडीसी का मुख्यालय बस्तर में लाने, स्थानीय भर्ती को प्राथमिकता के लागू कराये जाने व जातीय जनगणना कराये जाने की प्रमुख मांगों को लेकर सोमवार रैली व आम सभा का आयोजन किया जाना है।

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सर्व आदिवासी समाज के अध्यक्ष प्रकाश ठाकुर ने बताया कि नगरनार स्टील प्लांट के निजीकरण पर रोक लगाने के लिए केंद्र सरकार को आदिवासी समाज के साथ-साथ बस्तर के विभिन्न संगठनो के द्वारा आवेदन निवेदन किया जाता रहा है। लेकिन केंद्र सरकार बस्तरवासियों की मूल भावनाओं की अनदेखा करते हुए नव निर्माणाधीन नगरनार स्टील प्लांट को बेचने के लिए आतुर है। संपूर्ण बस्तर संभाग संविधान की पांचवी अनुसूचित क्षेत्र में आता है। ऐसे में इक्कीसवीं सदी के प्रारंभ में बस्तर के विकास का नया आयाम का नाम लेते हुए सार्वजनिक उपक्रम एनएमडीसी के इस्पात संभाग का इकाई लगाने के नाम पर प्रभावित क्षेत्र से भूमि अधिग्रहण किया गया। बाद में विभिन्न समस्याओं का हवाला देते हुए एकाएक बस्तर के मूलनिवासियों का भावनाओं के विपरीत इस्पात संयंत्र को विनिवेश के नाम पर बेचा जा रहा है। क्या ऐसी स्थिति में प्रभावित क्षेत्रो के ग्रामों से ग्रामसभा से स्वीकृति लेने का प्रावधान संविधान से संशोधित कर दिया गया है, यदि ऐसा है तो वर्तमान केंद्र सरकार ने पवित्र संविधान की हत्या की है और ऐसा नहीं है? तो सावैधानिक प्रावधानों की हत्या स्पष्ट दिख रही है।
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अध्यक्ष प्रकाश ठाकुर ने कहा कि 1947 देश की आजादी के बाद बस्तर जैसे प्राकृतिक संसाधनो से परिपूर्ण क्षेत्र में प्रथम प्रधानमंत्री पं. जवाहर लाल नेहरू के विशेष पहल से बस्तर के दन्तेवाड़ा जिला में बैलाडीला के पहाड़ियों पर केन्द्र सरकार का उपक्रम एनएमडीसी का विश्व प्रसिद्ध लौह खदान खोला गया। खदान के प्रारम्भिक और बस्तर कि वर्तमान मध्यप्रदेश के नजदीक के शहर रायपुर में कंपनी का मुख्यालय के आवश्यक सुविधाओं और मापदंड का हवाला देते हुए दूर हैदराबाद में एनएमडीसी का मुख्यालय खोला गया जो आज वर्तमान तक संचालित है। 2001 में मध्यप्रदेश से विद्यटित हो कर छत्तीसगढ़ राज्य बनने के बाद इन 23 वर्षों में लगातार राज्य के राजधानी एवं बस्तर संभाग की राजधानी जगदलपुर में विभिन्न नये आयाम और सुविधाओं की कमी नहीं रह गयी है। इसके बावजूद भी लगातार समाजिक राजनीतिक रूप से एनएमडीसी का मुख्यालय बस्तर लाने का मांग समय-समय पर होता रही है। इसे भी केंद्र सरकार आज दिनांक तक दरकिनार करते आ रही है। पाँचवी अनुसूचित क्षेत्रों में स्थानीय भर्ती नही होने से बस्तर जैसे पिछड़ा क्षेत्र के युवाओं को रोजगार का अवसर नहीं मिल रहा है।
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हाल ही में छत्तीसगढ़ शासन के व्यापम के माध्यम से 12000 शिक्षकों का भर्ती किया गया, जिसमें बस्तर संभाग के मात्र 245 युवाओ का ही चयन हुआ वह भी अन्य जिलो से आये हुए उनके बच्चों का चयन हुआ है जबकि बस्तर मूल के एक भी बच्चों का चयन नही हुआ है। ऐसे में बस्तर का शिक्षा व्यवस्था कैसा हो सकता है? संभाग में तीन मेडिकल कॉलेज है, वहां भी बस्तर के युवाओं का चयन नही होता ऐसे में बस्तर जैसे अंदरूनी क्षेत्रो का स्वस्थ्य सेवा कैसा हो सकता है संभाग का शिक्षा व स्वास्थ्य पर आज तक शासन प्रशासन सही ढंग से ध्यान नही दिया, जबकि बस्तर संभाग में खनिज मद से लगभग 12,000 करोड़ रुपये सलाना रायल्टी मिलने के बावजूद ग्रामीण शिक्षा व स्वास्थ्य व्यवस्था ठीक नहीं है।

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