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कांकेर: जन अदालत लगाकर ग्रामीण की हत्या करने वाले नक्सली को सात साल बाद उम्रकैद

Thu, 17 Sep 2026 09:31 PM IST
अमन कोशले अमर उजाला नेटवर्क, रायपुर
अमर उजाला नेटवर्क, रायपुर Published by: अमन कोशले Updated Thu, 17 Sep 2026 09:31 PM IST
सार

जुगडा गांव में 2019 में जन अदालत लगाकर ग्रामीण की हत्या के मामले में विशेष अदालत ने नक्सली पीलूराम आंचला को दोषी ठहराते हुए उम्रकैद की सजा सुनाई।

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Naxalite who murdered a villager by holding a people's court gets life imprisonment after seven years
सांकेतिक तस्वीर - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) मामलों की विशेष अदालत ने वर्ष 2019 में एक ग्रामीण की हत्या करने वाले आरोपी नक्सली को उम्रकैद की सजा सुनाई है। भानुप्रतापपुर स्थित विशेष सत्र न्यायाधीश दीपक के. गुप्ता की अदालत ने मामले की सुनवाई करते हुए नक्सली पीलूराम आंचला उर्फ सालिक राम को दोषी पाया और आजीवन कारावास का दंड दिया। अदालत ने आरोपी पर विभिन्न धाराओं के तहत यह फैसला सुनाया।
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इस तरह ली थी ग्रामीणकी जान
घटना 26 अगस्त, 2019 की है, जब कांकेर जिले के अत्यंत नक्सल प्रभावित कोयलीबेड़ा थाना क्षेत्र के तहत आने वाले गांव जुगडा में यह वारदात हुई थी। वहां सशस्त्र नक्सलियों का समूह पहुंचा और ग्रामीण श्यामनाथ आंचला का उसके घर से अपहरण कर लिया। इसके बाद नक्सली ग्रामीण को जबरन पास के जंगल में ले गए, जहां उन्होंने तथाकथित जन अदालत लगाई और गोली मारकर श्यामनाथ की हत्या कर दी।
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पुलिस मुखबिरी का लगाया था आरोप
हत्या के बाद नक्सलियों ने घटनास्थल पर एक पर्चा छोड़ा था, जिसमें मृतक श्यामनाथ और उसके पिता पर पुलिस मुखबिरी करने का आरोप लगाया गया था। घटना के बाद कांकेर पुलिस ने आरोपी नक्सली पीलूराम और उसके अन्य साथियों के विरुद्ध भारतीय दंड संहिता, शस्त्र अधिनियम और गैरकानूनी गतिविधियां रोकथाम अधिनियम (यूएपीए) की गंभीर धाराओं के तहत अपराध दर्ज कर जांच शुरू की थी।
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2023 में हुई थी गिरफ्तारी
सुरक्षा बलों की लगातार तलाश के बाद मई 2023 में सीमा सुरक्षा बल (बीएसएफ) और जिला रिजर्व गार्ड (डीआरजी) की संयुक्त कार्रवाई के दौरान आरोपी पीलूराम को पकड़ा गया। इस अभियान में सुरक्षा बलों ने पीलूराम के साथ दो अन्य लोगों को भी गिरफ्तार किया था। उनके पास से वॉकी-टॉकी सेट, माओवादी साहित्य, कुछ पत्र और नकदी बरामद हुई थी। अदालत में अभियोजन पक्ष ने पर्याप्त साक्ष्य प्रस्तुत किए, जिनके आधार पर न्यायाधीश ने आरोपी को दोषी ठहराते हुए सजा सुनाई।
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