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छत्तीसगढ़ के पांच शक्तिपीठ: इन देवी स्थानों से खाली हाथ नहीं लौटते भक्त, अद्भुत और निराली है इनकी मान्यतायें
सार
छत्तीसगढ़ राज्य चार दिशाओं से प्रमुख चार देवी मंदिरों से बंधा हुआ है। यानी प्रदेश के इन चार भागों में मातारानी की विशेष कृपा रहती है। जो भी श्रद्दालु यहां भक्तिभाव से आते हैं, वो खाली हाथ नहीं लौटते। चारों दिशाओं में विराजमान ये देवियां अपने भक्तों की मनोकामनायें पूरी करती हैं।
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ग्रॉफिक्स: अमर उजाला डिजिटल
- फोटो : Amar Ujala Digital
विस्तार
छत्तीसगढ़ राज्य चार दिशाओं से प्रमुख चार देवी मंदिरों से बंधा हुआ है। यानी प्रदेश के इन चार भागों में मातारानी की विशेष कृपा रहती है। जो भी श्रद्दालु यहां भक्तिभाव से आते हैं, वो खाली हाथ नहीं लौटते। चारों दिशाओं में विराजमान ये देवियां अपने भक्तों की मनोकामनायें पूरी करती हैं। इन देवी शक्तिपीठों की महिमा अद्भुत और निराली है। जो भी भक्त यहां पर आता है, मातारानी का हो जाता है। ये पांचों शक्तिपीठ पूरे देश-प्रदेश में प्रख्यात हैं।
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वैसे तो छत्तीसगढ़ में पांच देवी शक्तिपीठ हैं, लेकिन प्रमुख चार ही हैं। इन देवी मंदिरों में राजनांदगांव जिला स्थित डोंगरगढ़ की बम्लेश्वरी देवी, दंतेवाड़ा जिला स्थित दंतेश्वरी देवी, बिलासपुर जिला स्थित रतनपुर की महामाया देवी और रायगढ़ जिला स्थित चंद्रपुर की चद्रहासिनी देवी शामिल हैं। वहीं पांचवीं देवी सरगुजा (अंबिकापुर) जिला स्थित खल्लारी में खल्लारी माता की महिमा भी निराली है। पांच शक्तिपीठों में श्रद्दालुओं पर इन देवियों की कृपा बरसती है। छत्तीसगढ़ में अनादि काल से शिवोपासना के साथ ही देवी उपासना भी प्रचलित है। माना जाता है कि पूरे छत्तीसगढ़ में महामाया और समलेश्वरी देवी का विस्तार अम्बिकापुर से ही हुआ है। सनातन धर्म में आदि तत्व को मातृशक्ति मानने की मान्यता है। शक्ति स्वरूपा मां भवानी छत्तीसगढ़ की अधिष्ठात्री हैं। यहां के सामंतों, राजा-महाराजा, जमींदारों आदि की कुलदेवी के रूप में प्रतिष्ठित आस्था के प्रमुख केंद्र हैं। इन देवी मंदिरों में प्राचीन काल में जवारा बोई जाती थी और अखंड ज्योति कलश प्रज्ज्वलित की जाती थी, जो आज भी अनवरत जारी है।
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डोंगरगढ़ की बम्लेश्वरी देवी
राजनांदगांव जिले में डोंगरगढ की मां बम्लेश्वरी देवी की महिला अद्भुत है। यहां पर बम्लेश्वरी के दो मंदिर हैं। पहला एक हजार फीट ऊंचाई पर स्थित है जो बड़ी बम्लेश्वरी देवी के नाम से प्रसिद्ध हैं। वहीं नीचे धरातल पर छोटी बम्लेश्वरी देवी हैं। मान्यता है कि बड़ी देवी के दर्शन के बाद छोटी देवी का भी दर्शन जरूरी है। नहीं तो यह दर्शन अधूरा माना जाता है। यहां हर साल नवरात्रि पर भव्य मेला लगता है। इसमें लाखों की संख्या में दर्शनार्थी पहुंचते हैं। डोंगरगढ चारों ओर हरी-भरी पहाडियों, छोटे-बडे तालाबों एवं पश्चिम में पनियाजोब जलाशय, उत्तर में ढारा जलाशय और दक्षिण में मडियान जलाशय से घिरा प्राकृतिक सुंदरता से परिपूर्ण स्थान है।
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दंतेवाड़ा की दंतेश्वरी देवी
दंतवाड़ा जिले में बस्तर की कुलदेवी दंतेश्वरी देवी हैं जो यहां के राजा के साथ आंध्र प्रदेश के वारंगल से आयी और शंखिनी डंकनी नदी के बीच में विराजित हुई और बाद में दंतेवाड़ा नगर उनके नाम पर बसायी गयी। बस्तर का राजा नवरात्रि में नौ दिन तक पुजारी के रूप में मंदिर में निवास करते थे. देवी की उनके उपर विशेष कृपा थी। जगदलपुर महल परिसर में भी दंतेश्वरी देवी का एक भव्य मंदिर है।
रतनपुर की महामाया देवी
बिलासपुर जिले के रतनपुर में महामाया देवी का सिर है और उसका धड़ अम्बिकापुर में है प्रतिवर्ष वहां मिट्टी का सिर बनाये जाने की बात कही जाती है। इसी प्रकार संबलपुर के राजा द्वारा देवी मां का प्रतिरूप संबलपुर ले जाकर समलेश्वरी देवी के रूप में स्थापित करने की किंवदंती प्रचलित है। समलेश्वरी देवी की भव्यता को देखकर दर्शनार्थी डर जाते थे अत: ऐसी मान्यता है कि देवी मंदिर में पीठ करके प्रतिष्ठित हुई सम्पूर्ण छत्तीसगढ़ में जितने भी देशी राजा-महाराजा हुए उनकी निष्ठा या तो रतनपुर के राजा या संबलपुर के राजा के प्रति थी। कदाचित् मैत्री भाव और अपने राज्य की सुख, समृद्धि और शांति के लिए वहां की देवी की प्रतिमूर्ति अपने राज्य में स्थापित करने किये जो आज लोगों की श्रद्धा के केंद्र हैं। वहीं रायपुर की महामाया देवी पुरानी बस्ती की महिमा भी निराली है।
चंद्रपुर की चद्रहासिनी
चंद्रसेनी या चद्रहासिनी देवी सरगुजा से आकर सारंगढ़ और रायगढ़ के बीच महानदी के तट पर विराजित हैं। उन्हीं के नाम पर कदाचित् चंद्रपुर नाम प्रचलित हुआ। पूर्व में यह एक छोटी जमींदारी थी, चंद्रसेन नामक राजा ने चंद्रपुर नगर बसाकर चंद्रसेनी देवी को विराजित करने की किंवदंती भी प्रचलित है तथ्य जो भी हो, मगर आज चंद्रसेनी देवी अपने नव कलेवर के साथ लोगों की श्रद्धा के केंद्र बिंदु है। नवरात्रि में और अन्य दिनों में भी यहां बलि दिये जाने की प्रथा है। पहाड़ी में सीढ़ी के दोनों ओर अनेक धार्मिक प्रसंगों का शिल्पांकन है , हनुमान और अर्द्धनारीश्वर की आदमकद प्रतिमा आकर्षण का केंद्र है। रायगढ़, सारंगढ़, चाम्पा, सक्ती में समलेश्वरी देवी की भव्य प्रतिमा है।
प्रदेश के पांच शक्तिपीठ
- डोंगरगढ़ की बम्लेश्वरी देवी (राजनांदगांव)
- दंतेवाड़ा की दंतेश्वरी देवी (दंतेवाड़ा)
- रतनपुर की महामाया देवी (बिलासपुर)
- चंद्रपुर की चद्रहासिनी (जांजगीर और रायगढ़)
- खल्लारी में खल्लारी देवी (महासमुंद)