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100 करोड़ के कथित घोटाले पर एक्शन: रायपुर निगम में फाइल गायब, जांच के लिए बनी चार सदस्यीय कमेटी
Sat, 18 Apr 2026 12:38 PM IST
अमन कोशले
अमर उजाला नेटवर्क, रायपुर
अमर उजाला नेटवर्क, रायपुर
Published by: अमन कोशले
Updated Sat, 18 Apr 2026 12:38 PM IST
सार
रायपुर नगर पालिक निगम में टाउन एंड कंट्री प्लानिंग (TNC) और मार्ग संरचना की स्वीकृतियों को लेकर बड़े पैमाने पर गड़बड़ी के आरोप सामने आने के बाद प्रशासन हरकत में आ गया है।
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सांकेतिक तस्वीर
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
रायपुर नगर पालिक निगम में टाउन एंड कंट्री प्लानिंग (TNC) और मार्ग संरचना की स्वीकृतियों को लेकर बड़े पैमाने पर गड़बड़ी के आरोप सामने आने के बाद प्रशासन हरकत में आ गया है। निगम आयुक्त विश्वदीप ने मामले की जांच के लिए चार सदस्यीय समिति गठित कर दी है और जल्द विस्तृत रिपोर्ट मांगी गई है।
जांच समिति की कमान अपर आयुक्त स्तर के अधिकारी को सौंपी गई है, जबकि इसमें नगर निवेश और इंजीनियरिंग शाखा के अन्य अधिकारियों को भी शामिल किया गया है। टीम को पूरे प्रकरण की गहराई से पड़ताल कर जिम्मेदारों की पहचान करने के निर्देश दिए गए हैं।
दरअसल, मामला कथित तौर पर 100 करोड़ रुपये से अधिक के घोटाले से जुड़ा बताया जा रहा है। आरोप है कि निर्माण और कॉलोनियों की स्वीकृति में तय प्रक्रिया का पालन नहीं किया गया और फाइलों को नियमों के विपरीत सीधे संबंधित विभागों तक पहुंचाया गया। इस दौरान कई अहम दस्तावेज और मूल फाइलें गायब होने की बात भी सामने आई है।
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विवाद तब बढ़ा जब कुछ मामलों में स्वीकृति प्रक्रिया में नगर निगम आयुक्त की भूमिका को ही दरकिनार कर दिया गया। बताया जा रहा है कि फाइलें सीधे जोन कार्यालय से प्लानिंग विभाग भेज दी गईं, जबकि नियमानुसार ऐसा संभव नहीं है। बाद में जब दस्तावेजों की जांच हुई तो कई मूल नस्तियां उपलब्ध नहीं मिलीं।
इस पूरे मामले में शहर के कुछ इलाकों—बोरियाखुर्द, ओम नगर, साई नगर और बिलाल नगर—के भूखंडों का जिक्र सामने आया है, जहां बड़ी संख्या में जमीनों के रिकॉर्ड और स्वीकृतियों को लेकर सवाल उठे हैं।
विपक्ष ने भी इस मामले को गंभीर बताते हुए अधिकारियों और बिल्डरों की मिलीभगत का आरोप लगाया है। उनका कहना है कि अवैध कॉलोनियों को वैध बनाने के लिए नियमों को नजरअंदाज किया गया और सबूत मिटाने की कोशिश की गई।
फिलहाल निगम प्रशासन ने जांच के जरिए पूरे मामले की सच्चाई सामने लाने की बात कही है। अब सभी की नजरें समिति की रिपोर्ट पर टिकी हैं, जिससे इस कथित घोटाले की परतें खुलने की उम्मीद है।
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जांच समिति की कमान अपर आयुक्त स्तर के अधिकारी को सौंपी गई है, जबकि इसमें नगर निवेश और इंजीनियरिंग शाखा के अन्य अधिकारियों को भी शामिल किया गया है। टीम को पूरे प्रकरण की गहराई से पड़ताल कर जिम्मेदारों की पहचान करने के निर्देश दिए गए हैं।
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दरअसल, मामला कथित तौर पर 100 करोड़ रुपये से अधिक के घोटाले से जुड़ा बताया जा रहा है। आरोप है कि निर्माण और कॉलोनियों की स्वीकृति में तय प्रक्रिया का पालन नहीं किया गया और फाइलों को नियमों के विपरीत सीधे संबंधित विभागों तक पहुंचाया गया। इस दौरान कई अहम दस्तावेज और मूल फाइलें गायब होने की बात भी सामने आई है।
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विवाद तब बढ़ा जब कुछ मामलों में स्वीकृति प्रक्रिया में नगर निगम आयुक्त की भूमिका को ही दरकिनार कर दिया गया। बताया जा रहा है कि फाइलें सीधे जोन कार्यालय से प्लानिंग विभाग भेज दी गईं, जबकि नियमानुसार ऐसा संभव नहीं है। बाद में जब दस्तावेजों की जांच हुई तो कई मूल नस्तियां उपलब्ध नहीं मिलीं।
इस पूरे मामले में शहर के कुछ इलाकों—बोरियाखुर्द, ओम नगर, साई नगर और बिलाल नगर—के भूखंडों का जिक्र सामने आया है, जहां बड़ी संख्या में जमीनों के रिकॉर्ड और स्वीकृतियों को लेकर सवाल उठे हैं।
विपक्ष ने भी इस मामले को गंभीर बताते हुए अधिकारियों और बिल्डरों की मिलीभगत का आरोप लगाया है। उनका कहना है कि अवैध कॉलोनियों को वैध बनाने के लिए नियमों को नजरअंदाज किया गया और सबूत मिटाने की कोशिश की गई।
फिलहाल निगम प्रशासन ने जांच के जरिए पूरे मामले की सच्चाई सामने लाने की बात कही है। अब सभी की नजरें समिति की रिपोर्ट पर टिकी हैं, जिससे इस कथित घोटाले की परतें खुलने की उम्मीद है।