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सीजी: प्रदेश में संक्रामक रोगों पर शोध को मिलेगी गति, कृषि विश्वविद्यालय में स्थापित हुई बीएसएल-3 प्रयोगशाला

Mon, 12 Oct 2026 10:18 PM IST
शबाहत हुसैन न्यूज डेस्क, अमर उजाला, रायपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, रायपुर Published by: शबाहत हुसैन Updated Mon, 12 Oct 2026 10:18 PM IST
सार

छत्तीसगढ़ के इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय परिसर में स्थापित बीएसएल-3 प्रयोगशाला से संक्रामक रोगों की पहचान, रोकथाम, वैक्सीन अनुसंधान और जूनोटिक बीमारियों की निगरानी को गति मिलेगी। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने इसे राज्य की वैज्ञानिक अनुसंधान क्षमता बढ़ाने वाली महत्वपूर्ण उपलब्धि बताया।

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Research on infectious diseases in the state to gain momentum; BSL-3 laboratory established
सीएम विष्णु देव साय - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय, रायपुर परिसर में स्थापित अत्याधुनिक बायोसेफ्टी लेवल-3 (बीएसएल-3) प्रयोगशाला छत्तीसगढ़ में उच्चस्तरीय जैव-सुरक्षा अनुसंधान को नई दिशा देगी। इससे संक्रामक रोगों की पहचान, रोकथाम, वैक्सीन एवं उपचार संबंधी अनुसंधान और उन्नत नैदानिक तकनीकों के विकास को गति मिलेगी। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने इसे राज्य में वैज्ञानिक नवाचार और अनुसंधान क्षमताओं के विस्तार की दिशा में महत्वपूर्ण उपलब्धि बताया है।

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मुख्यमंत्री साय ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विकसित भारत के संकल्प के अनुरूप छत्तीसगढ़ में वैज्ञानिक अनुसंधान, जैव-प्रौद्योगिकी और आधुनिक प्रयोगशाला सुविधाओं का विस्तार राज्य के समग्र विकास की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। कृषि एवं पशुपालन आधारित अर्थव्यवस्था वाले छत्तीसगढ़ में इस तरह की उच्चस्तरीय वैज्ञानिक सुविधा का विशेष महत्व है।

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उल्लेखनीय है कि इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय परिसर में छत्तीसगढ़ बायोटेक प्रमोशन सोसायटी की ओर से नवनिर्मित सुभाषचंद्र बोस बायोटेक इन्क्यूबेशन सेंटर के अंतर्गत स्थापित बीएसएल-3 प्रयोगशाला का लोकार्पण 28 सितंबर को किया गया था। मुख्यमंत्री ने इस उपलब्धि के लिए विश्वविद्यालय के कुलपति एवं छत्तीसगढ़ बायोटेक प्रमोशन सोसायटी के मुख्य कार्यपालन अधिकारी डॉ. गिरीश चंदेल के प्रयासों की सराहना करते हुए उन्हें बधाई दी।

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जूनोटिक रोगों के अध्ययन में यह सुविधा महत्वपूर्ण
मुख्यमंत्री ने कहा कि इस प्रयोगशाला के माध्यम से पौधों, पशुओं और मानव स्वास्थ्य से जुड़े संक्रामक रोगों के अध्ययन एवं निगरानी को गति मिलेगी। विशेष रूप से पशुओं से मनुष्यों में फैलने वाले जूनोटिक रोगों के अध्ययन में यह सुविधा महत्वपूर्ण साबित हो सकती है। इससे गंभीर संक्रामक रोगों की शीघ्र पहचान, रोग प्रकोप से निपटने की तैयारी और उन्नत नैदानिक क्षमताओं को मजबूत करने में मदद मिलेगी।

उन्होंने कहा कि प्रयोगशाला में उच्च जैव-सुरक्षा मानकों के अनुरूप नियंत्रित वातावरण उपलब्ध होगा। इससे वैज्ञानिकों और शोधार्थियों को संक्रामक रोगजनकों के अध्ययन के साथ वैक्सीन एवं उपचार संबंधी अनुसंधान के नए अवसर मिलेंगे। इसके साथ ही कृषि जैव-प्रौद्योगिकी, पशु स्वास्थ्य और संक्रामक रोग अनुसंधान के बीच बेहतर समन्वय स्थापित हो सकेगा। मुख्यमंत्री ने कहा कि मानव स्वास्थ्य, पशु स्वास्थ्य और पर्यावरण के परस्पर संबंधों पर आधारित 'वन हेल्थ' दृष्टिकोण को मजबूत बनाने में भी यह प्रयोगशाला अहम भूमिका निभाएगी। इससे कृषि एवं पशुपालन क्षेत्र में रोगों की निगरानी और उनके वैज्ञानिक समाधान विकसित करने की संभावनाएं बढ़ेंगी।

सीएम ने आगे क्या कहा?
उन्होंने बताया कि इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय कृषि अनुसंधान, जैव-प्रौद्योगिकी और आधुनिक प्रयोगशाला सुविधाओं के विकास में पहले से ही महत्वपूर्ण योगदान दे रहा है। विश्वविद्यालय की फाइटोसैनिटरी प्रयोगशाला कृषि नमूनों, मृदा, जल, फसल अवशेषों और अन्य नमूनों के परीक्षण एवं अनुसंधान में अहम भूमिका निभा रही है। बीएसएल-3 प्रयोगशाला की स्थापना से विश्वविद्यालय की अनुसंधान क्षमताओं को और मजबूती मिलेगी।

मुख्यमंत्री ने कहा कि इस सुविधा से वैज्ञानिकों, शोधार्थियों, प्रयोगशाला तकनीशियनों और संबंधित विशेषज्ञों को उच्च जैव-सुरक्षा मानकों के अनुरूप प्रशिक्षण एवं अनुसंधान के अवसर मिलेंगे। इससे राज्य में कुशल वैज्ञानिक मानव संसाधन विकसित करने और आधुनिक अनुसंधान तकनीकों के विस्तार को प्रोत्साहन मिलेगा।

मुख्यमंत्री साय ने विश्वास जताया कि बीएसएल-3 प्रयोगशाला भविष्य में संक्रामक रोग अनुसंधान, रोग निगरानी, जैव-सुरक्षा, पशु एवं जूनोटिक रोगों के अध्ययन और रोग प्रकोप से निपटने की तैयारियों के लिए महत्वपूर्ण वैज्ञानिक अधोसंरचना साबित होगी। इससे छत्तीसगढ़ में उच्चस्तरीय जैव-सुरक्षा अनुसंधान को गति मिलने के साथ ही राष्ट्रीय स्तर पर इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय की अनुसंधान क्षमता और पहचान भी मजबूत होगी।

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