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बेटा मर गया लेकिन मां ने उसे हमेशा के लिए 'जिंदा' कर दिया 

Thu, 02 Nov 2017 09:43 PM IST
टीम डिजिटल/अमर उजाला
टीम डिजिटल/अमर उजाला Updated Thu, 02 Nov 2017 09:43 PM IST
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organ donation of child by parents made him live forever
बनश्री दत्ता, अमित और गोपीनाथ दत्ता
किसी माँ बाप के लिए दुनिया में इससे बुरा कुछ नहीं हो सकता कि उनके बच्चे की मौत उनके आँखों के सामने हो जाए। एक माँ की तो दुनिया लुट गई और बाप का कलेजा फट गया। लेकिन इस मां बाप ने कुछ ऐसा किया कि उन्हें तसल्ली हो गई कि उनका बेटा जिंदा है। 
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दुर्ग के हनुमाननगर में रहने वाली बनश्री दत्ता का बेटा अमित कुमार कोयम्बटूर की शांति गियर लिमिटेड कंपनी में प्रशिक्षु था। उसने भुनेश्वर किड्स कॉलेज से मैकेनिकल इंजीनियरिंग की पढ़ाई की थी और वहीं से कैंपस सिलेक्शन में उसकी नौकरी लगी थी।
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24 अक्टूबर की रात अमित खाना खाने के बाद सड़क किनारे टहलते हुए माँ से बात कर रहा था। इस दौरान तेज रफ्तार से गुजर रही एक गाड़ी ने उसे टक्कर मार दी। बनश्री दत्ता ने फोन पर गाड़ी के ब्रेक लगने की तेज आवाज सुनी और उनका कलेजा कांप उठा। इसके बाद अमित का मोबाइल काम नहीं कर रहा था। 
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अमित की कोई खबर नहीं मिल रही थी 

अमित के पिता गोपीनाथ दत्ता बीएसपी में क्रेन ऑपरेटर हैं और जब उन्हें घटना के बारे में मालूम हुआ तो उन्होंने अमित के मकान मालिक और साथियों से संपर्क किया। किसी को अमित के बारे में कुछ पता नहीं चल सका। अगले दिन वहां सुलुर पुलिस थाने में अमित की गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज कराने पहुंचे तो पता चला कि सड़क दुर्घटना में एक युवक घायल हुआ है। पुलिस की जानकारी पर वे अस्पताल पहुंचे तो वह युवक अमित ही निकला। 

मेरा बेटा मरा नहीं जिंदा है 

organ donation of child by parents made him live forever

ब्रेन में ब्लड क्लॉटिंग हुई 

डॉक्टरों ने बताया कि अमित की हालत नाजुक है और किसी बड़े अस्पताल में इलाज कराने की सलाह दी। अमित के दोस्तों ने पैसे इकट्ठा किए और अमित को एक निजी अस्पताल में दाखिल कराया। वहां डॉक्टरों ने सीटी स्कैन रिपोर्ट के आधार पर बताया कि अमित को सिर में चार जगहों पर ब्लड क्लॉट हो गया है जिसमें एक काफी बड़ा है और दिमाग में रक्तस्राव रूक नहीं रहा। 
 

अमित दिमागी रूप से मृत हो गया 

अमित की स्थिति नाजुक बनी हुई थी तब डॉक्टरों ने तय किया कि ऑपरेशन जरूरी है। फोन पर अमित की हालत बयां कर उसके पिता से रजामंदी ली गई। इस बीच अमित के मां-पिता भी वहां पहुंच गए। छह दिनों तक अमित का इलाज चला लेकिन डॉक्टरों को सफलता नहीं मिली। 30 अक्टूबर को अमित का दिमाग निष्क्रिय हो गया और काम करना बंद कर चुका था। डॉक्टरों ने अमित को बेन डेड घोषित कर दिया।


मेरा बेटा मरा नहीं जिंदा है 

ये वो क्षण था जब अमित की माँ का दिल रो रहा था। अपने बच्चे को हमेशा के लिए खो देने का एहसास क्या होता ये माँ और बाप का दिल ही समझ सकता है। लेकिन बनश्री दत्ता ने अपने दिल पर पत्थर रख लिया और एक कुछ ऐसा करने का निश्चय किया जिससे अमित हमेशा के लिए अमर हो गया। बनश्री ने डॉक्टरों से कहा कि वो अपने बेटे के सभी अंगों को दान करना चाहती हैं। एक मां ने अपने 22 साल के बेटे के ब्रेन डेड होने पर उसके शरीर के सभी अंगों को दान कर दिया, दोनों आँखें, लिवर, किडनी, फेफड़े, चमड़ी, बोनमैरो, एल 2 एल3, दिल। बनश्री दत्ता कहती हैं कि ये अंग जितने भी लोगों के शरीर में रहेंगे, वे सब उनके बेटे अमित ही होंगे। एक माँ की इस प्यार ने अपने बेटे को हमेशा के लिए जिंदा कर दिया। 

कितने समय में कर सकते हैं अंगदान 

दिल - 4 से 6 घंटों के बीच 
फेफड़े - 4 से 6 घंटों के बीच 
लिवर - 12 से 24 घंटों के बीच 
किडनी - 48 से 72 घंटों के बीच 
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