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CG News: छत्तीसगढ़ में बासमती धान मिशन की तैयारी, किसानों को मिलेगा अंतरराष्ट्रीय बाजार का फायदा
Thu, 04 Jun 2026 04:39 PM IST
अमन कोशले
अमर उजाला नेटवर्क, रायपुर
अमर उजाला नेटवर्क, रायपुर
Published by: अमन कोशले
Updated Thu, 04 Jun 2026 04:39 PM IST
सार
छत्तीसगढ़ में किसानों की आय बढ़ाने और खेती में विविधता लाने के उद्देश्य से राज्य सरकार अब बासमती धान की खेती को बढ़ावा देने की तैयारी कर रही है।
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कृषि मंत्री राम विचार नेताम की अध्यक्षता में महत्वपूर्ण बैठक
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
छत्तीसगढ़ में किसानों की आय बढ़ाने और खेती में विविधता लाने के उद्देश्य से राज्य सरकार अब बासमती धान की खेती को बढ़ावा देने की तैयारी कर रही है। इसी दिशा में नवा रायपुर स्थित अटल नगर में कृषि मंत्री राम विचार नेताम की अध्यक्षता में एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई, जिसमें कृषि विभाग, कृषि विश्वविद्यालय, बीज निगम और इंडियन राइस एक्सपोर्टर्स फेडरेशन के प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया।
बैठक में राज्य में बासमती धान उत्पादन की संभावनाओं पर विस्तार से चर्चा की गई। कृषि मंत्री ने अधिकारियों को किसानों की आय बढ़ाने के लिए इस योजना पर गंभीरता से काम करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि किसानों को पारंपरिक खेती के साथ-साथ अधिक लाभ देने वाली फसलों की ओर भी प्रोत्साहित किया जाएगा।
बैठक के दौरान यह तय किया गया कि छत्तीसगढ़ में पायलट प्रोजेक्ट के रूप में बासमती धान की खेती शुरू की जाएगी। इसके लिए ऐसे क्षेत्रों की पहचान की जाएगी, जहां की जलवायु और तापमान बासमती उत्पादन के अनुकूल हैं। चयनित क्षेत्रों में खेती का रकबा बढ़ाकर किसानों को बेहतर आर्थिक लाभ दिलाने की योजना तैयार की जाएगी।
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अधिकारियों ने बताया कि बासमती और अन्य सुगंधित चावलों की यूरोप सहित अंतरराष्ट्रीय बाजारों में अच्छी मांग है। सामान्य धान की तुलना में इन किस्मों को बेहतर मूल्य मिलता है, जिससे किसानों की आय में उल्लेखनीय वृद्धि संभव है।
इंडियन राइस एक्सपोर्टर्स फेडरेशन ने भी इस पहल में सहयोग का भरोसा दिया है। फेडरेशन की ओर से किसानों के लिए बायबैक व्यवस्था, विपणन सहायता और निर्यात के अवसर उपलब्ध कराने की बात कही गई। इससे किसानों को अपनी उपज बेचने के लिए बेहतर बाजार मिल सकेगा।
बैठक में उत्पादन, प्रसंस्करण, विपणन और निर्यात को जोड़ते हुए एक समन्वित व्यवस्था विकसित करने पर भी सहमति बनी। सरकार का मानना है कि यह पहल न केवल किसानों की आमदनी बढ़ाने में मदद करेगी, बल्कि छत्तीसगढ़ को सुगंधित चावल उत्पादन के क्षेत्र में नई पहचान भी दिला सकती है।
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बैठक में राज्य में बासमती धान उत्पादन की संभावनाओं पर विस्तार से चर्चा की गई। कृषि मंत्री ने अधिकारियों को किसानों की आय बढ़ाने के लिए इस योजना पर गंभीरता से काम करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि किसानों को पारंपरिक खेती के साथ-साथ अधिक लाभ देने वाली फसलों की ओर भी प्रोत्साहित किया जाएगा।
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बैठक के दौरान यह तय किया गया कि छत्तीसगढ़ में पायलट प्रोजेक्ट के रूप में बासमती धान की खेती शुरू की जाएगी। इसके लिए ऐसे क्षेत्रों की पहचान की जाएगी, जहां की जलवायु और तापमान बासमती उत्पादन के अनुकूल हैं। चयनित क्षेत्रों में खेती का रकबा बढ़ाकर किसानों को बेहतर आर्थिक लाभ दिलाने की योजना तैयार की जाएगी।
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अधिकारियों ने बताया कि बासमती और अन्य सुगंधित चावलों की यूरोप सहित अंतरराष्ट्रीय बाजारों में अच्छी मांग है। सामान्य धान की तुलना में इन किस्मों को बेहतर मूल्य मिलता है, जिससे किसानों की आय में उल्लेखनीय वृद्धि संभव है।
इंडियन राइस एक्सपोर्टर्स फेडरेशन ने भी इस पहल में सहयोग का भरोसा दिया है। फेडरेशन की ओर से किसानों के लिए बायबैक व्यवस्था, विपणन सहायता और निर्यात के अवसर उपलब्ध कराने की बात कही गई। इससे किसानों को अपनी उपज बेचने के लिए बेहतर बाजार मिल सकेगा।
बैठक में उत्पादन, प्रसंस्करण, विपणन और निर्यात को जोड़ते हुए एक समन्वित व्यवस्था विकसित करने पर भी सहमति बनी। सरकार का मानना है कि यह पहल न केवल किसानों की आमदनी बढ़ाने में मदद करेगी, बल्कि छत्तीसगढ़ को सुगंधित चावल उत्पादन के क्षेत्र में नई पहचान भी दिला सकती है।