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अंबिकापुर में शिक्षकों का बड़ा प्रदर्शन: टीईटी की अनिवार्यता खत्म करने निकली 'मुक्ति महारैली'
Tue, 25 Aug 2026 05:30 PM IST
अंबिकापुर ब्यूरो
अमर उजाला नेटवर्क, अंबिकापुर
अमर उजाला नेटवर्क, अंबिकापुर
Published by: अंबिकापुर ब्यूरो
Updated Tue, 25 Aug 2026 05:30 PM IST
सार
पदोन्नति में शिक्षक पात्रता परीक्षा की अनिवार्यता समाप्त करने सहित विभिन्न मांगों को लेकर मंगलवार को अंबिकापुर में शिक्षकों ने जोरदार प्रदर्शन किया।
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शिक्षकों ने निकाली विशाल रैली।
- फोटो : credit
विस्तार
अंबिकापुर जिले में पदोन्नति में शिक्षक पात्रता परीक्षा यानी टीईटी की अनिवार्यता खत्म करने समेत कई मांगों को लेकर मंगलवार को शिक्षकों का बड़ा प्रदर्शन देखने को मिला। छत्तीसगढ़ शिक्षक संघर्ष मोर्चा के आह्वान पर आयोजित राज्यव्यापी आंदोलन में सरगुजा जिले के अलग-अलग विकासखंडों से बड़ी संख्या में शिक्षक-शिक्षिकाएं पहुंचे। कला केंद्र मैदान में धरना देने के बाद शिक्षकों ने शहर में 'टीईटी मुक्ति महारैली' निकालकर अपनी मांगों को लेकर आवाज बुलंद की।
रैली कला केंद्र मैदान से शुरू होकर कलेक्टर कार्यालय और कलेक्ट्रेट होते हुए जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय पहुंची। यहां शिक्षकों के प्रतिनिधिमंडल ने मुख्यमंत्री, शिक्षा मंत्री, शिक्षा सचिव और लोक शिक्षण संचालनालय के नाम कलेक्टर एवं जिला शिक्षा अधिकारी को ज्ञापन सौंपा।
शिक्षकों का कहना है कि जिनकी नियुक्ति पुराने भर्ती और पदोन्नति नियमों के तहत हुई थी, उस समय टीईटी अनिवार्य नहीं थी। ऐसे में वर्षों से सेवा दे रहे शिक्षकों पर अब नई व्यवस्था के तहत टीईटी की शर्त लागू करना उचित नहीं है। मोर्चा ने सवाल उठाया कि 20 से 28 साल तक पढ़ाने वाले अनुभवी शिक्षकों को दोबारा पात्रता परीक्षा देने के लिए क्यों बाध्य किया जा रहा है।
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जिला संयोजक कमलेश सिंह ने कहा कि टीईटी से प्रभावित शिक्षकों की सेवा सुरक्षा संगठन की प्राथमिकता है। उन्होंने कहा कि विभागीय स्तर पर इस मुद्दे पर सकारात्मक बातचीत हुई है, लेकिन समाधान नहीं होने पर आंदोलन को और तेज किया जाएगा। उन्होंने पदोन्नति सूची जारी होने की स्थिति में संभागीय संयुक्त संचालक और जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय के घेराव की चेतावनी दी।
शिक्षकों ने बीएड ब्रिज कोर्स शुरू करने, 13 फरवरी 2026 के भर्ती-पदोन्नति नियमों की विसंगतियां दूर करने, पुरानी पेंशन के लिए पूर्व सेवा की गणना और केंद्रीय स्तर के वेतनमान की मांग भी रखी। प्रांतीय सह-संचालक मुकेश मुदलियार ने कहा कि आंदोलन का उद्देश्य केवल विरोध नहीं, बल्कि शिक्षकों की समस्याओं का स्थायी समाधान हासिल करना है। रैली में विभिन्न शिक्षक संगठनों से जुड़े बड़ी संख्या में शिक्षक-शिक्षिकाएं शामिल रहे।
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रैली कला केंद्र मैदान से शुरू होकर कलेक्टर कार्यालय और कलेक्ट्रेट होते हुए जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय पहुंची। यहां शिक्षकों के प्रतिनिधिमंडल ने मुख्यमंत्री, शिक्षा मंत्री, शिक्षा सचिव और लोक शिक्षण संचालनालय के नाम कलेक्टर एवं जिला शिक्षा अधिकारी को ज्ञापन सौंपा।
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शिक्षकों का कहना है कि जिनकी नियुक्ति पुराने भर्ती और पदोन्नति नियमों के तहत हुई थी, उस समय टीईटी अनिवार्य नहीं थी। ऐसे में वर्षों से सेवा दे रहे शिक्षकों पर अब नई व्यवस्था के तहत टीईटी की शर्त लागू करना उचित नहीं है। मोर्चा ने सवाल उठाया कि 20 से 28 साल तक पढ़ाने वाले अनुभवी शिक्षकों को दोबारा पात्रता परीक्षा देने के लिए क्यों बाध्य किया जा रहा है।
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जिला संयोजक कमलेश सिंह ने कहा कि टीईटी से प्रभावित शिक्षकों की सेवा सुरक्षा संगठन की प्राथमिकता है। उन्होंने कहा कि विभागीय स्तर पर इस मुद्दे पर सकारात्मक बातचीत हुई है, लेकिन समाधान नहीं होने पर आंदोलन को और तेज किया जाएगा। उन्होंने पदोन्नति सूची जारी होने की स्थिति में संभागीय संयुक्त संचालक और जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय के घेराव की चेतावनी दी।
शिक्षकों ने बीएड ब्रिज कोर्स शुरू करने, 13 फरवरी 2026 के भर्ती-पदोन्नति नियमों की विसंगतियां दूर करने, पुरानी पेंशन के लिए पूर्व सेवा की गणना और केंद्रीय स्तर के वेतनमान की मांग भी रखी। प्रांतीय सह-संचालक मुकेश मुदलियार ने कहा कि आंदोलन का उद्देश्य केवल विरोध नहीं, बल्कि शिक्षकों की समस्याओं का स्थायी समाधान हासिल करना है। रैली में विभिन्न शिक्षक संगठनों से जुड़े बड़ी संख्या में शिक्षक-शिक्षिकाएं शामिल रहे।