Chhattisgarh ED Raid: कोरबा कलेक्ट्रेट में पांच माह में तीसरी बार छापा, माइनिंग दस्तावेजों की हो रही जांच
बताया जा रहा है कि कलेक्ट्रेट स्थित खनिज विभाग में कोल और उससे जुड़े दस्तावेजों को खंगाला जा रहा है। इसके चलते अफसर से लेकर कोल व्यवसायी तक सकते में आ गए हैं। कहा जा रहा है कि लेवी का मामला अभी शांत नहीं हुआ है।
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छत्तीसगढ़ के कोरबा कलेक्ट्रेट में ईडी (प्रवर्तन निदेशालय) की टीम ने एक बार फिर बुधवार सुबह छापा मारा है। इसके बाद से कार्रवाई चल रही है। ईडी की टीम माइनिंग से जुड़े दस्तावेजों को खंगाल रही है। सारा मामला कोल ट्रांसपोर्टिग की लेवी से जुड़ा हुआ है। पिछले पांच महीने में यह तीसरी बार है, जब प्रर्वतन निदेशालय की टीम कोरबा कलेक्ट्रेट पहुंची है।
दरअसल, छत्तीसगढ़ में ईडी की कोल स्कैम को लेकर जांच जारी है। ऐसे में एक बार फिर ईडी की टीम कोरबा रिटर्न हुई है। बताया जा रहा है कि कलेक्ट्रेट स्थित खनिज विभाग में कोल और उससे जुड़े दस्तावेजों को खंगाला जा रहा है। इसके चलते अफसर से लेकर कोल व्यवसायी तक सकते में आ गए हैं। कहा जा रहा है कि लेवी का मामला अभी शांत नहीं हुआ है।
अक्तूबर में पहली बार ईडी की टीम ने मारा था छापा
- ईडी की टीम ने अक्तूबर माह में सबसे पहले कोरबा कलेक्ट्रेट में छापा मारा था। उस दौरान खनिज विभाग में दबिश नहीं दी थी। हालांकि पूरे कलेक्ट्रेट परिसर को छावनी में तब्दील कर दिया गया था। सारे अधिकारियों और कर्मचारियों को बाहर कर दस्तावेज खंगाले गए थे। तीन दिनों तक टीम कोरबा जिले में कार्रवाई करती रही।
- दूसरी बार फिर कार्रवाई में कोरबा कलेक्टर संजीव झा से भी जानकारी ली गई। खनिज विभाग में खदानों से कोयला परिवहन करने की अनुमति से जुड़े दस्तावेज खंगाले गए। कोयला डिलीवरी की प्रक्रिया जो ऑनलाइन से ऑफलाइन की गई उसके दस्तावेज भी चेक किए गए थे। टीम ने आदिवासी विकास विभाग आयुक्त के दफ्तर में भी दबिश दी है। बताया जा रहा है कि रायगढ़ की कलेक्टर रानू साहू और उनके बीच मधुर संबंध थे।