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छत्तीसगढ़: बस्तर में धान खरीदी के बाद बड़ा शॉर्टेज, 89 करोड़ की कमी पर समितियों से वसूली शुरू

Tue, 08 Sep 2026 07:28 PM IST
अमन कोशले अमर उजाला नेटवर्क, रायपुर
अमर उजाला नेटवर्क, रायपुर Published by: अमन कोशले Updated Tue, 08 Sep 2026 07:28 PM IST
सार

बस्तर संभाग में वर्ष 2025-26 की धान खरीदी के बाद भौतिक सत्यापन के दौरान 28 हजार 243 मीट्रिक टन धान कम मिला है। जिला सहकारी बैंक ने सात जिलों के 382 केंद्रों में हुई खरीदी में सामने आई इस कमी की कुल कीमत करीब 89 करोड़ 30 लाख 87 हजार रुपये आंकी है।

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Major shortage after paddy procurement in Bastar, recovery begins from committees for shortfall of Rs 89 crore
फाइल फोटो - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

छत्तीसगढ़ के बस्तर संभाग में वर्ष 2025-26 की धान खरीदी के बाद भौतिक सत्यापन के दौरान 28 हजार 243 मीट्रिक टन धान कम मिला है। जिला सहकारी बैंक ने सात जिलों के 382 केंद्रों में हुई खरीदी में सामने आई इस कमी की कुल कीमत करीब 89 करोड़ 30 लाख 87 हजार रुपये आंकी है। बैंक प्रशासन ने मामले में कार्रवाई करते हुए संबंधित प्राथमिक साख सहकारी समितियों के प्रबंधकों और खरीदी प्रभारियों से इस राशि की वसूली प्रक्रिया शुरू कर दी है।
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जिला सहकारी बैंक के अतिरिक्त प्रबंधक एस. रजा के अनुसार, बस्तर संभाग के सात जिलों में समर्थन मूल्य पर धान बेचने के लिए 2 लाख 72 हजार 647 किसानों ने पंजीयन कराया था। इनमें से दो लाख 28 हजार से अधिक किसानों ने 13 लाख 74 हजार 383 मीट्रिक टन धान बेचा। मिलरों ने इसमें से 13 लाख 46 हजार 138 मीट्रिक टन धान का उठाव किया।
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भौतिक सत्यापन में 28 हजार 244 मीट्रिक टन का शॉर्टेज पाया गया। अधिकारियों ने वसूली के लिए समितियों को नोटिस जारी कर तीन महीने का समय दिया है। निर्धारित अवधि में राशि जमा नहीं करने पर जिम्मेदार प्रबंधकों और प्रभारियों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कराई जाएगी। मार्कफेड से मिलने वाले कमीशन से भी भरपाई की कार्रवाई की जाएगी।
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कांकेर जिले में सबसे ज्यादा कमी
सहकारी बैंक के सूत्रों के अनुसार बस्तर संभाग के जिलों में बड़े पैमाने पर धान की कमी सामने आई है। इसमें सबसे ज्यादा कमी कांकेर जिले में 13,281 मीट्रिक टन दर्ज की गई है। इसके अलावा कोंडागांव जिले में 6,642 मीट्रिक टन, बस्तर जिले में 4,687 मीट्रिक टन, बीजापुर जिले में 2,131 मीट्रिक टन और सुकमा जिले में 1,501 मीट्रिक टन धान शॉर्टेज मिला है। इन सभी जिलों में मिली धान की कमी की कुल कीमत लगभग 89 करोड़ 30 लाख 87 हजार रुपये आंकी गई है।


प्रबंधक बोले-समितियों को भी मिले राहत
कार्रवाई के निर्देश के बाद समिति प्रबंधकों ने कई सवाल खड़े किए हैं। उनका कहना है कि मार्कफेड द्वारा निर्धारित समय पर उठाव नहीं किए जाने के कारण खरीदी केंद्रों में धान लंबे समय तक पड़ा रहा। जिला विपणन विभाग की देरी से संग्रहण केंद्रों में भी खुले में रखे धान को बारिश से नुकसान पहुंचा। प्रबंधकों का तर्क है कि जब संग्रहण केंद्रों और मिलरों को शॉर्टेज में सरकार की ओर से निर्धारित छूट या सुखत का प्रावधान दिया जाता है, तो समितियों को भी वैसी राहत मिलनी चाहिए।
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