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CG News: ऑनलाइन तकनीक से आबकारी विभाग में बढ़ी पारदर्शिता, राजस्व में भी लगातार इजाफा
Wed, 14 Jan 2026 07:02 PM IST
अमन कोशले
अमर उजाला नेटवर्क, रायपुर
अमर उजाला नेटवर्क, रायपुर
Published by: अमन कोशले
Updated Wed, 14 Jan 2026 07:02 PM IST
सार
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में विभाग ने ई-सर्विस आधारित व्यवस्था को अपनाते हुए बॉटलिंग से लेकर डिलीवरी तक की पूरी प्रक्रिया को तकनीक से जोड़ दिया है, जिससे निगरानी मजबूत होने के साथ भ्रष्टाचार पर भी प्रभावी नियंत्रण संभव हुआ है।
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ऑनलाइन तकनीक से आबकारी विभाग में बढ़ी पारदर्शिता
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
छत्तीसगढ़ आबकारी विभाग में आधुनिक ऑनलाइन तकनीकों के इस्तेमाल से कार्यप्रणाली अधिक पारदर्शी और भरोसेमंद हो गई है। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में विभाग ने ई-सर्विस आधारित व्यवस्था को अपनाते हुए बॉटलिंग से लेकर डिलीवरी तक की पूरी प्रक्रिया को तकनीक से जोड़ दिया है, जिससे निगरानी मजबूत होने के साथ भ्रष्टाचार पर भी प्रभावी नियंत्रण संभव हुआ है।
आबकारी विभाग के अनुसार ई-चालान, सिंगल विंडो लॉग-इन सिस्टम, यूजर रजिस्ट्रेशन, रियल टाइम कैश कलेक्शन जानकारी और सेंट्रल वीडियो मॉनिटरिंग सिस्टम जैसी व्यवस्थाओं को पूरी तरह लागू किया गया है। इसके अलावा एनओसी परमिट जारी करने की ऑनलाइन व्यवस्था, ट्रैक एंड ट्रेस सिस्टम, आधार आधारित बायोमेट्रिक उपस्थिति, टोल-फ्री शिकायत सुविधा ने विभागीय कामकाज को अधिक कुशल और पारदर्शी बनाया है।
डिजिटल व्यवस्था का सीधा असर राज्य के राजस्व पर भी दिखाई दे रहा है। चालू वित्तीय वर्ष में आबकारी विभाग ने 12 हजार करोड़ रुपये के लक्ष्य की ओर बढ़ते हुए दिसंबर तक 10.50 प्रतिशत की वृद्धि दर के साथ 7,851 करोड़ रुपये का राजस्व अर्जित कर लिया है। अधिकारियों का मानना है कि तकनीक आधारित निगरानी और पारदर्शिता के कारण यह वृद्धि संभव हो पाई है।
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विभाग में आधुनिक वीडियो कंट्रोल रूम के माध्यम से बैठकों और नीतिगत निर्णयों की निगरानी की जा रही है। कंप्यूटर स्क्रीन पर डिजिटल डैशबोर्ड और लाइव डेटा के जरिए हर स्तर पर गतिविधियों पर नजर रखी जा रही है। वहीं क्यूआर कोड, मोबाइल स्कैनिंग, जीपीएस आधारित ट्रक ट्रैकिंग, बोतलों पर यूनिक कोड और डिलीवरी की डिजिटल पुष्टि जैसी व्यवस्थाओं से पूरी सप्लाई चेन सुरक्षित और नियंत्रित हो गई है।
आबकारी विभाग का कहना है कि सुव्यवस्थित और तकनीक आधारित कार्यप्रवाह के जरिए सुशासन के लक्ष्यों को साकार करने की दिशा में लगातार काम किया जा रहा है। आधुनिक तकनीक के उपयोग से न सिर्फ व्यवस्था में पारदर्शिता आई है, बल्कि आमजन का भरोसा भी मजबूत हुआ है।
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आबकारी विभाग के अनुसार ई-चालान, सिंगल विंडो लॉग-इन सिस्टम, यूजर रजिस्ट्रेशन, रियल टाइम कैश कलेक्शन जानकारी और सेंट्रल वीडियो मॉनिटरिंग सिस्टम जैसी व्यवस्थाओं को पूरी तरह लागू किया गया है। इसके अलावा एनओसी परमिट जारी करने की ऑनलाइन व्यवस्था, ट्रैक एंड ट्रेस सिस्टम, आधार आधारित बायोमेट्रिक उपस्थिति, टोल-फ्री शिकायत सुविधा ने विभागीय कामकाज को अधिक कुशल और पारदर्शी बनाया है।
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डिजिटल व्यवस्था का सीधा असर राज्य के राजस्व पर भी दिखाई दे रहा है। चालू वित्तीय वर्ष में आबकारी विभाग ने 12 हजार करोड़ रुपये के लक्ष्य की ओर बढ़ते हुए दिसंबर तक 10.50 प्रतिशत की वृद्धि दर के साथ 7,851 करोड़ रुपये का राजस्व अर्जित कर लिया है। अधिकारियों का मानना है कि तकनीक आधारित निगरानी और पारदर्शिता के कारण यह वृद्धि संभव हो पाई है।
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विभाग में आधुनिक वीडियो कंट्रोल रूम के माध्यम से बैठकों और नीतिगत निर्णयों की निगरानी की जा रही है। कंप्यूटर स्क्रीन पर डिजिटल डैशबोर्ड और लाइव डेटा के जरिए हर स्तर पर गतिविधियों पर नजर रखी जा रही है। वहीं क्यूआर कोड, मोबाइल स्कैनिंग, जीपीएस आधारित ट्रक ट्रैकिंग, बोतलों पर यूनिक कोड और डिलीवरी की डिजिटल पुष्टि जैसी व्यवस्थाओं से पूरी सप्लाई चेन सुरक्षित और नियंत्रित हो गई है।
आबकारी विभाग का कहना है कि सुव्यवस्थित और तकनीक आधारित कार्यप्रवाह के जरिए सुशासन के लक्ष्यों को साकार करने की दिशा में लगातार काम किया जा रहा है। आधुनिक तकनीक के उपयोग से न सिर्फ व्यवस्था में पारदर्शिता आई है, बल्कि आमजन का भरोसा भी मजबूत हुआ है।