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नान घोटाला: सीबीआई ने आलोक, अनिल टुटेजा और सतीश वर्मा के खिलाफ दर्ज की FIR, लगाए जांच को प्रभावित करने का आरोप
Sat, 19 Apr 2025 04:42 PM IST
अमन कोशले
अमर उजाला नेटवर्क, रायपुर
अमर उजाला नेटवर्क, रायपुर
Published by: अमन कोशले
Updated Sat, 19 Apr 2025 04:42 PM IST
सार
छत्तीसगढ़ में नान घोटाले मामले में जांच को प्रभावित करने पर सीबीआई ने अनिल टुटेजा और आलोक शुक्ला के साथ पूर्व महाधिवक्ता सतीश चंद्र वर्मा के खिलाफ एफआईआर दर्ज किया गया है।
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सांकेतिक तस्वीर
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
छत्तीसगढ़ में नान घोटाले मामले में जांच को प्रभावित करने पर सीबीआई ने अनिल टुटेजा और आलोक शुक्ला के साथ पूर्व महाधिवक्ता सतीश चंद्र वर्मा के खिलाफ एफआईआर दर्ज किया गया है। सीबीआई ने पूर्व आईएएस अनिल टुटेजा और आलोक शुक्ला घर पर छापेमारी की। इस दौरान उन्हें कुछ आपत्तिजनक दस्तावेज बरामद मिले हैं, जिसकी जांच जारी है।
सीबीआई के मुताबिक, इन अफसरों पर आरोप है कि अपने पद का दुरुपयोग कर आर्थिक अपराध शाखा/एसीबी, रायपुर में उनके खिलाफ दर्ज एफआईआर संख्या 9/2015 और एनएएन मामले के आधार पर दर्ज प्रवर्तन निदेशालय के मामले में चल रही कार्रवाई को प्रभावित किया। आरोप है कि आयकर विभाग की ओर से जब्त डिजिटल साक्ष्यों के अनुसार, आरोपियों ने मामलों में कार्रवाई को कमजोर करने की कोशिश किए हैं।
जांच में पता चल है कि तत्कालीन महाधिवक्ता सतीश चंद्र वर्मा को अनुचित तरीके से सार्वजनिक कर्तव्य निभाने के लिए प्रेरित करने और ईडी, ईओडब्ल्यू/एसीबी, छत्तीसगढ़ द्वारा जांच के तहत उपरोक्त मामलों में खुद के लिए अग्रिम जमानत हासिल करने के लिए अनुचित लाभ प्रदान किए। आरोप है कि अग्रिम जमानत लेने के लिए राज्य आर्थिक अपराध अन्वेषण ब्यूरो में पदस्थ वरिष्ठ अधिकारियों के प्रक्रियात्मक और विभागीय कार्य से संबंधित दस्तावेजों तथा नान प्रकरण में उच्च न्यायालय में दाखिल किए जाने वाले जवाब में फेरबदल करवा लिया।
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सीबीआई के मुताबिक, इन अफसरों पर आरोप है कि अपने पद का दुरुपयोग कर आर्थिक अपराध शाखा/एसीबी, रायपुर में उनके खिलाफ दर्ज एफआईआर संख्या 9/2015 और एनएएन मामले के आधार पर दर्ज प्रवर्तन निदेशालय के मामले में चल रही कार्रवाई को प्रभावित किया। आरोप है कि आयकर विभाग की ओर से जब्त डिजिटल साक्ष्यों के अनुसार, आरोपियों ने मामलों में कार्रवाई को कमजोर करने की कोशिश किए हैं।
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जांच में पता चल है कि तत्कालीन महाधिवक्ता सतीश चंद्र वर्मा को अनुचित तरीके से सार्वजनिक कर्तव्य निभाने के लिए प्रेरित करने और ईडी, ईओडब्ल्यू/एसीबी, छत्तीसगढ़ द्वारा जांच के तहत उपरोक्त मामलों में खुद के लिए अग्रिम जमानत हासिल करने के लिए अनुचित लाभ प्रदान किए। आरोप है कि अग्रिम जमानत लेने के लिए राज्य आर्थिक अपराध अन्वेषण ब्यूरो में पदस्थ वरिष्ठ अधिकारियों के प्रक्रियात्मक और विभागीय कार्य से संबंधित दस्तावेजों तथा नान प्रकरण में उच्च न्यायालय में दाखिल किए जाने वाले जवाब में फेरबदल करवा लिया।
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