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छत्तीसगढ़: 'आयुष्मान भारत' पर सरकार और निजी अस्पतालों में ठनी, मरीजों का इलाज करने से किया मना

Wed, 26 Sep 2018 11:26 AM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, रायपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, रायपुर Updated Wed, 26 Sep 2018 11:26 AM IST
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Private hospitals stop treatment to patients under ayushman bharat yojana in chhattisgarh
ayushman bharat yojana

केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी जन स्वास्थ्य बीमा योजना 'आयुष्मान भारत' छत्तीसगढ़ में विफल होता नजर आ रहा है। इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (आईएमए) की छत्तीसगढ़ इकाई के आह्वान पर राज्य के निजी अस्पतालों ने आयुष्मान भारत योजना के तहत मरीजों का इलाज करने से मना कर दिया है। आईएमए का कहना है कि विभिन्न बीमारियों के इलाज के लिए सरकार द्वारा पेश किए गए पैकेज 'मनमाने और काफी कम' हैं। 

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बता दें कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 23 सितंबर को दुनिया की सबसे बड़ी स्वास्थ्य बीमा योजना 'आयुष्मान भारत' का शुभारंभ किया था। इस योजना के तहत देश के 10.74 करोड़ परिवारों को 5 लाख रुपये तक की मुफ्त स्वास्थ्य बीमा की सुविधा मिलेगी।
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दरअसल, निजी अस्पतालों के डॉक्टरों का कहना है कि वो सरकार द्वारा निर्धारित दरों पर मरीजों का इलाज नहीं कर सकते हैं। आईएमए के राज्य अध्यक्ष डॉ. अशोक त्रिपाठी ने कहा 'हम इस मुद्दे पर चर्चा कर रहे हैं। डॉक्टरों से चर्चा के बाद इसपर अंतिम निर्णय लिया जाएगा।' 
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सोमवार को इस योजना के तहत इलाज के लिए गए लगभग 500 मरीजों को शहर के विभिन्न निजी अस्पतालों ने वापस भेज दिया था। अंबिकापुर की रहने वाली सहोदरा बाई ब्रेन ट्यूमर से पीड़ित हैं। जब वह इलाज के लिए एक निजी अस्पताल पहुंचीं और अपना स्मार्ट कार्ड दिखाया तो काउंटर पर से ही उन्हें ये कहकर लौटा दिया गया कि इस कार्ड के जरिए उनका इलाज नहीं हो सकता है। 

इसी तरह राजनंदगांव के राम दयाल कश्यप भी अपने एंजियोप्लास्टी के लिए एक निजी अस्पताल पहुंचे, लेकिन अस्पताल के डॉक्टरों ने उन्हें ये कहकर लौटा दिया कि उनका इलाज तभी हो सकता है जब वह कैश में शुल्क चुकाने के लिए तैयार हों। अस्पताल का कहना था कि मुफ्त इलाज फिलहाल रोक दिया गया है। 


हालांकि विरोध के बाद सरकार ने डॉक्टरों को शांत करने की कोशिश की है। सरकार ने एक आपातकालीन बैठक बुलाई थी, जिसमें डॉक्टरों को आश्वासन दिया गया कि पैकेज में संशोधन किया जाएगा। हालांकि इसके बावजूद डॉक्टरों का कहना है कि जब तक पैकेज में संशोधन नहीं किया जाता है, तब तक वो रोगियों का इलाज नहीं करेंगे।

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