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महादेव ऐप केस में नया खुलासा: सौरभ चंद्राकर के पास मिला फर्जी पासपोर्ट, ओमान में गिरफ्तारी के बाद जांच तेज
Tue, 21 Jul 2026 02:39 PM IST
अमन कोशले
अमर उजाला नेटवर्क, रायपुर
अमर उजाला नेटवर्क, रायपुर
Published by: अमन कोशले
Updated Tue, 21 Jul 2026 02:39 PM IST
सार
महादेव ऑनलाइन सट्टा ऐप मामले के मुख्य आरोपियों में शामिल सौरभ चंद्राकर की ओमान में गिरफ्तारी के बाद जांच में नए खुलासे सामने आ रहे हैं। जांच एजेंसियों के मुताबिक, सौरभ ने कथित तौर पर फर्जी पासपोर्ट के जरिए ओमान में प्रवेश किया था।
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सौरभ चंद्राकर के पास मिला फर्जी पासपोर्ट
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
महादेव ऑनलाइन सट्टा ऐप मामले के मुख्य आरोपियों में शामिल सौरभ चंद्राकर की ओमान में गिरफ्तारी के बाद जांच में नए खुलासे सामने आ रहे हैं। जांच एजेंसियों के मुताबिक, सौरभ ने कथित तौर पर फर्जी पासपोर्ट के जरिए ओमान में प्रवेश किया था। वायरल हुए दस्तावेज में उसकी तस्वीर तो है, लेकिन पहचान एक विदेशी नागरिक के नाम से दर्शाई गई है। इस खुलासे के बाद एजेंसियां फर्जी दस्तावेज तैयार करने वाले नेटवर्क और इसके पीछे की पूरी साजिश की जांच में जुट गई हैं।
प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि जिस पासपोर्ट का इस्तेमाल किया गया, उसमें सौरभ की वास्तविक पहचान छिपाई गई थी। दस्तावेज में अलग नाम, अलग जन्मतिथि और विदेशी नागरिकता का उल्लेख किया गया है। अधिकारियों को आशंका है कि यह पूरी कवायद भारत में चल रही कानूनी कार्रवाई और प्रत्यर्पण प्रक्रिया से बचने के उद्देश्य से की गई हो सकती है।
जांच में यह भी पता चला है कि सौरभ और उसके सहयोगी रवि उप्पल के पास पहले से एक अन्य देश की नागरिकता से जुड़े दस्तावेज भी मौजूद थे। अलग-अलग दस्तावेजों में अलग जन्मतिथि और पहचान मिलने के बाद जांच एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि इन फर्जी पहचान पत्रों का उपयोग किन-किन देशों में किया गया और इसके पीछे कौन-सा अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क सक्रिय था।
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इस बीच इंटरपोल की Commission for the Control of INTERPOL’s Files (CCF) पहले ही सौरभ चंद्राकर की रेड नोटिस हटाने संबंधी याचिका खारिज कर चुकी है। चंद्राकर ने दावा किया था कि उसके खिलाफ भारत में राजनीतिक कारणों से कार्रवाई की जा रही है, लेकिन आयोग ने इसे वित्तीय अपराध और मनी लॉन्ड्रिंग से जुड़ा मामला मानते हुए रेड नोटिस को बरकरार रखा।
सूत्रों के अनुसार, सौरभ चंद्राकर लंबे समय से विदेश में रहकर गिरफ्तारी से बचता रहा। इससे पहले भी उसे यूएई में रेड नोटिस के आधार पर हिरासत में लिया गया था, लेकिन बाद में रिहा कर दिया गया था। अब ओमान में गिरफ्तारी के बाद भारतीय एजेंसियां उसके प्रत्यर्पण की प्रक्रिया को आगे बढ़ाने की तैयारी कर रही हैं।
जांच एजेंसियों का मानना है कि यदि फर्जी पासपोर्ट के इस्तेमाल की पुष्टि होती है, तो यह न केवल भारतीय कानून बल्कि ओमान के कानून के तहत भी गंभीर अपराध की श्रेणी में आएगा। फिलहाल मामले में दस्तावेजों की जांच, अंतरराष्ट्रीय एजेंसियों से समन्वय और फर्जी पहचान तैयार करने वाले नेटवर्क की पड़ताल जारी है।
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प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि जिस पासपोर्ट का इस्तेमाल किया गया, उसमें सौरभ की वास्तविक पहचान छिपाई गई थी। दस्तावेज में अलग नाम, अलग जन्मतिथि और विदेशी नागरिकता का उल्लेख किया गया है। अधिकारियों को आशंका है कि यह पूरी कवायद भारत में चल रही कानूनी कार्रवाई और प्रत्यर्पण प्रक्रिया से बचने के उद्देश्य से की गई हो सकती है।
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जांच में यह भी पता चला है कि सौरभ और उसके सहयोगी रवि उप्पल के पास पहले से एक अन्य देश की नागरिकता से जुड़े दस्तावेज भी मौजूद थे। अलग-अलग दस्तावेजों में अलग जन्मतिथि और पहचान मिलने के बाद जांच एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि इन फर्जी पहचान पत्रों का उपयोग किन-किन देशों में किया गया और इसके पीछे कौन-सा अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क सक्रिय था।
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इस बीच इंटरपोल की Commission for the Control of INTERPOL’s Files (CCF) पहले ही सौरभ चंद्राकर की रेड नोटिस हटाने संबंधी याचिका खारिज कर चुकी है। चंद्राकर ने दावा किया था कि उसके खिलाफ भारत में राजनीतिक कारणों से कार्रवाई की जा रही है, लेकिन आयोग ने इसे वित्तीय अपराध और मनी लॉन्ड्रिंग से जुड़ा मामला मानते हुए रेड नोटिस को बरकरार रखा।
सूत्रों के अनुसार, सौरभ चंद्राकर लंबे समय से विदेश में रहकर गिरफ्तारी से बचता रहा। इससे पहले भी उसे यूएई में रेड नोटिस के आधार पर हिरासत में लिया गया था, लेकिन बाद में रिहा कर दिया गया था। अब ओमान में गिरफ्तारी के बाद भारतीय एजेंसियां उसके प्रत्यर्पण की प्रक्रिया को आगे बढ़ाने की तैयारी कर रही हैं।
जांच एजेंसियों का मानना है कि यदि फर्जी पासपोर्ट के इस्तेमाल की पुष्टि होती है, तो यह न केवल भारतीय कानून बल्कि ओमान के कानून के तहत भी गंभीर अपराध की श्रेणी में आएगा। फिलहाल मामले में दस्तावेजों की जांच, अंतरराष्ट्रीय एजेंसियों से समन्वय और फर्जी पहचान तैयार करने वाले नेटवर्क की पड़ताल जारी है।