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अविश्वास प्रस्ताव: मनीषा साहू अध्यक्ष तो राजू चंद्राकर बने धमतरी के उपाध्यक्ष, दोनों पार्टियों ने बचाईं सीटें
Fri, 10 Mar 2023 06:57 PM IST
अभिषेक वर्मा
अमर उजाला नेटवर्क, धमतरी
अमर उजाला नेटवर्क, धमतरी
Published by: अभिषेक वर्मा
Updated Fri, 10 Mar 2023 06:57 PM IST
सार
जनपद पंचायत अध्यक्ष गूंजा साहू और उपाध्यक्ष अवनेन्द्र साहू को कुर्सी से हटाने के लिए सत्तारुढ़ कांग्रेस और विपक्ष की भाजपा सदस्य एक होकर अविश्वास प्रस्ताव लाने कलेक्टर को हस्ताक्षर युक्त पत्र सौंपा था।
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मनीषा साहू अध्यक्ष तो राजू चंद्राकर बने धमतरी के उपाध्यक्ष।
- फोटो : संवाद
विस्तार
धमतरी में मौजूदा जनपद अध्यक्ष और उपाध्यक्ष के खिलाफ लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पारित होने के बाद शुक्रवार को अध्यक्ष और उपाध्यक्ष के लिए मतदान हुआ। गहमागहमी के बीच हुए इस मतदान में 8 वोट से मनीषा साहू ने जीत दर्ज की। उन्हें कुल 24 वोटों में 16 मत मिले, जबकि भाजपा समर्थित प्रत्याशी पूर्णिमा साहू को महज 8 वोट मिले। इस तरह कांग्रेस समर्थित जनपद सदस्य मनीषा साहू अब जनपद पंचायत धमतरी की नई अध्यक्ष होंगी। वहीं, उपाध्यक्ष के लिए हुए मतदान में भाजपा समर्थित जनपद सदस्य राजू चंद्राकर ने भी 16 वोट से जीत दर्ज की।
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दरअसल जनपद पंचायत अध्यक्ष गूंजा साहू और उपाध्यक्ष अवनेन्द्र साहू को कुर्सी से हटाने के लिए सत्तारुढ़ कांग्रेस और विपक्ष की भाजपा सदस्य एक होकर अविश्वास प्रस्ताव लाने कलेक्टर को हस्ताक्षर युक्त पत्र सौंपा था। जिसके बाद दोनों ही पार्टी सकते में आ गई थी। दोनों ही दलों ने अपने कुर्सी बचाने के लिए लगातार खूब बैठकें की। नतीजा कांग्रेस अपने अध्यक्ष के सीट को बचाने में कामयाब रही, तो वहीं भाजपा भी अपने उपाध्यक्ष सीट को बचाने में सफल रही।
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जनपद पंचायत धमतरी में जिस अध्यक्ष के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाया गया था, वह भी कांग्रेस समर्थित हैं तथा पूर्व उपाध्यक्ष अवनेन्द्र साहू भाजपा समर्थित हैं। इनके खिलाफ कांग्रेस-भाजपा जनपद सदस्यों में नाराजगी की खबर लंबे समय से सामने आ रही थीं। इस नाराजगी का कारण पंद्रहवे वित्त की राशि को जनपद क्षेत्रों में खर्च को लेकर सहमति नहीं बन पाना था।
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गौरतलब है कि जनपद अध्यक्ष और उपाध्यक्ष की कुर्सी निर्वाचन समय से ही विवादों में रही है। 25 सदस्यों वाली इस जनपद में पूर्व में भाजपा सदस्य के क्रॉस वोटिंग करने से कांग्रेस की गूंजा साहू जनपद अध्यक्ष बनने में सफल हो गई थीं। इसी तरह उपाध्यक्ष पद पर भी क्रास वोटिंग हुई थी, जिसके सहारे वे उपाध्यक्ष की कुर्सी पर काबिज हुए थे।