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छत्तीसगढ़: फर्जी फर्मों के नाम पर 5.04 करोड़ का बैंक लोन घोटाला, तत्कालीन मैनेजर समेत दो पर चालान
Sun, 01 Nov 2026 08:33 AM IST
अमन कोशले
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, बिलासपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, बिलासपुर
Published by: अमन कोशले
Updated Sun, 01 Nov 2026 08:33 AM IST
सार
ईओडब्ल्यू और एसीबी ने 11 अपात्र फर्मों को ऋण देने और फर्जी दस्तावेजों के इस्तेमाल के आरोप में तत्कालीन वरिष्ठ शाखा प्रबंधक राहुल कुमार सिन्हा और विश्वजीत भौमिक के खिलाफ विशेष न्यायालय में चालान पेश किया है।
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सांकेतिक तस्वीर
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
छत्तीसगढ़ के राज्य आर्थिक अपराध अन्वेषण ब्यूरो एवं भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो ने फर्जी संस्थानों के नाम पर करोड़ों रुपये का बैंक ऋण लेने के मामले में बड़ी कार्रवाई की है। जांच एजेंसी ने बैंक ऑफ वडोदरा की राजकिशोर नगर शाखा में हुए 5,04,15,000 रुपये के ऋण घोटाले में विशेष न्यायालय में चालान पेश कर दिया है। यह चालान शाखा के तत्कालीन वरिष्ठ शाखा प्रबंधक राहुल कुमार सिन्हा और विश्वजीत भौमिक के खिलाफ पेश किया गया है।
एजेंसी ने वर्ष 2020 में दर्ज केस की विस्तृत विवेचना पूरी करने के बाद विशेष न्यायालय (भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम), बिलासपुर में चालान प्रस्तुत किया। बैंक ऑफ वडोदरा के क्षेत्रीय कार्यालय, रायपुर से मिली शिकायत की जांच के बाद 28 जनवरी, 2020 को यह मामला दर्ज किया गया था। जांच के अनुसार आरोपियों के इस कृत्य से बैंक को कुल 5,04,15,000 रुपये की भारी आर्थिक क्षति हुई है।
बिना जानकारी बनाई फर्जी फर्में
जांच के दौरान सामने आया कि बिलासपुर के जरहाभाठा स्थित उड़ान माइक्रो फाइनेंस कार्यालय से आरोपी विश्वजीत भौमिक आम लोगों को छोटे ऋण और बैंकों से लोन दिलाने का काम करता था। वह ऋण लेने आए आवेदकों से उनके आधार कार्ड, पैन कार्ड, केवाईसी और संपत्ति से जुड़े मूल दस्तावेज जमा करवा लेता था। इसके पश्चात वह इन प्रपत्रों का अनुचित उपयोग कर संबंधित व्यक्तियों की जानकारी के बिना उनके नाम पर फर्जी फर्में तैयार कर लेता था।
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भौमिक ने कुछ फर्मों में अपने ही कर्मचारियों को प्रोपराइटर घोषित कर दिया। ब्यूरो की जांच में तीन फर्मों के दुकान एवं स्थापना पंजीयन प्रमाणपत्र फर्जी पाए गए। इसके अलावा, सात फर्मों के जीएसटी रिटर्न भी उड़ान माइक्रो फाइनेंस के कार्यालय से ही भरे जा रहे थे। बैंक के निरीक्षण के समय मौके पर किसी भी फर्म की वास्तविक व्यावसायिक इकाई मौजूद नहीं मिली।
अपात्र फर्मों को बांटे गए करोड़ों रुपये
जांच के अनुसार 20 मार्च, 2018 से 3 मई, 2019 के दौरान तत्कालीन वरिष्ठ शाखा प्रबंधक राहुल कुमार सिन्हा ने बैंक के नियमों और तय प्रक्रियाओं की अनदेखी करते हुए 11 अपात्र फर्मों को ऋण स्वीकृत किए। शाखा प्रबंधक ने इन फर्मों को कैश क्रेडिट, ओवरड्राफ्ट, बैंक गारंटी और टर्म लोन जैसी सुविधाएं प्रदान कीं। ऋण मंजूरी से पहले भौतिक सत्यापन में फर्मों के पते और कारोबार से संबंधित झूठी सूचनाएं दर्ज की गईं।
पड़ताल में पाया गया कि एक फर्म का व्यावसायिक पता आरोपी भौमिक का अपना मकान था। इन सभी ऋण मामलों के अप्रेजल नोट भी तत्कालीन शाखा प्रबंधक ने स्वयं तैयार किए थे। इसके साथ ही ऋण आवेदकों से संबंध न रखने वाले अन्य व्यक्तियों की संपत्तियों को भी उनकी बिना अनुमति बंधक रख लिया गया। वर्ष 2019 में ये सभी 11 खाते एनपीए घोषित हो गए।
राष्ट्रीय लघु उद्योग निगम के जरिये हेराफेरी
एजेंसी की पड़ताल के अनुसार बैंक से जारी की गई राशि का अंतिम फायदा विश्वजीत भौमिक को ही मिला। आरोपियों ने ऋण की राशि को राष्ट्रीय लघु उद्योग निगम (एनएसआईसी) के जरिये भौमिक की अपनी फर्म ए.बी. फास्टनर्स में स्थानांतरित कर दिया। इस कार्य के लिए एनएसआईसी, रायपुर में जाली और फर्जी बिल प्रस्तुत कर भुगतान हासिल किया गया था।
जांच पूरी होने के बाद ब्यूरो ने आरोपी विश्वजीत भौमिक और तत्कालीन वरिष्ठ शाखा प्रबंधक राहुल कुमार सिन्हा पर आरोप तय किए हैं। इसके अतिरिक्त, दोनों के विरुद्ध भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988 की धारा 12 और 13(2) के अंतर्गत भी न्यायालय में चालान प्रस्तुत किया है।
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एजेंसी ने वर्ष 2020 में दर्ज केस की विस्तृत विवेचना पूरी करने के बाद विशेष न्यायालय (भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम), बिलासपुर में चालान प्रस्तुत किया। बैंक ऑफ वडोदरा के क्षेत्रीय कार्यालय, रायपुर से मिली शिकायत की जांच के बाद 28 जनवरी, 2020 को यह मामला दर्ज किया गया था। जांच के अनुसार आरोपियों के इस कृत्य से बैंक को कुल 5,04,15,000 रुपये की भारी आर्थिक क्षति हुई है।
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बिना जानकारी बनाई फर्जी फर्में
जांच के दौरान सामने आया कि बिलासपुर के जरहाभाठा स्थित उड़ान माइक्रो फाइनेंस कार्यालय से आरोपी विश्वजीत भौमिक आम लोगों को छोटे ऋण और बैंकों से लोन दिलाने का काम करता था। वह ऋण लेने आए आवेदकों से उनके आधार कार्ड, पैन कार्ड, केवाईसी और संपत्ति से जुड़े मूल दस्तावेज जमा करवा लेता था। इसके पश्चात वह इन प्रपत्रों का अनुचित उपयोग कर संबंधित व्यक्तियों की जानकारी के बिना उनके नाम पर फर्जी फर्में तैयार कर लेता था।
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भौमिक ने कुछ फर्मों में अपने ही कर्मचारियों को प्रोपराइटर घोषित कर दिया। ब्यूरो की जांच में तीन फर्मों के दुकान एवं स्थापना पंजीयन प्रमाणपत्र फर्जी पाए गए। इसके अलावा, सात फर्मों के जीएसटी रिटर्न भी उड़ान माइक्रो फाइनेंस के कार्यालय से ही भरे जा रहे थे। बैंक के निरीक्षण के समय मौके पर किसी भी फर्म की वास्तविक व्यावसायिक इकाई मौजूद नहीं मिली।
अपात्र फर्मों को बांटे गए करोड़ों रुपये
जांच के अनुसार 20 मार्च, 2018 से 3 मई, 2019 के दौरान तत्कालीन वरिष्ठ शाखा प्रबंधक राहुल कुमार सिन्हा ने बैंक के नियमों और तय प्रक्रियाओं की अनदेखी करते हुए 11 अपात्र फर्मों को ऋण स्वीकृत किए। शाखा प्रबंधक ने इन फर्मों को कैश क्रेडिट, ओवरड्राफ्ट, बैंक गारंटी और टर्म लोन जैसी सुविधाएं प्रदान कीं। ऋण मंजूरी से पहले भौतिक सत्यापन में फर्मों के पते और कारोबार से संबंधित झूठी सूचनाएं दर्ज की गईं।
पड़ताल में पाया गया कि एक फर्म का व्यावसायिक पता आरोपी भौमिक का अपना मकान था। इन सभी ऋण मामलों के अप्रेजल नोट भी तत्कालीन शाखा प्रबंधक ने स्वयं तैयार किए थे। इसके साथ ही ऋण आवेदकों से संबंध न रखने वाले अन्य व्यक्तियों की संपत्तियों को भी उनकी बिना अनुमति बंधक रख लिया गया। वर्ष 2019 में ये सभी 11 खाते एनपीए घोषित हो गए।
राष्ट्रीय लघु उद्योग निगम के जरिये हेराफेरी
एजेंसी की पड़ताल के अनुसार बैंक से जारी की गई राशि का अंतिम फायदा विश्वजीत भौमिक को ही मिला। आरोपियों ने ऋण की राशि को राष्ट्रीय लघु उद्योग निगम (एनएसआईसी) के जरिये भौमिक की अपनी फर्म ए.बी. फास्टनर्स में स्थानांतरित कर दिया। इस कार्य के लिए एनएसआईसी, रायपुर में जाली और फर्जी बिल प्रस्तुत कर भुगतान हासिल किया गया था।
जांच पूरी होने के बाद ब्यूरो ने आरोपी विश्वजीत भौमिक और तत्कालीन वरिष्ठ शाखा प्रबंधक राहुल कुमार सिन्हा पर आरोप तय किए हैं। इसके अतिरिक्त, दोनों के विरुद्ध भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988 की धारा 12 और 13(2) के अंतर्गत भी न्यायालय में चालान प्रस्तुत किया है।