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सीजी: भिलाई में बांग्लादेशी घुसपैठियों के खिलाफ पुलिस की बड़ी कार्रवाई, जांच तेज; 30 हजार की बनी सूची

Sat, 17 Oct 2026 01:32 PM IST
अमन कोशले अमर उजाला नेटवर्क, दुर्ग-भिलाई
अमर उजाला नेटवर्क, दुर्ग-भिलाई Published by: अमन कोशले Updated Sat, 17 Oct 2026 01:32 PM IST
सार

जिले में अवैध रूप से रह रहे बांग्लादेशी नागरिकों के खिलाफ कार्रवाई तेज करते हुए पुलिस प्रशासन ने भिलाई इस्पात संयंत्र (बीएसपी) और अन्य उद्योगों में कार्यरत करीब 30,000 ठेका श्रमिकों और कर्मचारियों की विस्तृत सूची तैयार की है।

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Police take major action against Bangladeshi infiltrators in Bhilai, investigation intensified, list of 30,000
सांकेतिक तस्वीर - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

दुर्ग जिले में अवैध रूप से रह रहे बांग्लादेशी नागरिकों के खिलाफ कार्रवाई तेज करते हुए पुलिस प्रशासन ने भिलाई इस्पात संयंत्र (बीएसपी) और अन्य उद्योगों में कार्यरत करीब 30 हजार ठेका श्रमिकों और कर्मचारियों की विस्तृत सूची तैयार की है। संदिग्धों का सत्यापन करने के लिए विशेष कार्यबल (एसटीएफ) की एक टीम को कोलकाता भेजा गया है। पुलिस विभाग बीएसपी और अन्य संयंत्रों में काम करने वाले संदिग्धों का पूरा ब्योरा तैयार कर रहा है, ताकि नियम के तहत आगे की विधिक कार्रवाई की जा सके। जिन बांग्लादेशी नागरिकों के खिलाफ कोई गंभीर आपराधिक मामला दर्ज नहीं है, उनके संदर्भ में राज्य सरकार के माध्यम से प्राथमिकी वापस लेने का प्रस्ताव भेजा जाएगा। इसके बाद उन्हें वापस भेजने यानी डिपोर्ट करने की प्रक्रिया पूरी की जाएगी। इसके लिए एक मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) भी तैयार की गई है।
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इससे पहले भिलाई इस्पात संयंत्र में कार्यरत 1,188 श्रमिकों के दस्तावेज की सघन जांच की गई थी। इस जांच के दौरान सात बांग्लादेशी नागरिकों को पहचान छिपाकर काम करते पकड़ा गया था, जिन्हें अदालत के आदेश के बाद जेल भेज दिया गया। जांच सूची में शामिल 101 लोगों के बारे में स्पष्ट जानकारी उपलब्ध नहीं हो सकी थी। इनमें से 45 व्यक्तियों का भौतिक सत्यापन कराया गया। इसके अतिरिक्त बिना मुसाफिरी दर्ज कराए रह रहे 777 लोगों को चिह्नित किया गया। इनमें से पश्चिम बंगाल, ओडिशा, बिहार और उत्तर प्रदेश के रहने वाले 160 लोगों के स्थायी पते पर संदेह पत्र (सस्पेक्ट रोल) भेजे गए हैं।
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फर्जी पहचान पत्र और घुसपैठ का तरीका
पुलिस की जांच में यह बात सामने आई है कि बांग्लादेशी नागरिक भारत सीमा में प्रवेश करने के बाद सबसे पहले कोलकाता पहुंचते हैं। वहां स्थानीय संपर्कों और बिचौलियों की मदद से वे देश के अन्य राज्यों में चले जाते हैं। फर्जी दस्तावेज के सहारे अलग-अलग शहरों में रहने लगते हैं और फिर धीरे-धीरे स्थानीय स्तर पर अपने नए पहचान पत्र बनवा लेते हैं। दुर्ग जिले में भी ऐसे कई मामले उजागर हुए हैं, जहां फर्जी पहचान पत्र के आधार पर बांग्लादेशी नागरिक बरसों से रह रहे थे।
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फर्जी नाम से भिलाई में रह रही थी पन्ना बीवी
फर्जी दस्तावेज के आधार पर रहने के मामले में पुलिस ने पन्ना बीवी को गिरफ्तार किया है। बांग्लादेश के खुलना जिले की रहने वाली पन्ना बीवी 14 वर्ष की आयु में एक दलाल के जरिये भारत आई थी। वह कोलकाता के सोनागाछी क्षेत्र में करीब पांच वर्ष तक रही और फिर दिल्ली चली गई। दिल्ली में उसने अंजलि सिंह के नाम से फर्जी आधार कार्ड बनवाया। लगभग दो वर्ष पहले वह भिलाई आ गई और नेहरू मार्ग स्थित सब्जी व्यापारी सूरज साव के मकान में किराए पर रहने लगी। उसने इसी फर्जी आधार कार्ड के माध्यम से अगस्त 2024 में शंकराचार्य मेडिकल कॉलेज में इलाज कराया और शल्य चिकित्सा (ऑपरेशन) करवाई। भिलाई पुलिस ने पन्ना बीवी और उसे मकान किराए पर देने वाले सूरज साव को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया है।


पहचान छिपाकर रहने वाले अन्य मामले आए सामने
सुपेला थाना क्षेत्र की कांट्रैक्टर कॉलोनी से पुलिस ने ज्योति रसेल उर्फ शाहिदा खातून और उसके पति मोहम्मद रसेल को पकड़ा है। यह दंपती वर्ष 2020 में भी अलग-अलग मामलों में पकड़ा गया था। जमानत पर रिहा होने के बाद दोनों दोबारा भिलाई आकर पहचान छिपाकर रहने लगे। पुलिस जांच में पता चला कि दोनों इंटरनेट कॉल और व्हाट्सएप के माध्यम से बांग्लादेश में मौजूद अपने परिजनों से लगातार संपर्क में थे। इसके अतिरिक्त मोहन नगर थाना पुलिस ने जयंती नगर में शशि उपाध्याय के मकान पर अनैतिक गतिविधियों की सूचना पर कार्रवाई की थी। वहां जांच के दौरान पश्चिम बंगाल की दो युवतियों की पहचान बांग्लादेशी नागरिकों के रूप में हुई।
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