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Chhattisgarh: बूझमाड़ के नेलांगुर में आईटीबीपी का नया कैंप स्थापित, नक्सली नेटवर्क को मिली बड़ी चुनौती
Thu, 24 Apr 2025 04:46 PM IST
श्याम जी.
अमर उजाला नेटवर्क, जगदलपुर
अमर उजाला नेटवर्क, जगदलपुर
Published by: श्याम जी.
Updated Thu, 24 Apr 2025 04:46 PM IST
सार
आईटीबीपी, डीआरजी और छत्तीसगढ़ पुलिस की संयुक्त कार्रवाई के चलते इस क्षेत्र में नक्सलियों की पकड़ लगातार कमजोर पड़ती जा रही है। बड़ी संख्या में नक्सली या तो आत्मसमर्पण कर रहे हैं या फिर इलाके से भागने को मजबूर हो रहे हैं।
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आईटीबीपी का नया कैंप स्थापित
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
कोंडागांव जिले के नक्सल प्रभावित अबूझमाड़ क्षेत्र में सुरक्षा बलों की रणनीति लगातार बढ़ती जा रही है। इसी तारतम्य में भारत-तिब्बत सीमा पुलिस (आईटीबीपी) ने नारायणपुर जिले के नक्सल प्रभावित गांव नेलांगुर गांव में एक नया कैंप स्थापित कर अपनी मौजूदगी को और मजबूत कर लिया है। इस नए कैंप के साथ माड़ क्षेत्रों में आईटीबीपी द्वारा स्थापित कैंपों की संख्या जनवरी 2025 से अब तक कुल पांच हो चुकी है।
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माड़ क्षेत्र को वर्षों से नक्सलियों का सुरक्षित गढ़ माना जाता रहा है, लेकिन कुछ वर्षों में माड़ बचाओ अभियान के अंतर्गत चलाए जा रहे अभियानों ने इस प्रथा को तोड़ना शुरू कर दिया है। आईटीबीपी की 45वीं वाहिनी द्वारा स्थापित नेलांगुर कैंप महाराष्ट्र की सीमा से महज एक किलोमीटर की दूरी पर स्थित है, जिससे यह स्पष्ट होता है कि सुरक्षा बलों ने अबूझमाड़ को दक्षिण से जोड़ने की रणनीति पर निर्णायक कदम बढ़ा दिया है।
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आईटीबीपी, डीआरजी और छत्तीसगढ़ पुलिस की संयुक्त कार्रवाई के चलते इस क्षेत्र में नक्सलियों की पकड़ लगातार कमजोर पड़ती जा रही है। बड़ी संख्या में नक्सली या तो आत्मसमर्पण कर रहे हैं या फिर इलाके से भागने को मजबूर हो रहे हैं। नेलांगुर में कैंप खुलने से न केवल ऑपरेशनों की तीव्रता में वृद्धि हुई है, बल्कि स्थानीय ग्रामीणों को भी सुरक्षा, स्वास्थ्य, पीने का पानी, सड़क और संचार जैसी बुनियादी सुविधाएं मिलने लगी हैं।
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यह कैंप आईटीबीपी के भुवनेश्वर स्थित सामरिक मुख्यालय के अधीन संचालित हो रहा है, जिसकी निगरानी केंद्रीय फ्रंटियर कमान द्वारा की जा रही है। 45वीं वाहिनी की इस उपलब्धि के पीछे सुरक्षा बलों का आपसी तालमेल और नक्सली चुनौती के प्रति उनकी सतत प्रतिबद्धता स्पष्ट दिखाई देती है। इस मौके पर विभिन्न वाहिनियों की टीमें भी मौजूद रहीं, जिन्होंने माओवादी प्रभाव को कमजोर करने के इस साझा लक्ष्य में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।