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बंधुआ मजदूरों की खराब हालत पर NHRC ने अधिकारियों को जारी किए नोटिस
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, रायपुर
Updated Mon, 08 Jan 2018 06:49 PM IST
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राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (एनएचआरसी) ने जम्मू कश्मीर और छत्तीसगढ़ के अधिकारियों को नोटिस जारी कर छुड़ाए गए बंधुआ मजदूरों के पुनर्वास समेत कई जानकारियां मांगी हैं।
एनएचआरसी ने 28 और 29 दिसंबर को साम्बा और रियासी में दो ईंट भट्टों से बचाए गए 98 बंधुआ मजदूरों को पहुंचाई गई राहत, रिहाई प्रमाणपत्र और पुनर्वास के संबंध में नोटिस जारी किया है। एनएचआरसी ने अपने डीजी (आई) से भी इस मामले की जांच के लिए कहा है।
गौरतलब है कि जम्मू-कश्मीर के साम्बा और रियासी में स्थित दो ईंट भट्टों में छत्तीसगढ़ से लाए गए मजदूरों से बंधुआ मजदूरी कराई जा रही थी। घटना के खुलासे के पुलिस ने बंधुआ मजदूरों को छुड़ाया। मुक्त करवाए गए सत्तर लोगों में काफी संख्या में महिलाएं तथा बच्चे भी शामिल थे।
सभी छत्तीसगढ़ के विभिन्न क्षेत्रों के रहने वाले हैं। छानबीन में पता चला कि इन मजदूरों को काम के बदले केवल खाना दिया जाता था। क्योंकि मजदूरी के नाम पर ठेकेदार ने मोटी रकम ले रखी थी। जिसके बाद राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने मामले का संज्ञान लिया और इन मजदूरों के पुनर्वास के लिए राज्य सरकारों को निर्देश दिया था।
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एनएचआरसी ने 28 और 29 दिसंबर को साम्बा और रियासी में दो ईंट भट्टों से बचाए गए 98 बंधुआ मजदूरों को पहुंचाई गई राहत, रिहाई प्रमाणपत्र और पुनर्वास के संबंध में नोटिस जारी किया है। एनएचआरसी ने अपने डीजी (आई) से भी इस मामले की जांच के लिए कहा है।
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NHRC issues notices to authorities in J&K and Chhattisgarh in connection with relief, release certificates and rehabilitation of 98 bonded labourers rescued from two brick kiln sites in Samba and Reasi on Dec 28 & 29; also asks its DG (I) for an inquiry into the matter.
विज्ञापन विज्ञापन— ANI (@ANI) January 8, 2018
गौरतलब है कि जम्मू-कश्मीर के साम्बा और रियासी में स्थित दो ईंट भट्टों में छत्तीसगढ़ से लाए गए मजदूरों से बंधुआ मजदूरी कराई जा रही थी। घटना के खुलासे के पुलिस ने बंधुआ मजदूरों को छुड़ाया। मुक्त करवाए गए सत्तर लोगों में काफी संख्या में महिलाएं तथा बच्चे भी शामिल थे।
सभी छत्तीसगढ़ के विभिन्न क्षेत्रों के रहने वाले हैं। छानबीन में पता चला कि इन मजदूरों को काम के बदले केवल खाना दिया जाता था। क्योंकि मजदूरी के नाम पर ठेकेदार ने मोटी रकम ले रखी थी। जिसके बाद राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने मामले का संज्ञान लिया और इन मजदूरों के पुनर्वास के लिए राज्य सरकारों को निर्देश दिया था।