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Chhattisgarh: तेलंगाना सीमा पर माओवादी मूवमेंट, गिरफ्तारी या सरेंडर; बरसे देवा को लेकर सस्पेंस बरकरार

Thu, 01 Jan 2026 08:17 PM IST
अनुज कुमार अमर उजाला नेटवर्क, सुकमा
अमर उजाला नेटवर्क, सुकमा Published by: अनुज कुमार Updated Thu, 01 Jan 2026 08:17 PM IST
सार

तेलंगाना-छत्तीसगढ़ सीमा पर माओवादी बटालियन-01 इंचार्ज बारसे देवा सहित एक दर्जन से अधिक माओवादियों के समर्पण या गिरफ्तारी को लेकर सस्पेंस बरकरार है। आधिकारिक पुष्टि नहीं होने से स्थिति अस्पष्ट बनी हुई है।

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Maoist movement on Telangana border suspense surrounding Barse Deva continues
बरसे देवा - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

तेलंगाना-छत्तीसगढ़ सीमावर्ती इलाके में पिछले 48 घंटों में माओवादी नेटवर्क से जुड़े अहम घटनाक्रम सामने आए हैं। सुरक्षा एजेंसियों की गतिविधियों के तेज होने की जानकारी मिल रही है, जिसमें माओवादी बटालियन-01 के इंचार्ज बारसे देवा सहित एक दर्जन से अधिक माओवादियों के शामिल होने की बात कही जा रही है। हालांकि, यह अभी तक स्पष्ट नहीं हो सका है कि ये लोग पुलिस हिरासत में हैं या उन्होंने स्वेच्छा से आत्मसमर्पण किया है।

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इस मामले में तेलंगाना पुलिस या राज्य सरकार की ओर से कोई औपचारिक बयान जारी नहीं किया गया है। सीमा क्षेत्र से आ रही जानकारियों के अनुसार, कुछ इनपुट्स यह संकेत दे रहे हैं कि माओवादी समूह ने सुरक्षित मार्ग से तेलंगाना में प्रवेश कर वरिष्ठ अधिकारियों के समक्ष प्रस्तुत होने की प्रक्रिया शुरू की। वहीं, अन्य सूचनाओं में कहा जा रहा है कि सीमावर्ती इलाके में पुलिस की कार्रवाई के दौरान इन्हें नियंत्रण में लिया गया। माओवादियों की संख्या को लेकर भी अलग-अलग दावे किए जा रहे हैं, कुछ रिपोर्ट्स में 12 से 15 लोगों का जिक्र है, जबकि अन्य में यह संख्या अधिक बताई जा रही है। यह भी स्पष्ट नहीं है कि सभी को एक साथ लाया गया या अलग-अलग चरणों में कार्रवाई हुई।

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इस बीच, तेलंगाना स्थित एक मानवाधिकार संगठन ने दावा किया है कि बरसे देवा और अन्य माओवादी नेताओं को पुलिस ने हिरासत में लिया है। संगठन ने मांग की है कि यदि गिरफ्तारी हुई है, तो उन्हें तत्काल न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत किया जाए और उनके संवैधानिक अधिकारों की रक्षा सुनिश्चित की जाए। संगठन ने सुरक्षा अभियानों के दौरान मानवाधिकारों के उल्लंघन के आरोप भी दोहराए हैं और पूरे मामले की पारदर्शिता पर सवाल उठाए हैं।

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सुरक्षा मामलों के जानकारों का कहना है कि माओवादी नेतृत्व को लेकर पहले भी कई बार अपुष्ट खबरें सामने आती रही हैं, जिनकी बाद में पुष्टि नहीं हो सकी। ऐसे में, इस मामले में भी अंतिम निष्कर्ष प्रशासनिक घोषणा के बाद ही निकाला जा सकेगा। फिलहाल, तेलंगाना पुलिस और राज्य के वरिष्ठ अधिकारियों की प्रतिक्रिया का इंतजार किया जा रहा है। आधिकारिक जानकारी सामने आने के बाद ही यह तय हो पाएगा कि यह घटनाक्रम आत्मसमर्पण से जुड़ा है या किसी सुरक्षा कार्रवाई का परिणाम है।

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