{"_id":"6ab67ef014d7f5cdb100f60b","slug":"chhattisgarh-high-court-bed-ded-teachers-two-advance-increments-petition-dismissed-2026-09-25","type":"story","status":"publish","title_hn":"छत्तीसगढ़: हाईकोर्ट का फैसला, बीएड-डीएड वाले शिक्षकों को नहीं मिलेगी दो अग्रिम वेतन वृद्धि; याचिका खारिज","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
छत्तीसगढ़: हाईकोर्ट का फैसला, बीएड-डीएड वाले शिक्षकों को नहीं मिलेगी दो अग्रिम वेतन वृद्धि; याचिका खारिज
Fri, 25 Sep 2026 07:32 PM IST
दिनेश शर्मा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, रायपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, रायपुर
Published by: दिनेश शर्मा
Updated Fri, 25 Sep 2026 07:32 PM IST
सार
छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने स्वयं के खर्च पर बीएड, डीएड या बीटीआई प्रशिक्षण लेने वाले शिक्षकों को दो अग्रिम वेतन वृद्धि देने की मांग खारिज कर दी। जस्टिस बिभु दत्ता गुरु की पीठ ने कहा कि इसका कानूनी अधिकार नहीं है। हालांकि, भविष्य में वसूली आदेश जारी होने पर शिक्षक उसे अदालत में चुनौती दे सकेंगे।
विज्ञापन
छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट ने स्वयं के खर्च पर बी.एड, डी.एड या बीटीआई प्रशिक्षण प्राप्त करने वाले शिक्षकों को दो अग्रिम वेतन वृद्धि देने की मांग को खारिज कर दिया है। अदालत ने स्पष्ट किया कि इस प्रकार के प्रशिक्षण के आधार पर दो अग्रिम वेतन वृद्धि का लाभ पाने का कानूनी अधिकार शिक्षकों को प्राप्त नहीं है। हालांकि, न्यायपीठ ने शिक्षकों को भविष्य के संदर्भ में एक राहत देते हुए यह साफ किया कि पूर्व में भुगतान की जा चुकी वेतन वृद्धि की राशि की यदि राज्य सरकार भविष्य में वसूली करती है, तो संबंधित शिक्षक उस आदेश को अदालत में चुनौती दे सकेंगे।
मामले की सुनवाई हाई कोर्ट के जस्टिस बिभु दत्ता गुरु की एकल पीठ ने की। अदालत ने इस विषय से जुड़ी दो अलग-अलग याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए यह आदेश जारी किया।
सरकार के इन्कार पर पहुंचे अदालत
यह मामला रायपुर, गरियाबंद और महासमुंद जिले की शासकीय प्राथमिक शालाओं में पदस्थ प्रधान पाठकों छतेंद्र सिंह ठाकुर, सुधीर सिंह ठाकुर तथा अन्य शिक्षकों से जुड़ा हुआ है। इन याचिकाकर्ताओं ने अपने स्वयं के खर्च पर बी.एड, डी.एड अथवा बीटीआई का प्रशिक्षण पूरा किया था। इसके पश्चात शिक्षकों ने राज्य सरकार से दो अग्रिम वेतन वृद्धि का लाभ देने का अनुरोध किया था। जब राज्य शासन ने दो अग्रिम वेतन वृद्धि का लाभ देने से मना कर दिया, तब शिक्षकों ने सरकार के इस निर्णय को हाई कोर्ट में चुनौती दी। इसके अतिरिक्त, याचिकाकर्ताओं ने अपनी याचिका में पूर्व में भुगतान की जा चुकी वेतन वृद्धि की संभावित वसूली से भी राहत प्रदान करने का आग्रह किया था।
विज्ञापन
ये भी पढ़ें- छत्तीसगढ़ में चक्रवात अर्नब का तांडव: भारी बारिश से नदियां उफान पर, कई प्रमुख मार्गों पर आवागमन बंद
पहले के न्यायिक निर्णयों का दिया उदाहरण
सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ताओं की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता ने दिनेश कुमार वर्मा बनाम छत्तीसगढ़ राज्य के मामले में दिए गए फैसले का उल्लेख किया। उन्होंने इसी आधार पर याचिकाकर्ता शिक्षकों को दो अग्रिम वेतन वृद्धि का लाभ देने की मांग रखी। वहीं, राज्य सरकार की ओर से इस मांग का कड़ा विरोध किया गया। शासन ने अदालत में दलील दी कि स्वयं के खर्च पर बी.एड, डी.एड या बीटीआई प्रमाणपत्र प्राप्त करने के आधार पर अग्रिम वेतन वृद्धि की पात्रता का मुद्दा पूर्व न्यायिक निर्णयों के माध्यम से स्पष्ट हो चुका है। सरकार ने अपने पक्ष के समर्थन में नीलम दुबे और दिनेश कुमार वर्मा के मामलों में आए निर्णयों का संदर्भ दिया।
वसूली के संबंध में खुला रखा रास्ता
मामले में दूसरा महत्वपूर्ण मुद्दा पहले से दी जा चुकी वेतन वृद्धि की राशि की संभावित वसूली को लेकर था। राज्य सरकार ने अदालत को सूचित किया कि वर्तमान में याचिकाकर्ता शिक्षकों के विरुद्ध वसूली का कोई औपचारिक आदेश जारी नहीं किया गया है। शासन ने तर्क दिया कि जब तक वसूली का कोई आदेश जारी ही नहीं हुआ, तब तक राहत की याचिका समय से पहले है।
हाई कोर्ट ने दोनों पक्षों की सुनवाई के उपरांत शिक्षकों को दो अग्रिम वेतन वृद्धि देने की मांग को स्वीकार नहीं किया। अदालत ने माना कि स्वयं के खर्च पर प्रशिक्षण हासिल करने वाले शिक्षकों को दो अग्रिम वेतन वृद्धि दिए जाने की पात्रता पूर्व के न्यायिक निर्णयों से निर्धारित हो चुकी है। इस निर्णय के बाद फिलहाल शिक्षकों को दो अतिरिक्त अग्रिम वेतन वृद्धि का लाभ नहीं मिलेगा। हालांकि, अदालत ने वसूली के संबंध में आगे का रास्ता खुला रखा है। न्यायपीठ ने कहा कि यदि भविष्य में शासन पूर्व में दी गई राशि की वसूली का कोई औपचारिक आदेश जारी करता है, तो शिक्षक उस आदेश को पृथक रूप से हाई कोर्ट में चुनौती दे सकेंगे।
विज्ञापन
मामले की सुनवाई हाई कोर्ट के जस्टिस बिभु दत्ता गुरु की एकल पीठ ने की। अदालत ने इस विषय से जुड़ी दो अलग-अलग याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए यह आदेश जारी किया।
विज्ञापन
सरकार के इन्कार पर पहुंचे अदालत
यह मामला रायपुर, गरियाबंद और महासमुंद जिले की शासकीय प्राथमिक शालाओं में पदस्थ प्रधान पाठकों छतेंद्र सिंह ठाकुर, सुधीर सिंह ठाकुर तथा अन्य शिक्षकों से जुड़ा हुआ है। इन याचिकाकर्ताओं ने अपने स्वयं के खर्च पर बी.एड, डी.एड अथवा बीटीआई का प्रशिक्षण पूरा किया था। इसके पश्चात शिक्षकों ने राज्य सरकार से दो अग्रिम वेतन वृद्धि का लाभ देने का अनुरोध किया था। जब राज्य शासन ने दो अग्रिम वेतन वृद्धि का लाभ देने से मना कर दिया, तब शिक्षकों ने सरकार के इस निर्णय को हाई कोर्ट में चुनौती दी। इसके अतिरिक्त, याचिकाकर्ताओं ने अपनी याचिका में पूर्व में भुगतान की जा चुकी वेतन वृद्धि की संभावित वसूली से भी राहत प्रदान करने का आग्रह किया था।
विज्ञापन
ये भी पढ़ें- छत्तीसगढ़ में चक्रवात अर्नब का तांडव: भारी बारिश से नदियां उफान पर, कई प्रमुख मार्गों पर आवागमन बंद
पहले के न्यायिक निर्णयों का दिया उदाहरण
सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ताओं की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता ने दिनेश कुमार वर्मा बनाम छत्तीसगढ़ राज्य के मामले में दिए गए फैसले का उल्लेख किया। उन्होंने इसी आधार पर याचिकाकर्ता शिक्षकों को दो अग्रिम वेतन वृद्धि का लाभ देने की मांग रखी। वहीं, राज्य सरकार की ओर से इस मांग का कड़ा विरोध किया गया। शासन ने अदालत में दलील दी कि स्वयं के खर्च पर बी.एड, डी.एड या बीटीआई प्रमाणपत्र प्राप्त करने के आधार पर अग्रिम वेतन वृद्धि की पात्रता का मुद्दा पूर्व न्यायिक निर्णयों के माध्यम से स्पष्ट हो चुका है। सरकार ने अपने पक्ष के समर्थन में नीलम दुबे और दिनेश कुमार वर्मा के मामलों में आए निर्णयों का संदर्भ दिया।
वसूली के संबंध में खुला रखा रास्ता
मामले में दूसरा महत्वपूर्ण मुद्दा पहले से दी जा चुकी वेतन वृद्धि की राशि की संभावित वसूली को लेकर था। राज्य सरकार ने अदालत को सूचित किया कि वर्तमान में याचिकाकर्ता शिक्षकों के विरुद्ध वसूली का कोई औपचारिक आदेश जारी नहीं किया गया है। शासन ने तर्क दिया कि जब तक वसूली का कोई आदेश जारी ही नहीं हुआ, तब तक राहत की याचिका समय से पहले है।
हाई कोर्ट ने दोनों पक्षों की सुनवाई के उपरांत शिक्षकों को दो अग्रिम वेतन वृद्धि देने की मांग को स्वीकार नहीं किया। अदालत ने माना कि स्वयं के खर्च पर प्रशिक्षण हासिल करने वाले शिक्षकों को दो अग्रिम वेतन वृद्धि दिए जाने की पात्रता पूर्व के न्यायिक निर्णयों से निर्धारित हो चुकी है। इस निर्णय के बाद फिलहाल शिक्षकों को दो अतिरिक्त अग्रिम वेतन वृद्धि का लाभ नहीं मिलेगा। हालांकि, अदालत ने वसूली के संबंध में आगे का रास्ता खुला रखा है। न्यायपीठ ने कहा कि यदि भविष्य में शासन पूर्व में दी गई राशि की वसूली का कोई औपचारिक आदेश जारी करता है, तो शिक्षक उस आदेश को पृथक रूप से हाई कोर्ट में चुनौती दे सकेंगे।