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कोरबा:मतदाता सूची में चार पूर्व कलेक्टरों का नाम, निष्पक्ष जांच की मांग, पूर्व मंत्री जयसिंह अग्रवाल ने उठाए स

Tue, 12 Aug 2025 08:38 PM IST
Digvijay Singh अमर उजाला नेटवर्क, कोरबा
अमर उजाला नेटवर्क, कोरबा Published by: Digvijay Singh Updated Tue, 12 Aug 2025 08:38 PM IST
सार

आगामी नगरीय निकाय चुनावों के लिए निर्वाचन आयोग द्वारा हाल ही में जारी की गई मतदाता सूची में भारी गड़बड़ी के आरोप लगे हैं। पूर्व राजस्व मंत्री एवं वरिष्ठ कांग्रेस नेता जयसिंह अग्रवाल ने प्रेस वार्ता में कई गंभीर विसंगतियों का खुलासा करते हुए पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की है।

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Names of four former collectors in voter list demand for fair investigation former minister Jaisingh Agarwal r
पूर्व मंत्री जयसिंह अग्रवाल - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

आगामी नगरीय निकाय चुनावों के लिए निर्वाचन आयोग द्वारा हाल ही में जारी की गई मतदाता सूची में भारी गड़बड़ी के आरोप लगे हैं। पूर्व राजस्व मंत्री एवं वरिष्ठ कांग्रेस नेता जयसिंह अग्रवाल ने प्रेस वार्ता में कई गंभीर विसंगतियों का खुलासा करते हुए पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की है। पूर्व मंत्री अग्रवाल ने दस्तावेज़ों के साथ बताया कि कोसाबाड़ी वार्ड क्रमांक 36 के डिंगापुर मतदान केन्द्र क्रमांक 04, अनुभाग क्रमांक 05 की मतदाता सूची में चौंकाने वाली बातें सामने आई हैं। यहां कुल 910 मतदाता दर्ज हैं, लेकिन सूची में ऐसे कई नाम हैं जो वर्षों पहले यहां से स्थानांतरित या सेवानिवृत्त हो चुके हैं।

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सबसे अहम खुलासे में, जिला निर्वाचन अधिकारी के सरकारी आवास (आवास क्रमांक सी-2) के पते पर चार पूर्व कलेक्टरों – रानू साहू (तबादला 01.07.2022), मोहम्मद कैसर अब्दुल हक (तबादला 06.02.2019), किरण कौशल (तबादला 07.06.2021) और सौरभ कुमार (तबादला 04.01.2024) – का नाम अब भी मतदाता सूची में दर्ज है। यही नहीं, तत्कालीन डिप्टी कलेक्टर रुचि शार्दुल, अपर कलेक्टर प्रियंका महोबिया और कोषालय अधिकारी गौरीशंकर जागृति का नाम भी इसी सूची में मौजूद है, जबकि वे भी अब यहां पदस्थ नहीं हैं।
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अग्रवाल ने कहा, “विडंबना यह है कि जिस सरकारी आवास में वर्तमान कलेक्टर अजीत बसंत रहते हैं, वही पता इन सभी अधिकारियों के नाम के साथ मतदाता सूची में दर्ज है। जब जिला निर्वाचन अधिकारी अपने ही पते से जुड़ी गड़बड़ी ठीक नहीं कर पाए, तो पूरे जिले की सूची पर विश्वास कैसे किया जा सकता है?”
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पूर्व मंत्री ने आगे और भी उदाहरण दिए—
डिप्टी कलेक्टर बी.एस. मरकाम, जो वर्ष 2022 में सेवानिवृत्त हो गए, उनका नाम अब भी सूची में है।
जिला खाद्य अधिकारी एच. मसीह के सेवानिवृत्त होने के बावजूद उनका नाम सरकारी आवास पते के साथ दर्ज है।
रौनक ठाकुर और रोशनी ठाकुर समेत एक परिवार के चार सदस्य, जो पिछले पांच साल से बिलासपुर में रह रहे हैं, उनका नाम अब तक सूची से नहीं हटाया गया है।
अग्रवाल ने यह आशंका भी जताई कि जिन चार पूर्व कलेक्टरों का नाम कोरबा की सूची में है, संभव है कि उनके नाम स्थानांतरण के बाद नए जिलों में भी जोड़ दिए गए हों। साथ ही, ऐसे कई दिवंगत व्यक्तियों और डुप्लीकेट मतदाताओं के नाम भी सूची में दर्ज होने की संभावना है।उन्होंने कहा, “यह तो केवल एक मतदान केन्द्र की स्थिति है, जिसमें 910 मतदाता हैं। अगर एक जगह इतनी गड़बड़ियां हैं, तो पूरे निगम के 67 वार्डों में कितनी बड़ी त्रुटियां होंगी, इसका आसानी से अंदाजा लगाया जा सकता है। यह सिर्फ कोरबा का मामला नहीं, बल्कि पूरे प्रदेश की मतदाता सूचियों की निष्पक्ष जांच राज्य निर्वाचन आयोग को करनी चाहिए।” पूर्व मंत्री ने इस मामले में राज्य निर्वाचन आयोग और भारत निर्वाचन आयोग को पत्र भेजकर तत्काल कार्रवाई और स्वतंत्र जांच की मांग की है।


 
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