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Chhattisgarh: विधानसभा से पारित हुआ ईज ऑफ डूइंग बिजनेस अधिनियम-2026, छोटे कारोबारों को मिलेगी आसान मंजूरी
Thu, 16 Jul 2026 07:23 PM IST
Digvijay Singh
अमर उजाला नेटवर्क, रायपुर
अमर उजाला नेटवर्क, रायपुर
Published by: Digvijay Singh
Updated Thu, 16 Jul 2026 07:23 PM IST
सार
छत्तीसगढ़ विधानसभा ने आज 'छत्तीसगढ़ ईज ऑफ डूइंग बिजनेस अधिनियम, 2026' पारित किया। इसके साथ ही छत्तीसगढ़ देश का पहला राज्य बनने जा रहा है, जहां जोखिम आधारित एवं विश्वास आधारित बिजनेस परमिशन सिस्टम लागू होगा।
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छत्तीसगढ़ के सीएम विष्णुदेव साय
- फोटो : फाइल फोटो
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विस्तार
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ ने उद्योग और कारोबार को बढ़ावा देने के लिए एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है। छत्तीसगढ़ विधानसभा ने आज 'छत्तीसगढ़ ईज ऑफ डूइंग बिजनेस अधिनियम, 2026' पारित किया। इसके साथ ही छत्तीसगढ़ देश का पहला राज्य बनने जा रहा है, जहां जोखिम आधारित एवं विश्वास आधारित बिजनेस परमिशन सिस्टम लागू होगा।
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इस अधिनियम का उद्देश्य उद्योगों और कारोबार की स्थापना तथा संचालन प्रक्रियाओं को सरल बनाना है। यह अनावश्यक अनुपालनों को कम करेगा और विशेष रूप से सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यमों (एमएसएमई) के लिए पारदर्शी वातावरण बनाएगा। अधिनियम के तहत उद्योगों का वर्गीकरण उनके आकार और गतिविधियों के जोखिम के आधार पर होगा। कम जोखिम वाले छोटे कारोबारों को सरल और त्वरित मंजूरी मिलेगी। अधिक जोखिम वाली परियोजनाओं के लिए तकनीकी परीक्षण और समयबद्ध स्वीकृति की व्यवस्था जारी रहेगी। इससे छोटे कारोबारियों को जटिल प्रक्रियाओं से नहीं गुजरना पड़ेगा। कम जोखिम वाले उद्यमों में बार-बार विभागीय निरीक्षणों के स्थान पर सेल्फ सर्टिफिकेशन या अधिकृत पेशेवरों द्वारा प्रमाणन होगा। इससे अनुमतियों की प्रक्रिया तेज, सरल और अधिक जवाबदेह बनेगी।
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प्रक्रियाओं का सरलीकरण
अधिनियम हर वर्ष लाइसेंस या अनुमति के नवीनीकरण की अनिवार्यता समाप्त करता है। अब जोखिम आधारित अनुमति प्रणाली लागू होगी। इससे उद्यमियों को अनावश्यक औपचारिकताओं से राहत मिलेगी। वे अपने कारोबार के विस्तार पर अधिक ध्यान दे सकेंगे। एमएसएमई इकाइयों के लिए जल प्रदाय अनुमति स्व-घोषणा पर मिलेगी।
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निगरानी और लाभ
सोसायटी या फर्म का पंजीयन समयबद्ध प्रक्रिया से होगा। भवन अनुज्ञा सेल्फ सर्टिफिकेशन या विशेषज्ञ प्रमाण-पत्र के आधार पर मिलेगी। निर्धारित समय-सीमा में निर्णय न होने पर अनुमति स्वतः स्वीकृत मानी जाएगी। राज्य के 8 विभागों की 43 सेवाएं इस प्रणाली में शामिल की गई हैं। इस सुधार से 15 लाख से अधिक एमएसएमई को सीधा लाभ मिलने की संभावना है।