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छत्तीसगढ़: भाई है पुलिसवाला तो बहन है नक्सली, आमना-सामने होने पर चलाते हैं गोलियां

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, सुकमा Updated Thu, 08 Aug 2019 11:37 AM IST
वेट्टी राम
वेट्टी राम - फोटो : ANI
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खास बातें

  • सुकमा पुलिस और ऑपरेशन के सेक्शन कमांडर वेट्टी राम एक गोपनीय सैनिक हैं।
  • राम की बहन वेट्टी कन्नी सीपीआई माओवाद (सीपीआईएम) की क्षेत्र समिति सदस्य हैं, जिसके सिर पर पांच लाख रुपये का ईनाम है।
  • राम और कन्नी दोनों 1990 की शुरुआत में माओवादी आंदोलन से जुड़े थे। हालांकि बाद में राम ने आत्मसमर्पण कर दिया।
29 जुलाई को शाम के करीब सात बजे 140 सुरक्षाकर्मी छत्तीसगढ़ के सुकमा जिले के जंगलों में स्थित माओवादी कैंप की घेराबंदी कर रहे थे। सुरक्षाकर्मियों का यह दस्ता रातभर चला था और इसकी अगुवाई सुकमा पुलिस और ऑपरेशन के सेक्शन कमांडर वेट्टी राम कर रहे थे जोकि एक गोपनीय सैनिक हैं। उनका मुख्य शिकार भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (माओवादी) के कोंटा क्षेत्र समिति के शीर्ष माओवादी सदस्यों में से एक वेट्टी कन्नी और उनकी 30 सदस्यीय टीम थी।
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जब दोनों आमने-सामने आए तो राम और कन्नी एक-दूसरे को देखने लगे। उनकी नजरें मिलीं और अचानक कन्नी के सुरक्षाकर्मियों ने राम पर गोलियां चलानी शुरू कर दी। जिसका कि उन्हें मुंहतोड़ जवाब दिया गया। 29 जुलाई की भयंकर गोलीबारी में दो नक्सलियों को मार गिराया गया था। कन्नी किसी तरह भागने में कामयाब रही। इस मुठभेड़ ने साबित कर दिया कि खून के रिश्ते कर्तव्य पर हमेशा भारी नहीं पड़ते हैं। 

दरअसल, 50 साल की कन्नी और 43 साल के राम असल में भाई बहन हैं। माओवादी और पुलिस की मुठभेड़ में दोनों एक-दूसरे के सामने खड़े थे। राम ने कहा, 'मैं उसपर गोली नहीं चलाना चाहता था। मुझे ऐसा करना पड़ा क्योंकि कुछ सेंकेड में ही उसके गार्ड ने मेरी टीम पर गोलियां चलानी शुरू कर दी। जिसका मैंने जवाब दिया। कुछ मिनट बाद मैंने उसे गोलीबारी करते हुए और फिर अचानक से जंगल में गायब होते हुए देखा।' 

कन्नी कोंटा क्षेत्र के सीपीआई माओवाद (सीपीआईएम) की क्षेत्र समिति सदस्य है। उसके सिर पर पांच लाख रुपये का ईनाम है। वह माओवादियों के पोदारियों की इंजार्च है। जिसका मतलब है कि वह गिरफ्तार माओवादियों को कानूनी सहायता मुहैया कराती है और पुलिस मुठभेड़ों में मरने वाले सीपीआईएम के कैडर के परिवारों के पुनर्वास की भी समीक्षा करती है। माओवादी कोंटा से बस्तर में प्रवेश करते हैं, जो तेलंगाना की सीमा में है और सबसे पुराने माओवादी गढ़ों में से एक है।

राम और कन्नी दोनों 1990 की शुरुआत में राष्ट्रीय राजमार्ग-30 के गगनपल्ली गांव के अन्य युवाओं के साथ माओवादी आंदोलन से जुड़े थे। राम ने कहा, 'हम दोनों बाल संघम के तौर पर शामिल हुए थे। हमसे कहा गया था कि यह आंदोलन क्षेत्र के गरीबों के लिए है। लेकिन अब चीजें बदल चुकी हैं। वर्तमान माओवादी आंदोलन में समर्पण का अभाव है और इसलिए मैंने 2018 में आत्मसमर्पण करने का फैसला किया। इसके बाद मुझे पुलिस में नौकरी मिली और अगले कुछ महीनो में मुझे पुलिस कांस्टेबल बना दिया जाएगा।'

राम ने बताया कि उन्होंने आत्मसमर्पण करने के बाद सुरक्षाकर्मियों के साथ 10 बड़े ऑपरेशनों को अंजाम दिया है। आत्मसमर्पण करने से पहले राम के सिर पर 6.5 लाख का ईनाम था। खुद आत्मसमर्पण करने के बाद राम ने अपनी बहन कन्नी को भी खुद को पुलिस के हवाले करने के लिए कहा। इसके लिए राम ने अपनी बहन को काफी सारे पत्र लिखे। कन्नी ने उसे पत्र का जवाब देते हुए गद्दार बताया। भरी आंखों से राम ने कहा, 'मैं हमेशा उसे गिरफ्तार करने या आत्मसमर्पण कराने की कोशिश करता हूं लेकिन मुठभेड़ में कुछ भी संभव है। मैं भगवान से प्रार्थना करता हूं कि ऐसा कभी न हो।'
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