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कोंडागांव: अमानक खाद का खुला खेल, सहकारी समितियों से लेकर अवैध दुकानों तक फैल चुका है जाल

Mon, 07 Jul 2025 01:13 PM IST
Digvijay Singh अमर उजाला नेटवर्क, कोंडागांव
अमर उजाला नेटवर्क, कोंडागांव Published by: Digvijay Singh Updated Mon, 07 Jul 2025 01:13 PM IST
सार

कोंडागांव जिले में सहकारी समितियों के माध्यम से किसानों को वितरित की जा रही खाद की गुणवत्ता पर बड़ा सवाल खड़ा हो गया है। कृषि विभाग द्वारा जांच के लिए भेजे गए सिंगल सुपर फास्फेट खाद के सैंपल प्रयोगशाला में अमानक पाए गए हैं।

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Open game of substandard fertilizers the network has spread from cooperative societies to illegal shops in Kon
अमानक खाद का खुला खेल - फोटो : अमर उदाला

विस्तार

कोंडागांव जिले में सहकारी समितियों के माध्यम से किसानों को वितरित की जा रही खाद की गुणवत्ता पर बड़ा सवाल खड़ा हो गया है। कृषि विभाग द्वारा जांच के लिए भेजे गए सिंगल सुपर फास्फेट खाद के सैंपल प्रयोगशाला में अमानक पाए गए हैं। प्रयोगशाला रिपोर्ट आने तक अधिकांश किसान इस खाद का उपयोग अपनी फसलों में कर चुके थे, जिससे अब फसल नुकसान का खतरा मंडराने लगा है। इस पूरे प्रकरण ने कृषि विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर प्रश्नचिह्न लगा दिए हैं।

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कृषि उपसंचालक डीपी टांडे के अनुसार, सहकारी समितियों से भेजे गए गणपति ब्रांड के जिंकेटेड सिंगल सुपर फास्फेट खाद के दो सैंपल जांच में फेल हो गए हैं। ये खाद बवई समिति और डवल लाक गोदाम बीजापुर से लिए गए थे। हैरानी की बात यह है कि इस खाद का वितरण पहले ही बड़े पैमाने पर किया जा चुका है। जिले में खरीफ 2025 के लिए 5,350 मीट्रिक टन खाद का लक्ष्य था, जिसमें से अब तक 747 मीट्रिक टन का वितरण हो चुका है। रायपुर स्थित कृषि विश्वविद्यालय के वैज्ञानिक डॉ. गोपी कृष्ण दास ने चेताया है कि अमानक खाद के उपयोग से पौधों को पोषण नहीं मिलेगा और उत्पादन पर गंभीर असर पड़ेगा।
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यह पहला मामला नहीं है जब जिले के किसान ठगी का शिकार हुए हों। पहले निजी कृषि केंद्र संचालकों द्वारा खराब गुणवत्ता के बीज और खाद बेचे जाने की घटनाएं सामने आई थीं, जिसमें सैकड़ों किसानों की फसलें प्रभावित हुई थीं। किसानों द्वारा शिकायतें किए जाने के बावजूद न तो बीज कंपनियों ने कोई जिम्मेदारी ली और न ही कृषि विभाग ने ठोस कार्रवाई की।
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जिले में कुल 354 लाइसेंसधारी उर्वरक विक्रेता हैं, जिनमें 14 लैंपस, 28 थोक विक्रेता और 326 खुदरा विक्रेता शामिल हैं। इसके अलावा, कई अवैध दुकानें जैसे ‘नायक किसान मित्र’  ‘ऑर्गेनिक एग्रीकल्चर’ बिना किसी लाइसेंस के उर्वरक बेच रही हैं। ये दुकानें न सिर्फ खुलेआम चल रही हैं, बल्कि विभागीय रिकॉर्ड में इनका कोई अस्तित्व तक दर्ज नहीं है। गुरुनानक चौक पर स्थित एक दुकान तो कृषि विभाग कार्यालय से मात्र 500 मीटर की दूरी पर संचालित हो रही है, फिर भी विभाग को इसकी जानकारी नहीं है, जो विभाग की संलिप्तता या लापरवाही को उजागर करता है।


कोंडागांव जिले में अमानक खाद और अवैध उर्वरक विक्रेताओं का प्रसार किसानों के भविष्य के लिए खतरा बनता जा रहा है। सहकारी समितियों से लेकर अनधिकृत दुकानों तक फैले इस जाल से किसानों को दोहरा नुकसान हो रहा है—फसल का नुकसान और आर्थिक क्षति। विभागीय कार्रवाई केवल खानापूर्ति तक सीमित है, जिससे किसानों में आक्रोश बढ़ रहा है। यदि समय रहते कड़ी कार्रवाई नहीं की गई तो किसानों का गुस्सा आंदोलन में बदल सकता है और इसके लिए पूरी जिम्मेदारी कृषि विभाग की होगी।

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