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हिंदी साहित्य में शोक: नहीं रहे CG के पहले ज्ञानपीठ पुरस्कार पाने वाले विनोद कुमार शुक्ल, PM-CM ने जताया दुख

Tue, 23 Dec 2025 07:36 PM IST
अनुज कुमार अमर उजाला नेटवर्क, रायपुर
अमर उजाला नेटवर्क, रायपुर Published by: अनुज कुमार Updated Tue, 23 Dec 2025 07:36 PM IST
सार

Vinod Kumar Shukla Death: हिंदी साहित्य के शीर्ष कवि-कथाकार विनोद कुमार शुक्ल का रायपुर एम्स में 88 साल की उम्र में निधन हो गया। विनोद कुमार शुक्ल छत्तीसगढ़ में पहला ज्ञानपीठ पुरस्कार पाने वाले साहित्कार थे। जिनका जन्म राजनांदगांव में हुआ था।

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Vinod Kumar Shukla first recipient of Jnanpith Award from cg and pm-cm expressed their condolences
विनोद कुमार शुक्ल - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

हिंदी साहित्य के शीर्ष कवि-कथाकार और हाल ही में ज्ञानपीठ पुरस्कार से सम्मानित विनोद कुमार शुक्ल का मंगलवार शाम निधन हो गया। वे 88 वर्ष के थे। शुक्ल पिछले कुछ दिनों से गंभीर रूप से बीमार थे और सांस लेने में तकलीफ के कारण रायपुर के एम्स अस्पताल में भर्ती थे। विनोद कुमार शुक्त छत्तीसगढ़ के पहले ज्ञानपीठ पुरस्कार पाने वाले साहित्यकार थे। उनके निधन पर पीएम नरेंद्र मोदी और राज्य के मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने शोक जताया है। अब बुधवार सुबह 11 बजे उनका अंतिम संस्कार किया जाएगा।

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विनोद कुमार शुक्ल के निधन की खबर से साहित्य जगत में शोक की लहर दौड़ गई है। बीते महीने ही उन्हें हिंदी साहित्य के सर्वोच्च सम्मान ज्ञानपीठ पुरस्कार से नवाजा गया था। छत्तीसगढ़ के राजनांदगांव में जन्मे शुक्ल हिंदी साहित्य में अपनी सरल भाषा, गहरी संवेदना और अनोखी शैली के लिए जाने जाते थे। उनकी प्रमुख रचनाओं में 'नौकर की कमीज', 'दीवार में एक खिड़की रहती थी' और 'खिलेगा तो देखेंगे' जैसे उपन्यास शामिल हैं।
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निधन के बाद छत्तीसगढ़ सरकार ने उनके सम्मान में रायपुर में होने वाले सभी आधिकारिक कार्यक्रम रद्द कर दिए हैं। सरकार का कहना है कि यह फैसला उनकी साहित्यिक विरासत और प्रदेश के लिए उनके योगदान को श्रद्धांजलि देने का महत्वपूर्ण कदम है।शुक्ल के निधन पर साहित्यप्रेमी और बुद्धिजीवी गहरा दुख व्यक्त कर रहे हैं। उनकी रचनाएं आने वाली पीढ़ियों को हमेशा प्रेरित करती रहेंगी।
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पीएम मोदी ने जताया शोक
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी विनोद कुमार शुक्ल के निधन पर दुख जताया है। उन्होंने लिखा- “ज्ञानपीठ पुरस्कार से सम्मानित प्रख्यात लेखक विनोद कुमार शुक्ल जी के निधन से अत्यंत दुख हुआ है। हिन्दी साहित्य जगत में अपने अमूल्य योगदान के लिए वे हमेशा स्मरणीय रहेंगे। शोक की इस घड़ी में मेरी संवेदनाएं उनके परिजनों और प्रशंसकों के साथ हैं। ओम शांति।”
 

छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री साय ने दुख जताया
महान साहित्यकार विनोद कुमार शुक्ल के निधन पर मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने एक्स पर लिखा 'महान साहित्यकार विनोद कुमार शुक्ल का निधन एक बड़ी क्षति है। नौकर की कमीज, दीवार में एक खिड़की रहती थी जैसी चर्चित कृतियों से साधारण जीवन को गरिमा देने वाले विनोद जी छत्तीसगढ़ के गौरव के रूप में हमेशा हम सबके हृदय में विद्यमान रहेंगे। संवेदनाओं से परिपूर्ण उनकी रचनाएम पीढ़ियों को प्रेरित करती रहेंगी। उनके परिजन एवं पाठकों-प्रशंसकों को हार्दिक संवेदना। ओम शान्ति।'
 


तत्काल राजकीय शोक घोषित करे सरकार: पूर्व सीएम बघेल
पूर्व सीएम भूपेश बघेल ने लिखा कि छत्तीसगढ़ की साहित्यिक धरोहर, ज्ञान पीठ पुरस्कार से सम्मानित, हम सबके गौरव विनोद कुमार शुक्ल जी का जाना छत्तीसगढ़ सहित देशभर के लिए अपूरणीय साहित्यिक क्षति है। उन्होंने रायपुर के एम्स अस्पताल में आज अंतिम सांस ली है। मैं ईश्वर से उनकी दिवंगत आत्मा की शांति की कामना करता हूं। ईश्वर उनके परिवारजनों, उनके शुभचिंतकों एवं चाहने वालों को यह दुःख सहने की शक्ति प्रदान करे। ओम शांति ओम। आगे लिखा कि मैं छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय से अनुरोध करता हूं कि स्व. विनोद कुमार शुक्ल जी के निधन पर तत्काल राजकीय शोक घोषित करें। प्रदेश में इस दौरान किसी भी प्रकार के उत्सव, महोत्सव को कुछ दिनों के लिए टाल दें। यह हम सबका साझा दुःख है।



विनोद शुक्ल को कांग्रेस ने दी श्रद्धांजलि
प्रख्यात कवि, साहित्यकार विनोद कुमार शुक्ल के निधन पर कांग्रेस ने गहरा दुख प्रकट किया है। शुक्ल का निधन छत्तीसगढ़ ही नहीx देश के साहित्य जगत की अपूरणीय क्षति है। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज ने कहा कि विनोद शुक्ल के निधन पर मैं अपनी विनम्र श्रद्धांजली अर्पित करता हूं। ईश्वर उन्हें अपने चरणो में स्थान दें। परिजनों को इस दुख को सहने की शक्ति प्रदान करें। वहीं दूसरी तरफ कांग्रेस संचार विभाग के अध्यक्ष सुशील आनंद शुक्ला, प्रदेश प्रवक्ता धनंजय सिंह ठाकुर ने भी गहरा शोक जताया है। 

कलेक्टर सहित अन्य अधिकारियों ने शुक्ल को दी श्रद्धांजलि
हिंदी के प्रख्यात साहित्यकार शुक्ल के निधन पर रायपुर कलेक्टर डॉ. गौरव सिंह, नगर निगम आयुक्त विश्वदीप, जिला पंचायत सीईओ कुमार बिश्वरंजन सहित अन्य अधिकारी एवं गणमान्य नागरिकों ने टैगोर नगर स्थित उनके निज निवास पहुंचकर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की।  दिवंगत साहित्यकार शुक्ल का अंतिम संस्कार कल सुबह 11 बजे मारवाड़ी मुक्तिधाम में होगा।
 

Vinod Kumar Shukla first recipient of Jnanpith Award from cg and pm-cm expressed their condolences
विनोद कुमार शुक्ल का पार्थिव शव - फोटो : अमर उजाला

विनोद कुमार शुक्ल का राजनांदगांव में जन्म हुआ
छत्तीसगढ़ के राजनांदगांव में 1 जनवरी 1937 को जन्मे विनोद कुमार शुक्ल हिन्दी साहित्य में ऐसे लेखक के रूप में प्रतिष्ठित थे जिनकी साहित्यिक आवाज़ दूर-दूर तक सुनाई देती थी। 

शुक्ल ने काव्य धारा को नई दिशा
निराशा में आशा का संचार करने वाले कवि-कथाकार विनोद कुमार शुक्ल साहित्य के इस युग में काव्य धारा को नई दिशा देने वाले हैं। उनकी कविताएं सीधे परेशानियों की जड़ों पर कुठाराघात करती हैं। उन्हें कुरेदती हैं। उनकी कल्पना शक्ति का सीमांकन समीक्षकों के लिए हमेशा एक चुनौती रहा है।

1974 में प्रकाशित हुआ पहला कविता-संग्रह
उनका पहला कविता-संग्रह ‘लगभग जय हिन्द’ 1971 में प्रकाशित हुआ, जिसके साथ ही उनकी अपने तरह की भाषिक बनावट, चुप्पी और भीतर तक उतरती संवेदनाएँ हिन्दी कविता के परिदृश्य में दर्ज होने लगीं। इसके बाद ‘वह आदमी चला गया नया गरम कोट पहिनकर विचार की तरह’, ‘सब कुछ होना बचा रहेगा’, ‘अतिरिक्त नहीं’, ‘कविता से लंबी कविता’, ‘आकाश धरती को खटखटाता है’, ‘पचास कविताएँ’, ‘कभी के बाद अभी’, ‘कवि ने कहा’, ‘चुनी हुई कविताएँ’ और ‘प्रतिनिधि कविताएँ’ जैसे संग्रहों ने उन्हें समकालीन हिन्दी कविता के एक अलग तरह के स्वरों में शामिल कर दिया, जो अपने आप में नयापन और मौलिकता लिए हुए था। कथा-साहित्य में उनके उपन्यास ‘नौकर की कमीज़’ ने 1979 में हिन्दी कहानी और उपन्यास की धारा को एक अलग मोड़ दिया। 

इस उपन्यास पर बनी पहली फिल्म
इस उपन्यास मणि कौल ने फ़िल्म भी बनाई है। आगे चलकर ‘खिलेगा तो देखेंगे’, ‘दीवार में एक खिड़की रहती थी’, ‘हरी घास की छप्पर वाली झोपड़ी और बौना पहाड़’, ‘यासि रासा त’ और ‘एक चुप्पी जगह’ के माध्यम से उन्होंने लोकआख्यान, स्वप्न, स्मृति, मध्यवर्गीय जीवन और मनुष्य की जटिल आकांक्षाओं को एक विशिष्ट कथा-शिल्प में रूपांतरित किया। 

विनोद कुमार शुक्ल इन पुरस्कारों से हुए सम्मानित
उनके कहानी संग्रह ‘पेड़ पर कमरा’, ‘महाविद्यालय’, ‘एक कहानी’ और ‘घोड़ा और अन्य कहानियाँ’ जैसे संग्रहों में दर्ज हैं, हिंदी साहित्य में अपनी विशिष्टता के लिए जाने जाते हैं। उनकी अनेक रचनाएँ भारतीय और विदेशी भाषाओं में अनूदित हुई हैं। अपनी लंबी रचनात्मक यात्रा में उन्हें साहित्य अकादमी पुरस्कार, गजानन माधव मुक्तिबोध फेलोशिप, रजा पुरस्कार, शिखर सम्मान, राष्ट्रीय मैथिलीशरण गुप्त सम्मान, दयावती मोदी कवि शेखर सम्मान, हिन्दी गौरव सम्मान, मातृभूमि पुरस्कार, साहित्य अकादमी का महत्तर सदस्य सम्मान और 2023 का पैन-नाबोकोव पुरस्कार से सम्मानित किया गया था। 

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