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प्रसव पीड़ा से जूझ रही महिला और बच्चे की मौत, 19 लाख रूपये क्षतिपूर्ति देने का आदेश
Mon, 29 Apr 2019 08:46 AM IST
आसिम खान
भाषा, रायगढ़
भाषा, रायगढ़
Published by: आसिम खान
Updated Mon, 29 Apr 2019 08:46 AM IST
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प्रतीकात्मक तस्वीर
- फोटो : सोशल मीडिया
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छत्तीसगढ़ के रायगढ़ जिले में उपभोक्ता फोरम ने इलाज में लापरवाही से मां-बच्चे की मौत होने के कारण एक किसान को 19.73 लाख रूपए क्षतिपूर्ति देने का आदेश दिया है। जिला उपभोक्ता फोरम के अधिवक्ता जे.एस.ठाकुर ने बताया कि रायगढ़ जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोषण फोरम ने किसान की गर्भवती पत्नी के उपचार में लापरवाही बरतने के कारण मां-बच्चे की मौत होने पर किसान को 19.73 लाख रुपये क्षतिपूर्ति के देने का आदेश दिया है।
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अधिवक्ता ठाकुर ने बताया कि आवेदक भागवत प्रसाद राठौर (37 वर्ष) ने क्षतिपूर्ति के लिए शिकायत दी थी। इस शिकायत में जिला कलेक्टर, मुख्य चिकित्सा और स्वास्थ्य अधिकारी, सिविल सर्जन जिला अस्पताल, स्त्री रोग विशेषज्ञ ललिता राजनाला और मेडिकल आफिसर राजेश कुमार सिंह को पक्षकार बनाया गया था।
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शिकायत के अनुसार आवेदक की पत्नी शशिकला राठौर (32 वर्ष) गर्भवती थी। उन्हें 26 जुलाई वर्ष 2015 को प्रसव पीड़ा हुई और उनको सिविल अस्पताल खरसिया में भर्ती कराया गया। उन्होंने बताया कि इस दौरान खरसिया सिविल अस्पताल में पदस्थ ड्यूटी नर्स द्वारा सूचित करने के बावजूद मेडिकल आफिसर राजेश कुमार सिंह और स्त्री रोग विशेषज्ञ ललिता राजनाला घर से नहीं आए।
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ठाकुर ने बताया कि आवेदक के आग्रह के बावजूद रात 2.30 बजे ललिता राजनाला ने प्रसव कराने से इंकार कर दिया और महिला को रायगढ़ जिला अस्पताल भेज दिया।
उन्होंने बताया कि आवेदक रात चार बजे अपनी गर्भवती पत्नी को प्रसव पीड़ा के साथ जिला अस्पताल में भर्ती कराया और उस दौरान नर्स ने बताया कि ऑपरेशन करना पड़ेगा। इसी दौरान पत्नी और बच्चे की मृत्यु हो गई।
अधिवक्ता ने बताया कि आवेदक ने फोरम में अपनी शिकायत के समर्थन में कई दस्तावेज और गवाह पेश किए। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में कहा गया कि समय पर प्रसव नहीं कराने के कारण मां-बच्चे की मौत हुई। तत्कालीन कलेक्टर ने अगस्त 2015 को स्वास्थ्य विभाग के सचिव को पत्र लिखकर दोनों चिकित्सकों को दोषी पाते हुए आवश्यक कार्यवाही करने की अनुशंसा की।
ठाकुर ने बताया कि जिला उपभोक्ता फोरम के अध्यक्ष एम.डी. जगदल्ला ने आवेदक को 19.72 लाख रुपये क्षतिपूर्ति और अधिवक्ता व्यय के 1001 रुपये एक माह के भीतर अदा करने का आदेश दिया है।