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Korba: किसानों ने तीन घंटे बंद कराई ढेलवाडीह खदान, पेयजल संकट दूर करने की मांग; सात दिन का दिया अल्टीमेटम

Thu, 23 Mar 2023 05:15 PM IST
मोहनीश श्रीवास्तव न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कोरबा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कोरबा Published by: मोहनीश श्रीवास्तव Updated Thu, 23 Mar 2023 05:15 PM IST
सार

आंदोलन की चेतावनी किसान सभा ने एक सप्ताह पहले ही एसईसीएल प्रबंधन के साथ जिला प्रशासन को दे दी थी। इसके बाद भी प्रबंधन और प्रशासन ने पेयजल समस्या को हल नहीं निकला। इससे किसान आक्रोशित हो गए। किसान सभा नेता जवाहर सिंह कंवर और प्रशांत झा ने कहा कि जिला पूर्ण रूप से एसईसीएल प्रभावित क्षेत्र है। कोयला उत्पादन के नए कीर्तिमान का जशन एसईसीएल मना रही है। दूसरी ओर किसानों की जमीन लेने के बाद मूलभूत सुविधा पानी भी उपलब्ध नहीं करा रही है। 

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chhattisgarh farmers closed SECL dhelwadih mine due to drinking water crisis in korba
प्रबंधन ने किसानों को दिया लिखित आश्वासन। - फोटो : संवाद

विस्तार

छत्तीसगढ़ के कोरबा में किसान सभा की अगुआई में गुरुवार को ग्रामीणों ने ढेलवाडीह कोयला खदान में काम ठप करा दिया। करीब तीन घंटे तक हंगामा चलता रहा। इस दौरान किसी भी मजदूर को अंदर या बाहर नहीं जाने दिया गया। सूचना मिलने पर अफसरों ने ग्रामीणों को आश्वासन दिया। इसके बाद ग्रामीण वहां से हटें। वहीं एक सप्ताह में मांग पूरी नहीं होने पर फिर खदान बंद करने की चेतावनी दी है। यह ग्रामीण खदान के प्रभावित गांवों से हैं। इसके चलते गांव में पेयजल संकट शुरू हो गया है। 

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दरअसल, ढेलवाडीह कोयला खदान से प्रभावित गांव ढपढप कसरेंगा में पेयजल संकट बन गा है। साथ ही गांव के कुंओं, बोरहोल और घरों को भी नुकसान हुआ है। इसके चलते क्षतिपूर्ति की मांग को लेकर गुरुवार सुबह करीब 6 बजे ग्रामीण खदान के मुहाने पर बैठ गए। उन्होंने खदान के अंदर-बाहर किसी के भी जाने पर रोक लगा दी। इससे खदान में पानी निकासी की समस्या बढ़ने लगी। जानकारी अफसरों को लगी तो वह भी मौके पर पहुंच गए। प्रबंधन के समझाने पर चार कर्मचारियों को अंदर जाने दिया। 
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प्रबंधन ने तत्काल टैंकर के माध्यम से पेयजल उपलब्ध कराने के साथ अन्य समस्याओं के संबंध में ग्रामीणों से वार्ता की। प्रबंधन ने पेयजल समस्या का एक सप्ताह में निराकरण करने का आश्वासन दिया है। साथ ही ग्रामीणों के घर, कुंआ, बोर को हुए नुकसान के संबंध मे 29 मार्च को ढेलवाडीह में बैठक कर आगे कार्यवाही का लिखित आश्वाशन भी दिया है। इसके बाद ग्रामीणों ने आंदोलन स्थगित किया और वहां से लौट गए। साथ ही ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि एक सप्ताह में मांग पूरी नहीं हुई तो एक अप्रैल से फिर आंदोलन करेंगे। 

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