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Chhattisgarh News: जनजागरूकता से बाल विवाह रोकने में मिल रही मदद, 20 शादियां रोककर कराई गई तिथि स्थगित
Sun, 11 May 2025 03:42 PM IST
अमन कोशले
अमर उजाला नेटवर्क, रायपुर
अमर उजाला नेटवर्क, रायपुर
Published by: अमन कोशले
Updated Sun, 11 May 2025 03:42 PM IST
सार
बाल विवाह जैसी कुप्रथा को समाप्त करने के लिए बलरामपुर जिले में जनजागरूकता को लेकर प्रशासन द्वारा विशेष अभियान चलाया जा रहा है। जिले के विभिन्न क्षेत्रों में 20 बाल विवाह समय रहते रोके गए, जिनमें परिजनों को समझाइश देकर विवाह की तिथि स्थगित कराई गई।
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सांकेतिक तस्वीर
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
बाल विवाह जैसी कुप्रथा को समाप्त करने के लिए बलरामपुर जिले में जनजागरूकता को लेकर प्रशासन द्वारा विशेष अभियान चलाया जा रहा है। इसके सार्थक परिणाम भी देखने को मिल रहे हैं। कलेक्टर के मार्गदर्शन में जिले के सभी विकासखंडों में आयोजित समाधान शिविरों के माध्यम से बाल विवाह के खिलाफ जन जागरूकता अभियान चलाया जा रहा है।
इस परिप्रेक्ष्य में जिले के लुरघुट्टा समाधान शिविर में बाल विवाह रोकने के बारे में चर्चा की गई, जिसमें यह बताया गया कि बाल विवाह केवल कानूनी कर्तव्य नहीं, बल्कि एक सामाजिक जिम्मेदारी भी है। इस शिविर में महिला एवं बाल विकास विभाग द्वारा बाल विवाह के दुष्परिणाम, संबंधित कानून और सरकारी योजनाओं के बारे में जानकारी दी गई।
इसके साथ ही बालिकाओं की शिक्षा, स्वास्थ्य और उनके अधिकारों पर आधारित बुकलेट, ब्रोशर और पोस्टर वितरित किए गए। पढ़ाई फिर विदाई जैसे स्लोगन के माध्यम से आम लोगों को जागरूक किया गया। हाल ही में जिले के विभिन्न क्षेत्रों में 20 बाल विवाह समय रहते रोके गए, जिनमें परिजनों को समझाइश देकर विवाह की तिथि स्थगित कराई गई। इसके साथ ही यदि किसी परिवार ने समझाइश के बावजूद बाल विवाह कराने की कोशिश की, तो उनके खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई।
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इस परिप्रेक्ष्य में जिले के लुरघुट्टा समाधान शिविर में बाल विवाह रोकने के बारे में चर्चा की गई, जिसमें यह बताया गया कि बाल विवाह केवल कानूनी कर्तव्य नहीं, बल्कि एक सामाजिक जिम्मेदारी भी है। इस शिविर में महिला एवं बाल विकास विभाग द्वारा बाल विवाह के दुष्परिणाम, संबंधित कानून और सरकारी योजनाओं के बारे में जानकारी दी गई।
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इसके साथ ही बालिकाओं की शिक्षा, स्वास्थ्य और उनके अधिकारों पर आधारित बुकलेट, ब्रोशर और पोस्टर वितरित किए गए। पढ़ाई फिर विदाई जैसे स्लोगन के माध्यम से आम लोगों को जागरूक किया गया। हाल ही में जिले के विभिन्न क्षेत्रों में 20 बाल विवाह समय रहते रोके गए, जिनमें परिजनों को समझाइश देकर विवाह की तिथि स्थगित कराई गई। इसके साथ ही यदि किसी परिवार ने समझाइश के बावजूद बाल विवाह कराने की कोशिश की, तो उनके खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई।
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